चंडीगढ़
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने ड्रग तस्करी के दो आरोपियों की जमानत याचिका खारिज करते हुए हरियाणा मे बढ़ते नशे के कारोबार पर चिंता जताई है। हाईकोर्ट ने कहा कि नशे को रोकने के लिए अभी कदम उठाना बहुत जरूरी है वरना बहुत देर हो जाएगी। इस टिप्पणी के साथ ही हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को नशे पर लगाम लगाने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स गठित करने के आदेश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने ड्रग तस्करी में गिरफ्तार सिरसा निवासी कमलजीत सिंह और अमनदीप सिंह की जमानत याचिका खारिज कर दिया और राज्य सरकार को आदेश जारी करते हुए कहा कि जेलों में नशे के कारोबार की शिकायतें मिलती हैं। ऐसे में प्रत्येक जेल में स्निफर डॉग्स की तैनाती की जाए ताकि जेल में आने वाले हर व्यक्ति और सामान की जांच की जा सके और पता लगाया जा सके कि कहीं जेल में ड्रग्स की सप्लाई तो नहीं की जा रही है।
कैदियों की जांच की जाए ताकि पता लगाया जा सके कि कहीं कैदी नशे के प्रभाव में तो नहीं हैं। प्रभाव में होने पर इलाज दिया जाए और डी-एडिक्शन केंद्र भेजा जाए। किसी आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने से पहले उसका मेडिकल करवाया जाए और रिकार्ड मेनटेन किया जाए।
शिक्षण संस्थानों के बाहर तैनात की जाए सादी वर्दी में पुलिस
कोर्ट ने कहा कि जिला शिक्षा अधिकारी उन स्कूलों की सूची तैयार करें जहां सबसे ज्यादा ड्रग्स की शिकायतें मिलती हैं ताकि वहां ज्यादा प्रभावी तरीके से कार्रवाई की जा सके। इसके साथ ही कोर्ट ने नाबालिगों और युवाओं में बढ़ते ड्रग्स के चलन पर सख्ती से रोक लगाने के लिए राज्य के प्रत्येक शिक्षण संस्थान, स्कूल, कॉलेजों और यूनिवर्सिटी के बाहर सादे कपड़ों में पुलिस कर्मियों की तैनाती के आदेश दे दिए हैं जो यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी ड्रग पैडलर इन शिक्षण संस्थानों के बाहर नजर न आए।
स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए
इसके साथ ही हाई कोर्ट ने एंटी नारकोटिक्स सेल को आदेश दे दिए हैं कि वह हर जिले में उन जगहों की पहचान करे जहां नशा बिकने की शिकायतें आती हैं और फिर स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर कार्रवाई कर नशे के कारोबार की कमर तोड़ी जा जाए। हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश दिए हैं कि किसी भी होटल, रेस्टोरेंट और बार आदि में नाबालिगों को शराब न परोसने दी जाए। इसके अलावा हाईकोर्ट ने नशे के दुष्प्रभाव के प्रति बच्चों कि जागरूक करने के लिए स्कूलों के पाठ्यक्रम में इसे शामिल करने के आदेश भी दिए हैं।
हर जिले में पुनर्वास केंद्र
हाईकोर्ट ने कहा कि नशे के दलदल से बाहर आने वालों का पुनर्वास जरूरी है। सरकार छह महीने में हर जिले में पुनर्वास केंद्र बनवाए। हर केंद्र में एक साइकेट्रिस्ट और काउंसलर की नियुक्ति की जाए। जिस काउंसलर की रिहेबिलिटेशन केंद्र में नियुक्ति की जाए वह एरिया के सभी स्कूलों का दौरा कर छात्रों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करे।लगाम लगाने के लिए डंडा जरूरी
हाईकोर्ट ने कहा कि नशे पर लगाम लगाने केलिए डंडा जरूरी है। ऐसे में पुलिस के हाथ खोलते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, ओपियम एक्ट और एनडीपीएस एक्ट के केस में यदि पुलिस को लगता है कि आरोपी की प्रोपर्टी अटैच करना जरूरी है तो पुलिस ऐसा करने के लिए स्वतंत्र है।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने ड्रग तस्करी के दो आरोपियों की जमानत याचिका खारिज करते हुए हरियाणा मे बढ़ते नशे के कारोबार पर चिंता जताई है। हाईकोर्ट ने कहा कि नशे को रोकने के लिए अभी कदम उठाना बहुत जरूरी है वरना बहुत देर हो जाएगी। इस टिप्पणी के साथ ही हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को नशे पर लगाम लगाने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स गठित करने के आदेश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने ड्रग तस्करी में गिरफ्तार सिरसा निवासी कमलजीत सिंह और अमनदीप सिंह की जमानत याचिका खारिज कर दिया और राज्य सरकार को आदेश जारी करते हुए कहा कि जेलों में नशे के कारोबार की शिकायतें मिलती हैं। ऐसे में प्रत्येक जेल में स्निफर डॉग्स की तैनाती की जाए ताकि जेल में आने वाले हर व्यक्ति और सामान की जांच की जा सके और पता लगाया जा सके कि कहीं जेल में ड्रग्स की सप्लाई तो नहीं की जा रही है।
कैदियों की जांच की जाए ताकि पता लगाया जा सके कि कहीं कैदी नशे के प्रभाव में तो नहीं हैं। प्रभाव में होने पर इलाज दिया जाए और डी-एडिक्शन केंद्र भेजा जाए। किसी आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने से पहले उसका मेडिकल करवाया जाए और रिकार्ड मेनटेन किया जाए।
शिक्षण संस्थानों के बाहर तैनात की जाए सादी वर्दी में पुलिस
कोर्ट ने कहा कि जिला शिक्षा अधिकारी उन स्कूलों की सूची तैयार करें जहां सबसे ज्यादा ड्रग्स की शिकायतें मिलती हैं ताकि वहां ज्यादा प्रभावी तरीके से कार्रवाई की जा सके। इसके साथ ही कोर्ट ने नाबालिगों और युवाओं में बढ़ते ड्रग्स के चलन पर सख्ती से रोक लगाने के लिए राज्य के प्रत्येक शिक्षण संस्थान, स्कूल, कॉलेजों और यूनिवर्सिटी के बाहर सादे कपड़ों में पुलिस कर्मियों की तैनाती के आदेश दे दिए हैं जो यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी ड्रग पैडलर इन शिक्षण संस्थानों के बाहर नजर न आए।
स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए
इसके साथ ही हाई कोर्ट ने एंटी नारकोटिक्स सेल को आदेश दे दिए हैं कि वह हर जिले में उन जगहों की पहचान करे जहां नशा बिकने की शिकायतें आती हैं और फिर स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर कार्रवाई कर नशे के कारोबार की कमर तोड़ी जा जाए। हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश दिए हैं कि किसी भी होटल, रेस्टोरेंट और बार आदि में नाबालिगों को शराब न परोसने दी जाए। इसके अलावा हाईकोर्ट ने नशे के दुष्प्रभाव के प्रति बच्चों कि जागरूक करने के लिए स्कूलों के पाठ्यक्रम में इसे शामिल करने के आदेश भी दिए हैं।
हर जिले में पुनर्वास केंद्र
हाईकोर्ट ने कहा कि नशे के दलदल से बाहर आने वालों का पुनर्वास जरूरी है। सरकार छह महीने में हर जिले में पुनर्वास केंद्र बनवाए। हर केंद्र में एक साइकेट्रिस्ट और काउंसलर की नियुक्ति की जाए। जिस काउंसलर की रिहेबिलिटेशन केंद्र में नियुक्ति की जाए वह एरिया के सभी स्कूलों का दौरा कर छात्रों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करे।लगाम लगाने के लिए डंडा जरूरी
हाईकोर्ट ने कहा कि नशे पर लगाम लगाने केलिए डंडा जरूरी है। ऐसे में पुलिस के हाथ खोलते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, ओपियम एक्ट और एनडीपीएस एक्ट के केस में यदि पुलिस को लगता है कि आरोपी की प्रोपर्टी अटैच करना जरूरी है तो पुलिस ऐसा करने के लिए स्वतंत्र है।
