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राहुल ने मोदी के सामने प्रियंका को उतारने की कर ली थी तैयारी, लेकिन हार के समीकरण देख रोका

नई दिल्ली। कई दिनों से मीडिया में सिलसिलेवार तरीके से ये खबरें आ रही थी कि प्रियंका गांधी बनारस लोकसभा सीट से चुनाव लड़ सकती हैं। हालांकि गुरुवार को उस वक्त इन खबरों पर विराम लग गया जब कांग्रेस पार्टी ने अजय राय को बनारस सीट से अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया। अब सवाल उठता है कि ये खबरें अपने आप आ रही थी या एक रणनीति के तहत इन्हें आगे बढ़ाया जा रहा था। 

जी बिल्कुल, कांग्रेस पार्टी ने एक प्लान के जरिए ही मोदी के सामने प्रियंका गांधी का नाम चलवाया। इसके लिए करीब दो सप्ताह तक एक सर्वे भी हुआ। प्रियंका का यूपी में बढ़ता कद, युवाओं के अलावा दूसरे वर्गों की सोच और बनारस का जातिगत समीकरण, ये सब बातें सर्वे में शामिल थी। बनारस लोकसभा क्षेत्र की हर एक सीट का गहराई से अध्ययन हुआ। फाइनल सर्वे में सामने आया कि प्रियंका गांधी केवल अपनी पार्टी के दम पर यहां से चुनाव लड़ती हैं तो वे मोदी के सामने बराबर की टक्कर पर नहीं आ सकेंगी।
कांग्रेस पार्टी के विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि प्रियंका गांधी ने जब यह कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कहेंगे तो वे बनारस से चुनाव लड़ेंगी, यह बात हवा में नहीं थी। जब ऐसी चर्चाएं आनी शुरु हुई तो उस वक्त कांग्रेस पार्टी अपना सर्वे शुरु कर चुकी थी। बनारस लोकसभा क्षेत्र की सभी विधानसभा सीटों का गणित बैठाया गया। मौजूदा समय में बनारस लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाली पांचों विधानसभा सीटों में से कांग्रेस के पास एक भी नहीं है। 
कांग्रेस नेता के मुताबिक, सर्वे में सामने आया कि राहुल गांधी अगर सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ यहां पर कई दिनों का चुनाव प्रचार करते, रोड शो और मतदाताओं से नियमित संपर्क रखते तो भी वे साढ़े तीन लाख मतों के पार नहीं जा पा रहे थे। 
यह सर्वे 2014 के लोकसभा चुनाव परिणाम के आधार पर किया गया है। उस दौरान नरेंद्र मोदी को 5,81,022 वोट मिले थे। केजरीवाल के हिस्से 2,09,238 वोट आए, जबकि अजय राय को 75,614 वोट मिले। चौथे नंबर पर रहे बसपा प्रत्याशी को 60, 579 वोट मिले। सर्वे में 2009 के चुनाव की स्थिति भी देखी गई। उस वक्त भाजपा के मुरली मनोहर जोशी 2,03,122 वोट लेकर जीते थे। कांग्रेस तब भी किसी पायदान पर नहीं थी। 
बनारस सीट पर 2014 के लोकसभा चुनाव के मुताबिक, 15 लाख से ज्यादा मतदाता हैं। मुस्लिम समुदाय तीन लाख से अधिक हैं तो इनके बाद ब्राह्मण पौने तीन लाख, वैश्य दो लाख, कुर्मी डेढ़ लाख, यादव डेढ़ लाख, भूमिहार डेढ़ लाख, कायस्थ 65 हजार, चौरसिया 80 हजार और दलित भी 80 हजार के आसपास हैं। 
सर्वे में यह माना गया कि मुस्लिम समुदाय के दो लाख वोट अगर प्रियंका गांधी को मिल जाते हैं तो बाकी समुदायों में से सभी के मिलाकर डेढ़ लाख वोट कांग्रेस के खाते में आ सकते हैं। कांग्रेस पार्टी का अंदाजा कुछ ऐसा ही निकला। ये आंकलन कांग्रेस का अपने दम पर चुनाव लड़ने की स्थिति का है। 
यदि कांग्रेस पार्टी को सपा, बसपा का समर्थन मिल जाता तो प्रियंका के खाते में एक लाख वोटों का इजाफा हो सकता था। सर्वे का यही प्वाइंट था, जिसके बाद कांग्रेस को अपना संभावित कदम पीछे खींचना पड़ा। इसके बाद ही अजय राय को बनारस सीट से चुनाव मैदान में उतार दिया गया। हालांकि पार्टी नेता यह भी कह रहे हैं कि सपा-बसपा की ओर से प्रियंका गांधी के लिए फुल स्पोर्ट का कोई फार्मूला नहीं आया था। 
कांग्रेस पार्टी ने अपने सर्वे में यह भी पता लगाया कि इस बार मोदी पीएम हैं, लिहाजा उनका वोटबैंक शेयर पिछली बार के मुकाबले कहीं ज्यादा बढ़ने के आसार हैं। बनारस लोकसभा क्षेत्र की विधानसभा सीटें रोहानिया, वाराणसी उत्तर, वाराणसी दक्षिण, वाराणसी कैंट और सेवापुरी से मिली सर्वे की रिपोर्ट ने भी राहुल गांधी को कदम पीछे हटाने के लिए विवश कर दिया।