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सरकार के मुख्य सैन्य सलाहकार के तौर पर काम करेंगे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, 4 स्टार जनरल का दर्जा मिलेगा


नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) के लिए सेवा शर्तें जारी कर दीं। मंगलवार को कैबिनेट बैठक में तय किया गया कि सीडीएस का पद 4 स्टार जनरल के बराबर होगा। केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि सीडीएस सरकार के प्रधान सैन्य सलाहकार होंगे। तीनों सेनाओं के प्रमुख पहले की तरह अपने क्षेत्र से संबंधित मामलों में रक्षा मंत्री को सलाह देते रहेंगे।

सीडीएस तीनों सेनाओं से संबंधित मुद्दों पर सरकार और सैन्य बलों के बीच संपर्क सेतु की तरह काम करेंगे। इस पद पर नियुक्त किए जाने वाले अधिकारी पर, सेना के तीनों अंगों के बीच कामकाज में समन्वय स्थापित करने और वित्तीय मामलों में सलाह देने की जिम्मेदारी होगी। सीडीएस के नेतृत्व में तीनों सेनाओं के संसाधनों के अधिकतम इस्तेमाल के लिए सैन्य कमांड का पुनर्गठन किया जा सकेगा। इसके लिए वह किसी अभियान में सेना के अलग-अलग अंगों को शामिल करना और संयुक्त ऑपरेशन चलाने का फैसला ले सकते हैं। 
चीफ आफ डिफेंस स्टाफ क्यों?
भारत की रक्षा के लिए सैन्य मामलों में एक ही व्यक्ति के पास सोची समझी सोच विकसित करने के लिए सीडीएस की नियुक्ति की जा रही है। सीडीएस एक तरह से सेनापति होगा, जो तीनों सेनाओं की रणनीति तय कर सकेगा। बदलते युद्ध के तरीकों और चुनौतियों के लिए लिहाज से यह पद जरूरी माना गया। इससे फौज तीन भागों में नहीं बंटी रहेगी। इससे रणनीति, खरीदारी प्रक्रिया और सरकार के पास सैन्य सलाह की सिंगल विंडो बन जाएगी।

वाजपेयी सरकार के समय कारगिल की जंग से सबक लेते हुए कारगिल समीक्षा समिति ने सीडीएस की सिफारिश की थी। इसके बाद राजनीतिक विचार-विमर्श की प्रक्रिया शुरू। 24 दलों से सुझाव मांगे गए। सिर्फ चार दलों से सुझाव मिले। कोई रास्ता नहीं निकला तो नरेश चंद्रा कमेटी बनाई गई, जिसने यह सिफारिश की कि तीनों सैन्य प्रमुखों की समिति के अध्यक्ष को ही स्थाई कर दिया जाए।
सीडीएस के मकसद
  • सैन्य मामलों में ज्वाइंटनेस लाना।
  • राजनीतिक नेतृत्व के लिए सैन्य सलाह की क्वालिटी में सुधार करना।
  • सैन्य मामलों में विशेषज्ञता विकसित करना।
सीडीएस के बाद क्या?
एक नया विभाग बनेगा। इसे सैन्य मामलों का विभाग कहा जाएगा। यह रक्षा मंत्रालय के तहत होगा। सीडीएस इसके सचिव माने जाएंगे। रक्षा सेनाएं इसके दायरे में आएंगी। डीएमए यानी डिपार्टमेंट आफ मिलिट्री अफेयर्स के प्रमुख होंगे सीडीएस। डीएमए पूरा विभाग सीडीएस के दायित्वों को पूरा करने में मदद करेगा। इस विभाग में सैन्य और असैन्य दोनों ही अधिकारी होंगे। मिलिट्री कमांड बनाने में इस विभाग की भूमिका होगी।
 सीडीएस की भूमिकाएं क्या:
  • वह तीनों सैन्य प्रमुखों की समिति के स्थायी अध्यक्ष होंगे।
  • तीनों सेनाओं के मामले में प्रधान सैन्य सलाहकार की भूमिका में वह रक्षा मंत्री को सलाह देंगे।
  • सीडीएस किसी मिलिट्री कमांड की भूमिका में नहीं होगे।
  • वह तीनों सेनाओं की संयुक्त कमान वाले संगठनों की अगुवाई करेंगे। इनमें साइबर और स्पेस कमांड शामिल हैं।
  • रक्षा खरीदारी के मामलों में वह सेनाओं की ओर साझा इनपुट देंगे।
  • ऑपरेशंस, उपयोगी सामान, ट्रांसपोर्ट, ट्रेनिंग, सपोर्ट सेवाओं, कम्युनिकेशंस जैसे मामलों में तीनों सेनाओं में ज्वाइंटनेस लाने का जिम्मा संभालेंगे। यह काम तीन साल में पूरा कर लिया जाएगा।
  • सीडीएस पांच साल के लिए खरीदारी योजना तैयार करेंगे। इसके अलावा दो साल का रोल आन खरीदारी प्लान भी बनाएंगे।
  • वह युद्ध का रणनीति प्लान बनाएंगे।
  • रक्षा मंत्री के लिए वह वार्षिक योजना रिपोर्ट देंगे।
क्या होगा रैंक?
सेना प्रमुखों की तरह सीडीएस का रैंक भी चार स्टार जनरल का होगा।
वह रिटायरमेंट के बाद कोई सरकारी पद नहीं ले सकेंगे।
रिटायमेंट के बाद पांच साल तक वह कोई प्राइवेट नौकरी भी नहीं कर सकेंगे।
सीडीएस के बाद कोई सरकारी पद नहीं
सीडीएस बनने वाले व्यक्ति को कार्यकाल पूरा होने के बाद कोई सरकारी लेने की पात्रता नहीं होगी। पद छोड़ने के बाद 5 साल की अवधि में वह सरकार की इजाजत के बगैर किसी निजी रोजगार को भी हासिल नहीं कर सकेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के भाषण में सीडीएस का पद बनाने की घोषणा की थी।
ऐसा हो सकता है ओहदा और जिम्मेदारी
सुरक्षा मामलों पर कैबिनेट कमेटी में सीडीएस सैन्य बलों की तरफ से सलाह देने का काम करेंगे। हालांकि, सेनाओं का ऑपरेशनल दायित्व तीनों सेना प्रमुखों के पास ही रहेगा। उनका पद तीनों सेना प्रमुखों से ऊपर और कैबिनेट सचिव से नीचे रह सकता है। तकनीकी रूप से सरकार के प्रोटोकॉल में सीडीएस का पद 11-ए पर आता है, जबकि सेना प्रमुख और रक्षा सचिव का पद क्रमांक 13 है। सीडीएस का पद इससे ऊपर होने पर वह सीधे पीएमओ को रिपोर्ट कर सकेंगे।
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