भोपाल। प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में लोगों की मदद करने और कोरोना से जुड़े भ्रम को दूर करने के लिए कॉलेजों के स्वयं सेवक अब मैदान में उतरेंगे। ये वे छात्र हैं जो एनएसएस से जुड़े हैं। इन छात्रों को कॉलेजों ने स्वयं सेवक के रुप में तैयार किया है। उच्च शिक्षा विभाग ने इस संबंध में सभी कॉलेजों को निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके लिए सरकार ने कॉलेजों को पूरी गाइडलाइन भी भेजी है। इस गाइडलाइन में ये साफ तौर पर लिखा है कि ये स्वयं सेवक की इच्छा पर होगा कि वो काम करना चाहता है या नहीं। ये स्वैच्छिक है अनिवार्य नहीं।
यदि को स्वयंसेवक काम करता है तो उसके माता-पिता की रजामंदी भी जरुरी है। सरकार ने इसके लिए सुरक्षा का पूरा ध्यान रखने, आवश्यक किट उपलब्ध कराने के लिए भी कहा है। साथ में यह भी कहा गया है कि स्वयं सेवकों को उतनी दूरी भेजा जाएगा जिससे वे रात तक अपने घर वापस लौट सकें। इन स्वयं सेवकों से कॉलेज बराबर संपर्क में रहेगा। ये कोरोना प्रोटाकॉल का पालन करते हुए अपनी सेवाएं देंगे।
भ्रम दूर करेंगे स्वयं सेवक
इन स्वयंसेवकों की तैनाती वहां की जाएगी जहां वे सोशल मीडिया में फैली भ्रमक बातों को दूर करने और वालेन्टियर्स की भूमिका निभा सकें। पंजीयन के लिए छात्र-छात्राएं कॉलेज के प्राचार्य या एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। तैनाती से पहले स्वयं सेवकों का हेल्थ रिस्क कवर संबंधित सभी बातों का ध्यान रखा जा रहा है।
यहां होंगे तैनात :
- हेल्प डेस्क और हेल्पलाइन सेंटर्स में
- भोजन सामग्री तैयार करने और उनके पैकेट तैयार करने में
- दवाएं, राहत सामग्री और अन्य सामान पैक करने में
- सामुदायिक जागरुकता और प्रचार प्रसार से संबंधित काम
- यातायात प्रबंधन और कतार लगवाने में
- सोशल मीडिया पर आ रहीं भ्रांतियों को दूर करने में।
