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तीर्थंकर भगवन्तों का संदेश हमेशा से ही अहिंसामयी रहा है


बेगमगंज। तीर्थंकर भगवन्तों का संदेश हमेतीर्थंकर भगवन्तों का संदेश हमेशा से ही अहिंसामयी रहा है,  प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ से लेकर अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी ने दया और करुणा का संदेश दिया है,उक्त उदगार निर्यापक मुनि  समतासागर जी महाराज ने श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के छंटवे दिवस श्री पार्शवनाथ दि. जैन मंदिर में व्यक्त किए ।

मुनि श्री ने आज विशेष रूप से विश्व में शांति के लिये अपने मुखार विंद से शांतिधारा संपन्न कराई एवं उपस्थित सभी समुदाय को भगवान महावीर का शुभ संदेश "जिओ और जीने दो" का जो मूल मंत्र है उसके पालन करने संदेश देते हुये  सभी जीवो के सुखी रहने का आशीर्वाद देते हुये कहा कि यदि आप किसी के प्रति दया और करूणा की भावना रखते है तो उससे अच्छा कोई धर्म नहीं है। जो सारे संसार को सुखी, अभय, और आनंद का अनुभव करने की प्रेरणा देता है। इसके साथ ही उन्होंने सभी समाज वंधूओं को जीव दया की भावना से त्याग पूर्वक खान पान की शुद्धी का संकल्प दिलाया।

इस अवसर पर धर्म की महिमा बतलाते मुनि श्री निष्कंप सागर जी महाराज ने ग्रस्त को श्रावको को प्रेरणा दी की कठिनाइयों से डरना नहीं चाहिए बल्कि धर्म पर दृणता रखते हुए नियम संयम का पालन करना चाहिए तभी जीवन में सुख शांति और सफलता की प्राप्ति होती है ।

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