बेगमगंज। क्षेत्र में विकास की बातें तो बहुत की जाती हैं लेकिन धरातल पर कुछ कार्य नहीं कराए जाने से ग्रामीण क्षेत्र के लोग अत्यधिक परेशान हो रहे हैं । पितृ मोक्ष के चलते सुल्तानगंज क्षेत्र की बेबस नदी पर घाट निर्मित नहीं होने के कारण ग्रामीण नदी मैं डले हुए बड़े-बड़े पत्थरों के बीच बैठकर पितरों को तर्पण का कार्य अंजाम दे रहे हैं वहीं जरा सी बारिश में आसपास कीचड़ भी मच जाती है जिससे और अधिक परेशानी उठाना पड़ रही है। ग्रामीणों ने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों से बेवस नदी पर घाट निर्माण की मांग की है।ताकि धार्मिक कार्यक्रमों सहित लोगों को स्नान आदि करने कपड़े धोने में आसानी हो सके।
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| बेबस नदी पर इस तरह लोग पितरों को तर्पण करते हुए। |
ग्रामवासियों का कहना है कि ज्यादातर त्यौहार बरसात के दिनो में ही आते है जिसमें ग्रामीण क्षेत्र के लोगो के स्नान नदी, पर ही होते है साथ ही गणेश जी दुर्गा जी की मूर्तियां भी नदी में विसर्जित की जाती हैं विसर्जन के समय भी काफी दिक्कतों का सामना ग्रामीणों को करना पड़ता है। पित्र मोक्ष और महालक्ष्मी पर्व पर भी नदियों पर ही कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं पितरों का तर्पण नदियों पर ही किया जाता है बेवस नदी पर घाट निर्माण की मांग पंचायत, जनपद, क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से कई सालों से की जा रही है लेकिन आज तक इस ओर ध्यान नहीं दिया जा गया है जिससे ग्रामीणों में आक्रोश पनप रहा है।
एक और सरकार नदियों आदि का
सौंदर्यीकरण करवा रही है वहीं दूसरी ओर सुल्तानगंज क्षेत्र की नदियों की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है जबकि बेबस नदी क्षेत्र की प्रमुख नदियों में मानी जाती है ग्रामीणों ने क्षेत्र के विधायक ठाकुर रामपाल सिंह राजपूत एवं सांसद से सुल्तानगंज टप्पा में बेवस नदी पर शीघ्र घाट निर्माण कराए जाने की मांग की है।
मांग करने वालों में किशन राजपूत,राकेश श्रीवास्तव, समाजसेवी संजय सोलंकी, डॉ अवतार सिंह चौहान, राजीव सोलंकी, प्रहलाद यादव, दीपक राजपूत, डालचन्द रैकवार, शिवराज यादव, सुनील पुरी, अवनेश जैन,चक्रेश जैन, डॉ. जयकुमार जैन, संदीप जैन,अभिषेक जैन, खिलान सिंह ठाकुर, गजाधर ठाकुर, राजाराम ठाकुर, लक्षमण अहिरवार, प्यारे अहिरवार, दीपक अहिरवार, तुलाराम अहिरवार, आदी प्रमुख हैं।
इस संबंध में सरपंच सुनीता दरयाव सिंह का कहना है की घाट निर्माण के लिए दो स्थानों का चयन किया गया है राशि स्वीकृत होते ही शीघ्र घाट निर्माण कराए जाएंगे।

