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पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाने पर्यावरण बचाओ संबंधी ड्राइंग

चित्र प्रतियोगिता के बाद सभी बच्चों को गिफ्ट प्रदान कर उनको प्रोत्साहित किया गया।

भोपाल। पर्यावरण संस्कृति संरक्षण ट्रस्ट के सौजन्य से आज संध्या जैन स्टडी सर्कल अशोका गार्डन भोपाल मे बच्चों द्वारा पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाने पर्यावरण बचाओ संबंधी ड्राइंग कर पर्यावरण को बचाने का संदेश दिया।

इसमें बच्चों द्वारा भूमि को संरक्षित करने, वायु प्रदूषण को दूर करने,ध्वनि प्रदूषण रोकने,जल को प्रदूषित होने से बचने के लिए और वायु प्रदूषण को दूर करने ए. क्यू. आई को सुधारने और पीयूसी को अनिवार्य करने  के संबंध में ड्राइंग बनाकर संदेश दिया ।

बच्चों द्वारा प्रकृति प्रदत्त सौर ऊर्जा ,पवन ऊर्जा के चित्र माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों का समुचित उपयोग करने का संदेश दिया। पर्यावरण संस्कृति संरक्षण एवं मानव कल्याण ट्रस्ट के अध्यक्ष सुशील कुमार जैन ने बच्चों को बताया कि पर्यावरण संरक्षण वह संवर्धन  के लिए हमें वृक्षारोपण करना चाहिए क्योंकि

*  घर के पास 10 पेड़ हैं तो जीवन 7 साल बढ़ सकता है!

• एक सामान्य पेड़ सालभर में करीब 20. किलो धूल सोखता है।

• हर साल करीब 700 किलोग्राम ऑक्सीजन का उत्सर्जन करता है।

• प्रतिवर्ष 20 टन कार्बन डाय ऑक्सइड को सोखता है।

• गर्मियों में एक बड़े पेड़ के नीचे औसतन चार डिग्री तक तापमान कम रहता है।

• 80 किलोग्राम पारा, लीथियम, लेड आदि जैसी जहरीले धातुओं के मिश्रण को सोखने की क्षमता।

• हर साल करीब 1 लाख वर्ग मीटर दूषित हवा फिल्टर करता है।

• घर के करीब एक पेड़ अर्कोॉस्टिक वॉल की तरह काम करता है। यानी शोर/ध्वनि को सोख लेता है।

संध्या जैन स्टडी सर्कल संचालिका  संध्या जैन ने बताया कि

शिक्षा के साथ बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए इस प्रकार के प्रतिस्पर्धा आयोजन का होना आवश्यक है इससे बच्चों की चिंतन शक्ति का विस्तार व समाज के प्रति जागरूकता की भावना प्रबल होती है, जल, जंगल ,जानवर ,जमीन को बचाने की कला मानव जीवन को बचाने की कला है,पर्यावरण संरक्षण से वायु, जल और भूमि प्रदूषण कम होता है। जैव विविधता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्यावरण संरक्षण का बहुत महत्व है। सभी के सतत विकास के लिए पर्यावरण संरक्षण महत्वपूर्ण है। हमारे ग्रह को ग्लोबल वार्मिंग जैसे हानिकारक प्रभावों से बचाने के लिए पर्यावरण संरक्षण भी महत्वपूर्ण है।,जहां हमारी संस्कृति में बचपन से ही माता-पिता बच्चों को पर्यावरण से जोड़ने के लिए चंद्रमा को चंदा मामा, सूर्य को सूर्य देवता ,धरती को माता, आकाश को पिता, नदियों को जीवन दायिनी माता, वृक्षों मैं देवताओं का निवास, चिड़िया के चहकने से हमारे दैनिक जीवन की सुबह होती है, व हमारे प्राचीन ग्रंथो में जल का दुरुपयोग करने से व्यक्ति का चंद्र ग्रह कमजोर होता है एवं नदिया, सरोवर ,तालाब आदि का जल दूषित करना घोर पाप व अच्छम्य दंड बताया है,