- सपाक्स ने मुख्यसचिव को ज्ञापन सौंपते हाईकोर्ट में लंबित केस का हवाला देते हुए सुप्रीम कोेर्ट के निर्देशों का पालन नहीं होने पर कोर्ट की अवमानना बताया
- सपाक्स की याचिका पर सुनवाई 7 जुलाई को होनी है, लेकिन पदोन्नति शुरु हो जाने से 2 जुलाई को फिर से सपाक्स हाईकोर्ट में रखेगा अपनी आपत्तियां
भोपाल। भारी विरोध और कानूनी आपत्तियों के बावजूद मध्यप्रदेश में 9 साल बाद पदोन्नति की शुरुआत हो गई। पहली सूची विधानसभा अधिकारियों और कर्मचारियों की बुधवार को जारी की गई है। दूसरी ओर, सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों को 15 जुलाई तक डीपीसी पूरी करने के निर्देश दिए हैं, ताकि 31 जुलाई तक सारे विभागों में पदोन्नति का टारगेट पूरा किया जा सके। हालांकि इसी बीच हाईकोेर्ट में सपाक्स की याचिका पर 7 जुलाई को सुनवाई तय हो गई है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं करने के साथ ही राज्य सरकार की मनमानी को रोकने की गुहार लगाई जाएगी।

राज्य सरकार ने एडवोकेट जनरल द्वारा सरकार के वकील की सलाह को सरकार को सौंपने के बाद 15 जुलाई तक विभागवार डीपीसी के निर्देश दिए हैं, ताकि 31 जुलाई तक पदोन्नति प्र्रक्रिया पूरी की जा सके। दरअसल जीएडी का लक्ष्य है कि 31 जुलाई तक समस्त विभाागों में प्र्रक्रिया पूरी करके प्रमोशन लिस्टें जारी हो जाएं। माना जा रहा है कि जिन विभागों में डीपीसी लिस्ट कंपलीट हो जाएगी, उनके आदेश जारी होते जाएंगे।
करीब 1 लाख कर्मचारी बिना प्रमोशन रिटायर
वर्ष 2016 में प्रमोशन में रिजर्वेशन वाले विशेष प्रावधानों को हाईकोर्ट ने क्वैश कर दिया था, लेकिन बाकी पदोन्नति नियम ज्यों के त्यों थे। बावजूद सुप्रीम कोर्ट से रोक बताकर सामान्य, ओबीवी और अल्सपंख्यक वर्ग के कर्मचारियों के भी प्रमोशन रोक दिए गए। नतीजे में करीब 1 लाख कर्मचारी बिना प्रमोशन रिटायर हो गए। अब प्रदेशभर में इसी को लेकर सरकार के खिलाफ आक्रोश बढ़ता जा रहा है कि, जब सुपीमकोर्ट से रोक नहीं थी तो प्रमोशन रोकने के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नही हो रही। ज्ञात हो मध्यप्रदेश में 51 प्रतिशत से अधिक पिछडा वर्ग है, जिसमें बेहद नाराजगी है।
वर्ष 2016 में प्रमोशन में रिजर्वेशन वाले विशेष प्रावधानों को हाईकोर्ट ने क्वैश कर दिया था, लेकिन बाकी पदोन्नति नियम ज्यों के त्यों थे। बावजूद सुप्रीम कोर्ट से रोक बताकर सामान्य, ओबीवी और अल्सपंख्यक वर्ग के कर्मचारियों के भी प्रमोशन रोक दिए गए। नतीजे में करीब 1 लाख कर्मचारी बिना प्रमोशन रिटायर हो गए। अब प्रदेशभर में इसी को लेकर सरकार के खिलाफ आक्रोश बढ़ता जा रहा है कि, जब सुपीमकोर्ट से रोक नहीं थी तो प्रमोशन रोकने के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नही हो रही। ज्ञात हो मध्यप्रदेश में 51 प्रतिशत से अधिक पिछडा वर्ग है, जिसमें बेहद नाराजगी है।
सपाक्स ने कहा-यह सुप्रीमकोर्ट, हाईकोर्ट की अवमानना
सपाक्स (सवर्ण, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक अधिकारी कर्मचारी संघ) ने मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपते हुए पदोन्नति नियम 2025 के अंतर्गत पदोन्नतियां करने का विरोध किया है। सपाक्स का कहना है कि पहले असंवैधानिक घोषित हो चुके प्रमोशन में रिजर्वेशन वाले नियमों के तहत पदोन्नति पाने वालों को डिमोट करके क्रीमी लेयर का निर्धारण किया जाए। सपाक्स अध्यक्ष डॉ. केदार सिंह तोमर ने ज्ञापन सौंपने के बाद कहा कि 19 जून 2025 को मप्र सरकार द्वारा नए पदोन्नति नियम प्रभावशील किए थे। इसके विरुद्ध हाईकोर्ट जबलपुर में याचिका पेश करने पर शासन की ओर से महाधिवक्ता ने आश्वासन दिया था कि नए नियमों के अंतर्गत पदोन्नतियां प्रकरण के अंतिम निर्णय तक नहीं की जाएंगी। इसमें अंतिम निर्णय आना है, ऐसे में पदोन्नतियां शुरु करना कोर्ट की स्पष्ट अवमानना है।
सपाक्स की याचिका पर सुनवाई 7 जुलाई को
सपाक्स ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और हाईकोर्ट में सरकार के कमिटमेंट का पालन नही होने के विरोध में पेश याचिका की हाईकोर्ट में 7 जुलाई को सुनवाई होगी। हालांकि बुधवार से प्रमोशन लिस्ट जारी होने की शुरआत के विरोध में गुरुवार को फिर से सपाक्स की ओर से हाईकोर्ट में गुहार लगाई जाएगी। इसमें यह सवाल भी उठाया जाएगा कि जब सुप्रीम कोर्ट से कोई रोक ही नहीं थी तो 2016 से लेकर 2025 तक प्रमोशन क्यों नहीं किए गए? हद तो यह है कि बिना प्रमोशन रिटायर होने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए सरकार की ओर से कोई प्रावधान तक नही किया गया है। सपाक्स की मांग है कि रिटायर हो चुके कर्मचारियों को भी पदोन्नति दी जाए, भले ही काल्पनिक हो।
सपाक्स के पूर्व अध्यक्ष अजय जैन का तीखा सवाल है कि जब 2002 के पदोन्नति नियम में से सिर्फ प्रमोशन में रिजर्वेशन वाले हिस्से को ही हाईकोर्ट ने क्वैश किया था, तो बाकी प्रमोशन क्यों रोका गया। इसके लिए जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई होना चाहिए। साथ ही 2002 के पदोन्नति नियमों में से प्रमोशन में रिजर्वेशन वाले हिस्से के क्वैश हो जाने से बाकी नियमों के अनुसार प्रमोशन होने चाहिए। बावजूद सरकार 2025 के नए नियम ले आई, जिनको लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई हो रही है। सरकार यह जवाब नही दे पाई है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करने के बजाय सरकार नए नियम की आड़ में प्रमोशन में रिजर्वेशन क्यों थोपने पर आमादा है।
जीएडी में प्रमोशन के लिए चार सदस्यीय डीपीसी गठित
सामान्य प्रशासन विभाग डीपीसी की बैठक सोमवार को होगी, जिसमें चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को फ्लोर सुपरवाइजर और जमादार पद पर पदोन्नति होगी। इसके लिए जीएडी में चार सदस्यीय समिति गठित की गई है, जिसके अध्यक्ष अपर सचिव जीएडी सुभाष सुभाष द्विवेदी बनाए गए हैं। वहीं समिति में उपसचिव शैलेंद्र कुमार हनोतिया को स्थापना प्रतिनिधि सदस्य, सचिन्द्र राव अवर सचिव जीएडी को अनुसूचित जनजाति प्रतिनिधि और मनोज श्रीवास्तव अवर सचिव अधीक्षण जीएडी संयोजक सदस्य बनाए गए हैं।
विधानसभा के 12 अधिकारियों का प्रमोशन
सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशों के बाद विधानसभा की पदोन्नत सूची बुधवार को जारी हो गई। इसमें राजेंद्र वर्मा आरक्षित वर्ग से अनुभाग अधिकारी बने हैं तो रवीन्द्र नाथ दुबे और नरेंद्र कुमार मिश्रा भी अनुभाग अधिकारी बने हैं। मोहनलाल मनवानी कार्यवाही संपादक, माधव दफ्तरी शिष्टाचार अधिकारी, वीडी गोयल संचालक पुस्तकालय, अनुसंधान और संदर्भ, अजय कुमार चौरे और रिमझिम मोगिया (आरक्षित वर्ग) सलेक्ट ग्रेड रिपोर्टर पर पदोन्नत हुए हैं। नरेश कुमार हिमथानी कार्यवाही संपादक, हरीश कुमार श्रीवास प्रशासकीय अधिकारी, महावीर सिंह सूचना अधिकारी, विनोद कुमार दुबे और रूपेश सिंह स्टाफ आफिसर बतौर पदोन्नत किए गए हैं।
सपाक्स (सवर्ण, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक अधिकारी कर्मचारी संघ) ने मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपते हुए पदोन्नति नियम 2025 के अंतर्गत पदोन्नतियां करने का विरोध किया है। सपाक्स का कहना है कि पहले असंवैधानिक घोषित हो चुके प्रमोशन में रिजर्वेशन वाले नियमों के तहत पदोन्नति पाने वालों को डिमोट करके क्रीमी लेयर का निर्धारण किया जाए। सपाक्स अध्यक्ष डॉ. केदार सिंह तोमर ने ज्ञापन सौंपने के बाद कहा कि 19 जून 2025 को मप्र सरकार द्वारा नए पदोन्नति नियम प्रभावशील किए थे। इसके विरुद्ध हाईकोर्ट जबलपुर में याचिका पेश करने पर शासन की ओर से महाधिवक्ता ने आश्वासन दिया था कि नए नियमों के अंतर्गत पदोन्नतियां प्रकरण के अंतिम निर्णय तक नहीं की जाएंगी। इसमें अंतिम निर्णय आना है, ऐसे में पदोन्नतियां शुरु करना कोर्ट की स्पष्ट अवमानना है।
सपाक्स की याचिका पर सुनवाई 7 जुलाई को
सपाक्स ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और हाईकोर्ट में सरकार के कमिटमेंट का पालन नही होने के विरोध में पेश याचिका की हाईकोर्ट में 7 जुलाई को सुनवाई होगी। हालांकि बुधवार से प्रमोशन लिस्ट जारी होने की शुरआत के विरोध में गुरुवार को फिर से सपाक्स की ओर से हाईकोर्ट में गुहार लगाई जाएगी। इसमें यह सवाल भी उठाया जाएगा कि जब सुप्रीम कोर्ट से कोई रोक ही नहीं थी तो 2016 से लेकर 2025 तक प्रमोशन क्यों नहीं किए गए? हद तो यह है कि बिना प्रमोशन रिटायर होने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए सरकार की ओर से कोई प्रावधान तक नही किया गया है। सपाक्स की मांग है कि रिटायर हो चुके कर्मचारियों को भी पदोन्नति दी जाए, भले ही काल्पनिक हो।
सपाक्स के पूर्व अध्यक्ष अजय जैन का तीखा सवाल है कि जब 2002 के पदोन्नति नियम में से सिर्फ प्रमोशन में रिजर्वेशन वाले हिस्से को ही हाईकोर्ट ने क्वैश किया था, तो बाकी प्रमोशन क्यों रोका गया। इसके लिए जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई होना चाहिए। साथ ही 2002 के पदोन्नति नियमों में से प्रमोशन में रिजर्वेशन वाले हिस्से के क्वैश हो जाने से बाकी नियमों के अनुसार प्रमोशन होने चाहिए। बावजूद सरकार 2025 के नए नियम ले आई, जिनको लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई हो रही है। सरकार यह जवाब नही दे पाई है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करने के बजाय सरकार नए नियम की आड़ में प्रमोशन में रिजर्वेशन क्यों थोपने पर आमादा है।
जीएडी में प्रमोशन के लिए चार सदस्यीय डीपीसी गठित
सामान्य प्रशासन विभाग डीपीसी की बैठक सोमवार को होगी, जिसमें चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को फ्लोर सुपरवाइजर और जमादार पद पर पदोन्नति होगी। इसके लिए जीएडी में चार सदस्यीय समिति गठित की गई है, जिसके अध्यक्ष अपर सचिव जीएडी सुभाष सुभाष द्विवेदी बनाए गए हैं। वहीं समिति में उपसचिव शैलेंद्र कुमार हनोतिया को स्थापना प्रतिनिधि सदस्य, सचिन्द्र राव अवर सचिव जीएडी को अनुसूचित जनजाति प्रतिनिधि और मनोज श्रीवास्तव अवर सचिव अधीक्षण जीएडी संयोजक सदस्य बनाए गए हैं।
विधानसभा के 12 अधिकारियों का प्रमोशन
सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशों के बाद विधानसभा की पदोन्नत सूची बुधवार को जारी हो गई। इसमें राजेंद्र वर्मा आरक्षित वर्ग से अनुभाग अधिकारी बने हैं तो रवीन्द्र नाथ दुबे और नरेंद्र कुमार मिश्रा भी अनुभाग अधिकारी बने हैं। मोहनलाल मनवानी कार्यवाही संपादक, माधव दफ्तरी शिष्टाचार अधिकारी, वीडी गोयल संचालक पुस्तकालय, अनुसंधान और संदर्भ, अजय कुमार चौरे और रिमझिम मोगिया (आरक्षित वर्ग) सलेक्ट ग्रेड रिपोर्टर पर पदोन्नत हुए हैं। नरेश कुमार हिमथानी कार्यवाही संपादक, हरीश कुमार श्रीवास प्रशासकीय अधिकारी, महावीर सिंह सूचना अधिकारी, विनोद कुमार दुबे और रूपेश सिंह स्टाफ आफिसर बतौर पदोन्नत किए गए हैं।

