ज्ञापन का वाचन करते हुए कुलसुम खान ने कहा कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता और मौलिक अधिकार प्रदान करता है। प्रस्तावित यूसीसी विधेयक में विवाह, तलाक, विरासत, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे व्यक्तिगत एवं धार्मिक मामलों को एक समान कानून के दायरे में लाने पर समाज की ओर से आपत्ति जताई गई।
उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 में धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार सुनिश्चित किए गए हैं। ज्ञापन के माध्यम से राष्ट्रपति से मांग की गई कि समान नागरिक संहिता विधेयक 2026 को वापस लिया जाए और भविष्य में ऐसे किसी विधेयक को पारित नहीं किए जाने के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए जाएं।
उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 में धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार सुनिश्चित किए गए हैं। ज्ञापन के माध्यम से राष्ट्रपति से मांग की गई कि समान नागरिक संहिता विधेयक 2026 को वापस लिया जाए और भविष्य में ऐसे किसी विधेयक को पारित नहीं किए जाने के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए जाएं।
ज्ञापन सौंपने के दौरान जिले की विभिन्न तहसीलों से आई मुस्लिम महिलाएं, पुरुष एवं समाज के प्रतिनिधि मौजूद रहे। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि संविधान की रक्षा करना देश के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा तैयार किए गए संविधान में देश के सभी धर्मों के नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता और अधिकार दिए गए हैं, इसलिए इन अधिकारों की रक्षा जरूरी है।
प्रतिनिधियों ने सरकार से मांग की कि धार्मिक एवं व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े मामलों में सभी समुदायों की भावनाओं और संवैधानिक अधिकारों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाए।
प्रतिनिधियों ने सरकार से मांग की कि धार्मिक एवं व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े मामलों में सभी समुदायों की भावनाओं और संवैधानिक अधिकारों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाए।