- भोपाल कोर्ट में सुनवाई आज, जमीन के दुरुपयोग पर बीडीए कर चुका है आवंटन निरस्त
प्रेस कॉम्प्लेक्स एमपी नगर में नेशनल हेराल्ड की जमीन पर बने कॉम्प्लेक्स के प्रोजेक्ट में बतौर पार्टनर शामिल संजय सिन्हा की पत्नी अंजना सिन्हा ने भोपाल कोर्ट में ऑर्डर 1 रूल 10 के तहत दायर याचिका खारिज होने के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील कर 29 जुलाई 2025 को स्टे लिया था। अंजना सिन्हा ने लीज होल्डर से एक हिस्सा लीज पर लिए जाने का दावा करते हुए भोपाल विकास प्राधिकरण की कार्रवाई से अपने हित प्रभावित होने की आशंका जताई थी। हाईकोर्ट ने भोपाल कोर्ट में विचाराधीन प्रकरण पर स्टे लगाकर भोपाल विकास प्राधिकरण तथा एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड से जवाब तलब किया था। मामले की सुनवाई में अंजना सिन्हा भोपाल विकास प्राधिकरण से सीधा अनुबंध साबित करने में नाकाम रहीं जिसके चलते हाईकोर्ट ने 18 अप्रैल 2026 को याचिका खारिज कर भोपाल कोर्ट में चल रहे प्रकरण में हस्तक्षेप से इंकार कर दिया।
अखबार की जमीन पर व्यवसाय
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट लिखा है कि भोपाल विकास प्राधिकरण ने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड के खिलाफ़ ज़मीन खाली कराने और कब्ज़ा वापस पाने के लिए मुकदमा दायर किया है। बीडीए ने एजेएल को 30 साल के लिए लीज़ पर ज़मीन दी थी, जिसकी मियाद 2011 में खत्म हो गई, इसलिए कब्ज़ा वापस मांगा जा रहा है। भोपाल विकास प्राधिकरण ने शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि लीज़ की शर्तों का कई बार उल्लंघन किया गया है; ज़मीन अखबार के ऑफिस और प्रेस के निर्माण के लिए लीज़ पर दी गई थी, लेकिन वहां एक कमर्शियल बिल्डिंग बना दी गई है जिसमें कई कमर्शियल जगहें, ऑफिस, दुकानें वगैरह बनाई गई हैं और उन्हें अलग-अलग लोगों को किराए पर दिया गया है। इस तरह लीज़ की शर्तों का उल्लंघन हुआ है। अखबार का प्रेस और ऑफिस चलाने के लिए दी गई ज़मीन पर ऐसी कमर्शियल गतिविधियां बंद नहीं हुई हैं और इस वजह से भी ज़मीन खाली कराने की मांग की गई है।
कोर्ट में लिया झूठ का सहारा
भोपाल के वरिष्ठ अधिवक्ता भरत चंद्र चतुर्वेदी ने हाईकोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता अंजना सिन्हा ने हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखने के लिए झूठ का सहारा लिया। अंजना सिन्हा ने लीज होल्डर एजेएल से एक हिस्से की लीज लेने का दावा किया है। जबकि उनके पति संजय सिन्हा इस प्रोजेक्ट में बतौर पार्टनर शामिल हैं। उनके कब्जे वाले हिस्से का लीज एग्रीमेंट नहीं बल्कि बाकायदा विक्रय दस्तावेज बना है उसमें विक्रेता भी संजय सिन्हा दर्ज हैं और क्रेता भी अंजना सिन्हा के साथ स्वयं संजय सिन्हा हैं। जमीन की खरीद फरोख्त का पूरा खेल एजेएल की कथित पॉवर आफ अटार्नी के नाम पर हुआ। भोपाल में कांट्रैक्टर के तौर पर भेजे गए नरेन्द्र कुमार मित्तल ने इसी पावर आफ अटार्नी के आधार पर संजय सिन्हा के साथ एग्रीमेंट कर प्रकोष्ठ पंजीयन कराया है, जिसमें नरेंद्र कुमार मित्तल की हिस्सेदारी 54 प्रतिशत और संजय सिन्हा की हिस्सेदारी 46 प्रतिशत है। मूल पट्टेदार एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड की हिस्सेदारी इसमें शून्य है। हाईकोर्ट की याचिका में यह तथ्य छिपाते हुए एजेएल से लीज लेने का दावा किया गया। जबकि पावर आफ अटार्नी के आधार पर बिल्डिंग के हिस्से अलग अलग लोगों को बेचे गए हैं। इस प्रोजेक्ट में पार्टनर रहे हरमहेन्द्र सिंह बग्गा ने भी कुछ हिस्से अपने नाम कराए हैं। भोपाल विकास प्राधिकरण ने किसी के भी पक्ष में नामांतरण नहीं किया जिससे हरमहेन्द्र सिंह बग्गा सहित तीन खरीदारों ने खरीदे गए हिस्से का स्वामी घोषित कराने के भोपाल कोर्ट में याचिकाएं दायर की हैं। इन मामलों में भी सुनवाई अभी जारी है। हाईकोर्ट पहुंची याचिकाकर्ता अंजना सिन्हा के अनुसार अगर लीज होल्डर एजेएल से सभी ने लीज पर ही जगह हासिल की है तो हरमहेन्द्र सिंह बग्गा सहित तीन अन्य स्वामी घोषित होने के लिए कोर्ट क्यों पहुंच गये। नवजीवन कर्मचारी संघ के मोहम्मद सईद तथा संजय चतुर्वेदी इस मामले में अधिवक्ता भरत चंद्र चतुर्वेदी के माध्यम से हाईकोर्ट में लिखित शिकायत दर्ज कराएंगे।
अपार्टमेंट बनाने की इजाजत ही नहीं थी
याचिकाकर्ता अंजना सिन्हा के वकील नवनीत शुक्ला ने मध्यप्रदेश विकास प्राधिकरणों की संपत्तियों का प्रबंधन तथा व्ययन अधिनियम, 2018, जिसके अनुसार, मध्यप्रदेश में विकास प्राधिकरणों द्वारा किराए पर दी गई संपत्तियों का इस्तेमाल अलग-अलग अपार्टमेंट बनाने के लिए किया जा सकता है का हवाला देते हुए रियायत की मांग की गई। हाईकोर्ट ने इस दलील को सिरे से खारिज करते हुए आदेश में लिखा कि बाद में बनाए गए यह नियम तब लागू होते जब एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड को लीज़ पर दी गई ज़मीन पर अपार्टमेंट बनाने की इजाज़त दी गई होती। लेकिन चूंकि लीज़ डीड में लीज़ पर दी गई ज़मीन पर अपार्टमेंट बनाने का कोई अधिकार नहीं दिया गया है, बल्कि उसे सिर्फ़ प्रेस और अख़बार के ऑफ़िस के तौर पर इस्तेमाल करने की इजाज़त है, इसलिए 2018 के नियम याचिकाकर्ता को मुक़दमे में पक्षकार बनने की मांग करने में कोई मदद नहीं करते हैं।
बीडीए से संबंध नहीं, याचिका खारिज
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता अंजना सिन्हा और एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (मूल प्रतिवादी) के वकीलों की दलीलें विस्तार से सुनने और रिकॉर्ड देखने के बाद आदेश में लिखा कि यह स्पष्ट है कि एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड को अखबार के प्रेस और ऑफिस के निर्माण के लिए लीज़ पर एक प्लॉट दिया गया था। यह बात मानी गई है कि वहां एक कमर्शियल बिल्डिंग बनाई गई है, जिसमें कई दुकानें और ऑफिस स्पेस बनाए गए हैं और उन्हें अलग-अलग लोगों को लंबी अवधि की लीज़ पर दिया गया है। बेदखली के मुकदमे में बेदखली का कारण लीज़ की शर्तों का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता और भोपाल विकास प्राधिकरण के बीच कोई सीधा अनुबंध नहीं है और याचिकाकर्ता उन लोगों में से एक है जिन्हें एजेएल ने लंबी लीज़ पर या किसी अन्य तरीके से ऑफिस स्पेस आवंटित किया है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में लिखा है कि बीडीए से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह याचिकाकर्ता के खिलाफ मुकदमा लड़े, जो ज़्यादा से ज़्यादा खुद को उप-किरायेदार होने का दावा कर सकता है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जब मूल किरायेदार, यानी एजेएल पहले से ही मुकदमे में प्रतिवादी के तौर पर शामिल है, तो मूल किरायेदार को मुकदमे में विधिवत रूप से शामिल किए जाने के बाद हर एक उप-किरायेदार को पक्षकार बनाना ज़रूरी नहीं है। इसलिए, ट्रायल कोर्ट के आदेश में किसी भी तरह के दखल की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि इस कोर्ट को ट्रायल कोर्ट के आदेश में कानून या अधिकार-क्षेत्र से जुड़ी कोई गलती नहीं मिली है; याचिकाकर्ता को इस मुकदमे के लिए ज़रूरी या उचित पक्ष नहीं पाया गया है। इसलिए, याचिका खारिज की जाती है।
मशीन चोरी का मामला विचाराधीन
भोपाल में कथित पावर आफ अटार्नी होल्डर नरेन्द्र कुमार मित्तल के खिलाफ अखबार की मशीनरी और अन्य सामग्री चोरी जाने का अपराधिक मामला विचाराधीन है। इस मामले में भोपाल में नेशनल हेराल्ड की संपत्ति की देखरेख के लिए नियुक्त मोहम्मद सईद ने एजेएल के तत्कालीन चेयरमैन मोतीलाल वोरा के आदेशानुसार जनवरी 2008 में थाना एमपी नगर में एफ आई आर दर्ज कराई थी। कंपनी के तत्कालीन डायरेक्टर विश्वबंधु गुप्ता ने प्रकरण में कार्रवाई के लिए अथॉरिटी लैटर भी दिया था। भोपाल कोर्ट से जारी वारंट की लगातार अनदेखी से आरोपी नरेंद्र कुमार मित्तल को भगोड़ा घोषित किया जा चुका है। अदालत के इस सख्त रुख के बाद आरोपी मित्तल ने भोपाल कोर्ट में सरेंडर कर जमानत हासिल कर ली। इस मामले में फरियादी मोहम्मद सईद तथा अन्य गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं।