- रघु ठाकुर की दो पुस्तकों का विमोचन कार्यक्रम
- लोकतंत्र की परिस्थितियां चिंताजनक हैं - रघु ठाकुर
- मीडिया के ब्लड कैंसर को पहचानने की आवश्यकता है - रायबहादुर राय
- डरपोक आदमी अहिंसक नहीं हौ सकता - लक्ष्मीदास
- देश के आम आदमी का मत छीनने की कवायद बंद हो- वीरेन्द्र सिंह
कार्यक्रम में उपस्थित राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने संबोधित करते हुए कहा कि आज विचारों को दबाने और मारने का कार्य किया जा रहा है। गांधीवादी और समाजवादी विचारधारा को समाप्त करके नफरत, सांप्रदायिकता और हिंसा को प्रमुखता से फैलाया जा रहा है। जबकि समाजवादी विचारधारा का अर्थ है सबमें समानता। डॉ राम मनोहर लोहिया को याद करते हुए उन्होंने कहा कि आरक्षण और विशेष अवसर का सिद्धांत होना चाहिये जिससे पिछड़े और वंचित वर्ग को लाभ मिले।
दुनिया भर में युद्ध पर चिंता जताते हुए उन्होंने इसका हल गांधी विचारधारा को बताया। जो कहती है कि हिंसा से हमें दूर होना चाहिए। समाजवाद जन्म के आधार पर भेद को नहीं मानता। यही कारण है कि सरकार इन्हें समाप्त कर देना चाहती है। आदरणीय रघु ठाकुर जी की पुस्तक के लेखों से हमें प्रेरणा लेनी चाहिए। दोनों ही पुस्तकें आज के समय की आवश्यकता हैं।
जाने माने गांधीवादी और हरिजन सेवक संघ के उपाध्यक्ष लक्ष्मीदास ने इसे वैचारिक चर्चा बताते हुए कहा कि साधारण व्यक्ति आलोचना तो करता है पर ना तो वह प्रश्न पूछता है और ना ही चिंतन करता है। गांधी के साथ प्रिटोरिया में जो घटना हुई जिसने एक सवाल खड़ा किया। और जिसका जवाब सत्याग्रह के रुप में पूरी दुनिया के सामने आया। गांधी के संदर्भ में ही उन्होंने कहा कि डरपोक व्यक्ति अहिंसक नहीं हो सकता।
अच्छे उद्देश्य के लिये की गई चर्चा से ज्ञान के साथ साथ संस्कृति की वृद्धि भी होती है।
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष राम बहादुर राय ने कहा कि समस्या बताने वाली पुस्तकें तो हैं किन्तु समाधान बताने वाली पुस्तकें बहुत कम हैं। समाधान बताने वाली पुस्तकों में रघु ठाकुर की पुस्तकें हैं। जिनके लेख प्रासंगिक और स्थायी महत्व के हैं। उन्होंने कहा कि मैं आज भी स्वयं को पत्रकार ही मानता हूं।
रघु जी के मीडिया पर लिखे गए लेख पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राय ने मीडिया के दोषों पर सहमति जताई। मीडिया खोखली हो गयी है। आज मीडिया के ब्लड कैंसर को पहचानने की आवश्यकता है। हमें सबसे ज्यादा उसी की चिंता करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मीडिया संस्थान ही भ्रष्ट हो चुके हैं। सारे मीडिया संस्थान पेड न्यूज की गिरफ्त में हैं।
कार्यक्रम में पधारे लोकसभा सदस्य वीरेन्द्र सिंह ने कहा कि देश में सच कहने की स्वीकार्यता समाप्त हो रही है। उन्होंने कोरोना वायरस के म्यूटेशन को मताधिकार और वोट के म्यूटेशन से जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा। युवाओं में ए आई के युग में रोजगार की समस्या से पूरा युवा अवसाद में है। श्री सिंह ने कहा कि एस आई आर और मतदाता जनगणना आम आदमी के वोट को छीनने की कवायद है।
वरिष्ठ पत्रकार अजय तिवारी ने पुस्तकों को भविष्य के चिंतन का आधार बताया.
कार्यक्रम के केंद्रबिंदु और पुस्तकों के लेखक रघु ठाकुर ने कहा कि लोकतंत्र की परिस्थितियां चिंताजनक हैं। उन्होंने कहा कि इन दिनों राजनीति सिद्धांतहीनता के पैरों पर खड़ी है। पत्रकारिता प्रायोजित पत्रकारिता हो गई है। लोकतंत्र मुफ्तखोरी पर सिमट गया है। सामूहिक वोट की चोरी हो रही है। सरकार खुलेआम सौदा कर रही है। वोट की सौदागिरी की सरकार है। सरकार आत्मनिर्भरता की खूब चर्चा करती है पर हकीकत में कितनी आत्मनिर्भरता है यह सोचने की बात है।
लोकतंत्र फल-फूल नहीं रहा बल्कि सिकुड़ रहा है।
ये परिस्थितियां लोकतंत्र के अनुकूल नहीं हैं। आखिर समाज में भय क्यों पैदा हुआ? यह सोचने की आवश्यकता है। लोकतंत्र को बचाने को हिम्मत की आवश्यकता है।
रघु ठाकुर ने इन दिनों चल रहे आंदोलनों पर चर्चा करते हुए गांधी जी को याद करते हुए कहा कि सामाजिक जीवन की मर्यादा होना चाहिए । गांधी ने दो सिद्धांत गढ़े थे एक जनांदोलनों की नैतिकता का और दूसरा भाषा का। क्योंकि व्यवस्था गालियों से नहीं रचना और संघर्ष से बदलेगी।
उन्होंने अपनी दोनों पुस्तकों पर आलोचनाओं का स्वागत किया है और उन आलोचनाओं से भविष्य में सुधार की अधिक संभावनाओं को बताया।
पुस्तकों की संपादक डॉ शिवा श्रीवास्तव ने पुस्तकों की विषय वस्तु पर प्रकाश डाला.
कार्यक्रम का संचालन अरुण प्रताप सिंह और धन्यवाद ज्ञापन मदन जैन ने किया। कार्यक्रम में विशेष सहयोग मुकेश चंद्रा और श्रीमती अनिता सिंह का रहा। कार्यक्रम में देशभर से पधारे बुद्धिजीवी साथियों में पत्रकार अजय तिवारी, रमेश शर्मा, राजवीर पंवार, श्याम सुंदर यादव, कर्नल ओ पी मलिक, विशेष अतिथि कर्नाटक के मांड्या से पधारे चिनप्पा , अशोक पंकज , चंद्रप्रकाश , ढाका जी, सर्वेश कुमार, अजीत त्यागी.सभा जीत सिंह नवनीत, हरपाल सिंह, अंकित पांडे, रवींद्र, बृजेश शर्मा एवं बड़ी संख्या में पत्रकार बुद्धिजीवी एवं कार्यकर्त्ता शामिल रहे।
