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1984 के सिख नरसंहार के शहीदों की स्मृति में कानपुर में शहीद चौक संगतों को समर्पित


कानपुर नगर (वेद गुप्ता)। कानपुर में वर्ष 1984 के सिख नरसंहार के 42 वर्ष पूर्ण होने पर शहीदों की स्मृति में शास्त्री नगर स्थित चैन फैक्ट्री चौराहे पर निर्मित शहीद चौक का लोकार्पण उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि राज्यमंत्री सरदार बलदेव सिंह औलख जी द्वारा किया गया। इस अवसर पर कानपुर में नरसंहार के दौरान शहीद हुए 127 निर्दोष सिखों के नाम शहीद चौक पर अंकित कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई तथा शहीद चौक सिख संगतों को समर्पित किया गया।


कार्यक्रम के दौरान वर्ष 1984 के नरसंहार में अपने परिजनों को खोने तथा उस समय हुई लूटपाट और हिंसा का शिकार बने परिवारों के सदस्यों सरदार महिंदर सिंह, सरदार जे.एस. अरोड़ा, सरदार हरिंदर पाल सिंह, सरदार हरजीत सिंह, सरदार अमनदीप सिंह एवं सरदार तिरलोच पाल सिंह को मंत्री सरदार बलदेव सिंह औलख जी द्वारा गुरु महाराज का सिरोपा भेंट कर सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन परिवारों के दर्द, संघर्ष और धैर्य के प्रति श्रद्धा एवं सम्मान का प्रतीक रहा।


कार्यक्रम का शुभारंभ बलजीत कौर एवं गुरुद्वारा फुलवारी की बहनों द्वारा चौपाई साहिब के पाठ से किया गया। तत्पश्चात गोविंद नगर विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्री सुरेंद्र मैथानी जी ने अपने संबोधन में कहा कि उनका सिख समाज से प्रारंभ से ही गहरा आत्मीय संबंध रहा है। वर्ष 1984 के दौरान उनके पड़ोस में रहने वाले अनेक सिख परिवारों को जब हिंसा और हमलों का सामना करना पड़ा, तब उन्होंने उनकी सुरक्षा एवं सहायता के लिए हर संभव प्रयास किया। उन्होंने कहा कि सिख समाज के साथ उनका यह आत्मीय और पारिवारिक रिश्ता आज भी कायम है और वे पहले भी सिख समाज के साथ खड़े थे, आज भी हैं और भविष्य में भी सदैव खड़े रहेंगे।

और जिन सिख समाज के लोगो के नाम रह गए हैं जानकारी मे आने के उपरांत उसको भी अंकित करा दिया जायेगा ।


इसके बाद उत्तर प्रदेश पंजाबी अकादमी के उपाध्यक्ष एवं सिख वेलफेयर सोसाइटी, उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष सरदार गुरविंदर सिंह छाबड़ा ने अपने संबोधन में कहा कि वर्ष 1984 में कांग्रेस सरकार के शासनकाल में कानपुर सहित पूरे देश में सिख समाज को चुन-चुनकर निशाना बनाया गया और निर्दोष सिखों का नरसंहार किया गया। उन्होंने कहा कि केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सिख नरसंहार के दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई कर उन्हें कानून के दायरे में लाने का कार्य किया गया है। 
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा अपने सरकारी आवास पर सिख पर्वों को सम्मानपूर्वक मनाना, लाल किले पर श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी का प्रकाश पर्व आयोजित होना तथा कानपुर से प्रारंभ हुई वीर बाल दिवस की आवाज का आज पूरे विश्व तक पहुंचना सिख समाज के इतिहास और बलिदान को राष्ट्रीय पहचान एवं सम्मान दिलाने के महत्वपूर्ण उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि इन आयोजनों और परंपराओं को व्यापक स्वरूप देने में केंद्र एवं प्रदेश सरकारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि राज्यमंत्री सरदार बलदेव सिंह औलख जी ने अपने संबोधन में कहा कि किसी एक व्यक्ति के कृत्य के लिए पूरी कौम को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। वर्ष 1984 में सिख समाज के साथ हुआ नरसंहार अत्यंत दुखद घटना थी। उन्होंने कहा कि केंद्र एवं प्रदेश सरकार ने पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं और जो दोषी अभी तक चिह्नित नहीं हो पाए हैं, उन्हें भी चिह्नित कर कानून के दायरे में लाने तथा सलाखों के पीछे पहुंचाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने शहीद चौक को सिख समाज के बलिदान और स्मृति का महत्वपूर्ण प्रतीक बताया।


कार्यक्रम का कुशल संचालन सिख वेलफेयर सोसाइटी, उत्तर प्रदेश के प्रदेश महामंत्री डॉ. मनप्रीत सिंह भट्टी ने किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से हरविंदर सिंह लाड, अवध बिहारी मिश्रा, रिंपी बिंद्रा, गगनदीप सिंह, परमजीत सिंह संडोक, संदीप छाबड़ा, रविंदर सिंह सोमी, रविंदर सिंह सोनू, जसबीर जुनेजा, गगन सोनी, मंजीत ठकुराल, जसमीत सिंह एवं विक्की गिल सहित बड़ी संख्या में सिख समाज के गणमान्य लोग एवं संगत उपस्थित रही। कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने 1984 के शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके बलिदान को सदैव याद रखने का संकल्प लिया।