भोपाल
किसानों की कर्जमाफी के लिए 5400 करोड़ रुपए देने से सरकार परेशानी में आ गई है। चालू वित्त वर्ष में सरकार ने दोनों अनुपूरक बजट की राशि मिलाकर 26000 करोड़ रुपए ज्यादा कर्ज ले लिया है। इससे खर्च की तुलना में आय घट गई है। घाटा बढ़ गया है।
वित्त विभाग का मानना है कि अगले साल बाजार से कर्ज उठाने की सीमा 2 हजार करोड़ रुपए कम हो जाएगी। इस बारे में जबलपुर में हुई कैबिनेट बैठक में चर्चा हुई। विभाग का कहना था कि लिमिट से 26 हजार करोड़ रुपए ज्यादा खर्च हो गए हैं, जो ठीक नहीं है। मंत्रिमंडल ने लगभग 89 हजार करोड़ के लेखानुदान को भी मंजूरी दे दी। इससे पहले मुख्यमंत्री समेत मंत्रिमंडल ने जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले में जिले के अश्वनी काछी समेत अन्य श्ाहीदों को श्रद्धांजलि दी।
कैबिनेट के अन्य फैसले
- सूचना प्रौद्योगिकी संचालनालय एवं कैडर के गठन को मंजूरी। इसके साथ ही सेंटर ऑफ एक्सीलेंस प्रोजेक्ट ई-मिशन को जारी रखा जाएगा।
- महिला हेल्पलाइन 181 (टोल फ्री नंबर) योजना को स्वीकृति। इस सेवा के लिए 27 पदों की पूर्ति आउट सोर्सिंग की जाएगी। इसके लिए 1 करोड़ 7 लाख रुपए की स्वीकृति।
- मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय में 76 और जिला निर्वाचन कार्यालयों में 408 पद आउट सोर्सिंग से भरे जाने को मंजूरी।
- कांग्रेस के वचन पत्र के अनुसार झुग्गीवासियों को पट्टे की बजाए सीधे रजिस्ट्री कराए जाने के लिए सर्वे का काम शुरू किया जाएगा।
ऐसे समझंे खजाने के घाटे का गणित
कुल राजस्व आय 1.54 लाख करोड़ रुपए
- केंद्र के एफआरबीएम एक्ट के अनुसार आय से ज्यादा खर्च बढ़ने पर बाजार से कर्ज लेने की लिमिट में कमी कर दी जाती है।
कुल खर्चा 26 हजार करोड़ रुपए ज्यादा
- खर्च आय से कम होने होने पर सरकार एसजीडीपी (8 लाख करोड़ रु.) का यानी 2019-20 में 3.5% कर्ज ले सकती है।
- चूंकि खर्च बढ़ा हुआ है इसलिए केंद्र अगले साल कर्ज लेने में .25% की कमी कर देगा। यह राशि 2 हजार करोड़ रु. होती है।
मोबाइल टावर लगाने की मंजूरी के अधिकार कलेक्टर के पास : कैबिनेट ने दूरसंचार की कनेक्टिविटी बढ़ाने को मोबाइल टावर लगाने के अधिकार कलेक्टरों को दे दिए हैं।
इसके लिए सरकार ने दूरसंचार, इंटरनेट एवं वायरलेस सेवाओं की नई नीति मध्यप्रदेश नगर पालिका नियम 2012 में संशोधन किया है। अभी तक टावर लगाने की परमिशन शहरी क्षेत्रों में नगर निगम और ग्रामीण क्षेत्रों में नगर पालिका और पंचायतें देती हैं।