![]() |
राज्यसभा में हंगामे के बीच हुई चर्चा का जवाब देते हुए शाह ने कहा कि हमारा इरादा केंद्र शासित राज्य की व्यवस्था को लंबे समय तक बनाए रखने का नहीं है। उचित समय आने पर हम फिर राज्य बना देंगे।
इससे पूर्व राष्ट्रपति ने संविधान आदेश (जम्मू-कश्मीर के लिए) 2019 पर दस्तखत किए। संसद सत्र चालू होने की वजह से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में इससे जुड़ा संकल्प भी पेश किया। थोड़ी ही देर बाद सरकार ने इस बारे में अधिसूचना भी जारी कर दी।
नेहरू ने कहा था कि 370 घिस जाएगी, 70 साल में ऐसा नहीं हुआ- शाहअमित शाह बोले- नेहरूजी ने भी कहा था कि 370 घिसते-घिसते घिस जाएगी, लेकिन उन्होेंने इसे इतने जतन से रखा कि ये 70 साल में घिसी नहीं। टेम्परेरी शब्द 70 साल तक कैसे चला, इस प्रावधान को कैसे चलाना है?
70 साल पहले संविधान में जोड़ा गया था अनुच्छेद26 अक्टूबर 1947 को जम्मू-कश्मीर के राजा हरि सिंह ने विलय संधि पर दस्तखत किए थे। उसी समय अनुच्छेद 370 की नींव पड़ गई थी, जब समझौते के तहत केंद्र को सिर्फ विदेश, रक्षा और संचार मामलों में दखल का अधिकार मिला था। 17 अक्टूबर 1949 को अनुच्छेद 370 को पहली बार भारतीय संविधान में जोड़ा गया।
राज्य पुनर्गठन विधेयक पेशजम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाने के लिए सरकार ने सोमवार को राज्य पुनर्गठन विधेयक भी पेश किया। इसे बाद में पास कराया जाएगा। शाह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर दिल्ली और पुड्डुचेरी की तरह केंद्र शासित प्रदेश रहेगा यानी यहां विधानसभा रहेगी। वहीं लद्दाख की स्थिति चंडीगढ़ की तरह होगी, जहां विधानसभा नहीं होगी।
राज्य में जंग जैसे हालात- गुलाम नबीजब राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हुई तो सभापति एम वेंकैया नायडू ने शाह से जम्मू-कश्मीर आरक्षण संशोधन विधेयक पेश करने को कहा। इस पर विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि कश्मीर में कर्फ्यू है। तीन पूर्व मुख्यमंत्री नजरबंद कर दिए गए हैं। राज्य में हालात वैसे ही हैं, जैसे जंग के वक्त होते हैं। विधेयक तो पारित हो जाएगा। हम विधेयक के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन हमें पहले कश्मीर के हालात पर चर्चा करनी चाहिए। हमने इसी को लेकर नोटिस भी दिया है। एक घंटे उस पर चर्चा होनी चाहिए। आजाद के बयान पर शाह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर हर जवाब देने को तैयार हूं और यह विधेयक भी कश्मीर के संबंध में ही है।
