इंदौर।. पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के निधन से पाकिस्तान से लौटकर आई गीता स्तब्ध है। उसने कहा- मेरी मां चली गई, मैं अनाथ हो गई। अब मेरा ध्यान कौन रखेगा। मेरी मां जब भी इंदौर आईं मुझसे मिलीं। फोन पर भी मुझसे समय-समय पर बात करती थीं। बीमारी के चलते एक महीने से बात नहीं हो पा रही थी।
साल 2015 में पाकिस्तान से भारत लौटने वाली मूक-बधिर गीता को मंगलवार रात पूर्व विदेश मंत्री के निधन की सूचना नहीं दी गई थी। बुधवार सुबह जैसे ही उसे इसकी खबर दी गई, वह भावुक हो गई। हमेशा चहकने वाली गीता मौन थी। खबर सुनते ही उसकी आंख में आंसू आ आगे। पथराई आंखों में आंसू लिए वह बोली कि मुझे जो पीड़ा हो रही है, उसे मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकती हूं।
गीता को इस बात की भी चिंता है कि अब उसका क्या होगा। स्वराज समय-समय पर खैर-खबर लेती रहती थीं। गीता बीते पांच साल में 8 बार स्वराज से मिल चुकी थी। गीता ने बताया कि एक महीना या 15 दिन में मेरी उनसे (सुषमा स्वराज) फोन पर बात हो जाया करती थी। पिछली दफा जुलाई में बात हुई थी।
मूक बधिर संगठन के ट्रांसलेटर संदीप पंडित के जरिए गीता ने बताया कि मैंने जुलाई में उनसे मिलने की इच्छा जताई थी, लेकिन उनके निजी सहायक ने बताया था कि उनकी तबीयत खराब है। उन्होंने मुझे केन्दीय मंत्री थावरचंद गहलोत के माध्यम से लैपटॉप भी दिलवाया था। साथ ही, यह भी कहा था कि अगर किसी चीज की ज़रूरत हो तो उन्हें बता दूं। बता दें कि स्वराज ने केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत को गीता की जिम्मेदारी सौंपी थी। गीता बैडमिंटन खिलाड़ी बनना चाहती है। गीता अभी इंदौर के हरनाम लक्ष्मी खुशीराम बघिर बालक छात्रावास में रह रही है।
साल 2015 में पाकिस्तान से भारत लौटने वाली मूक-बधिर गीता को मंगलवार रात पूर्व विदेश मंत्री के निधन की सूचना नहीं दी गई थी। बुधवार सुबह जैसे ही उसे इसकी खबर दी गई, वह भावुक हो गई। हमेशा चहकने वाली गीता मौन थी। खबर सुनते ही उसकी आंख में आंसू आ आगे। पथराई आंखों में आंसू लिए वह बोली कि मुझे जो पीड़ा हो रही है, उसे मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकती हूं।
गीता को इस बात की भी चिंता है कि अब उसका क्या होगा। स्वराज समय-समय पर खैर-खबर लेती रहती थीं। गीता बीते पांच साल में 8 बार स्वराज से मिल चुकी थी। गीता ने बताया कि एक महीना या 15 दिन में मेरी उनसे (सुषमा स्वराज) फोन पर बात हो जाया करती थी। पिछली दफा जुलाई में बात हुई थी।
मूक बधिर संगठन के ट्रांसलेटर संदीप पंडित के जरिए गीता ने बताया कि मैंने जुलाई में उनसे मिलने की इच्छा जताई थी, लेकिन उनके निजी सहायक ने बताया था कि उनकी तबीयत खराब है। उन्होंने मुझे केन्दीय मंत्री थावरचंद गहलोत के माध्यम से लैपटॉप भी दिलवाया था। साथ ही, यह भी कहा था कि अगर किसी चीज की ज़रूरत हो तो उन्हें बता दूं। बता दें कि स्वराज ने केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत को गीता की जिम्मेदारी सौंपी थी। गीता बैडमिंटन खिलाड़ी बनना चाहती है। गीता अभी इंदौर के हरनाम लक्ष्मी खुशीराम बघिर बालक छात्रावास में रह रही है।
