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पूर्व ओपनर नासिर जमशेद ने फिक्सिंग की बात स्वीकारी, अगले साल सजा सुनाई जाएगी


लंदन। पाकिस्तान के पूर्व ओपनर नासिर जमशेद (33) ने एक टी-20 में फिक्सिंग की साजिश में शामिल होने की बात मान ली है। मामला पाकिस्तान सुपर लीग (पीएसएल) से जुड़ा है। जमशेद ने पहले आरोप से इनकार किया था, लेकिन इंग्लैंड के मैनचेस्टर में सोमवार को सुनवाई के दौरान अपनी याचिका बदल दी। फिक्सर यूसुफ अनवर (36) और मोहम्मद एजाज (34) रिश्वत देने की बात पहले ही मान चुके थे। इस मामले में फरवरी में सजा सुनाई जाएगी।

मामले की सुनवाई के शुरुआत में सरकारी वकील एंड्रयू थॉमस ने कहा, ‘‘एक अंडरकवर पुलिस अधिकारी ने खुद को फिक्सिंग गिरोह का सदस्‍य बताते हुए स्‍पॉट फिक्सिंग के नेटवर्क में जगह बनाई। उन्होंने 2016 में बांग्‍लादेश प्रीमियर लीग में फिक्सिंग के प्रयास और फरवरी 2017 में पाकिस्‍तान सुपर लीग में फिक्सिंग का खुलासा किया। दोनों मामलों में टी-20 टूर्नामेंट में एक ओपनर ने पैसे लेकर एक ओवर की पहली दो गेंद पर रन नहीं बनाने की सहमति दी थी।’’
शार्जील ने पहली दो गेंद पर रन नहीं बनाया
बांग्‍लादेश में दो गेंद पर रन नहीं बनाने के प्‍लान में फिक्सर के निशाने पर जमशेद थे। बाद में वे इसमें खुद शामिल हो गए। उन्‍होंने पाकिस्‍तान सुपर लीग में इस्‍लामाबाद यूनाइटेड और पेशावर जाल्‍मी के बीच मैच के दौरान बाकी खिलाड़ियों को स्‍पॉट फिक्सिंग के लिए उकसाया। पदाधिकारियों को इस बात का पता चला और उन्होंने मैच होने दिया। मैच में शार्जील खान ने पहली दो गेंद पर रन नहीं बनाया।
पिछले साल जमशेद को 10 साल के लिए प्रतिबंधित किया गया था
इससे पहले अगस्त 2018 में भ्रष्टाचार रोधी एक स्वतंत्र ट्रिब्यूनल ने जमशेद को 10 साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया था। नासिर पर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) की भ्रष्टाचार विरोधी संहिता की सात धाराओं के उल्लंघन का आरोप था। इसमें से ट्रिब्यूनल ने नासिर को पांच में दोषी पाया था। उन्होंने बार-बार नियमों का उल्लंघन किया था। 2017 की शुरुआत में क्रिकेट में भ्रष्टाचार की जांच शुरू करने के बाद से ही जमशेद पीसीबी के रडार पर थे। उन्हें फरवरी, 2017 में ब्रिटेन में गिरफ्तार किया गया था।

दिसंबर, 2017 में पीसीबी ने जमशेद पर एक साल का प्रतिबंध लगाया था, भ्रष्टाचार रोधी ट्रिब्यूनल ने उनको पीएसएल स्पॉट फिक्सिंग मामले में जांच में सहयोग नहीं देने का दोषी पाया था। जमशेद पर लगा यह प्रतिबंध अप्रैल 2018 में ही हटा था।