नई दिल्ली। देश के पहले स्वदेशी विमान वाहक जहाज विक्रांत का निर्माण 2021 तक पूरा होने की संभावना है। अभी इसका निर्माण कार्य तीसरे चरण में है। मशीनरी के सेटअप और अन्य उपकरणों को लगाने जैसे बिजली उत्पादन और प्रपल्शन मशीनरी का काम चल रहा है। सूत्रों ने कहा कि तीसरे चरण का निर्माण होने के बाद बंदरगाह और समुद्री परीक्षणों की स्वीकृति मिलेगी। एविएशन के ट्रायल में एक साल का समय लग सकता है। कोच्चि के कोचिन शिपयार्ड में जहाज को बनाया जा रहा है। यह एयरक्राफ्ट कैरियर 20 मिग-29 फाइटर जेट्स ले जाने में सक्षम होगा।
नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह ने 3 दिसंबर को कहा था कि विक्रांत 2022 से पूरी तरह अभियानों के लिए तैयार हो जाएगा। इसमें मिग-29 विमानों का बेड़ा होगा। अधिकारियों ने बताया कि गणतंत्र दिवस के दिन राजपथ पर होने वाली परेड के दौरान नौसेना की झांकी में मिग-29 विमानों के साथ विक्रांत को प्रदर्शित किया जाएगा।
केवल 4 देशों के पास 40 हजार टन वाले जहाज बनाने की क्षमता
विक्रांत 40 हजार टन वजन वाला विमान वाहक जहाज है। दुनिया में केवल अमेरिका, रूस, ब्रिटेन और फ्रांस के पास ही 40 हजार और इससे ज्यादा वजन वाले विमान वाहक जहाज का निर्माण करने की क्षमता है। विक्रांत 20 मिग-29 लड़ाकू विमान और दस हेलीकॉप्टरों को ले जाने में सक्षम है। 2017 में आईएनएस विराट के रिटायर होने के बाद भारत के पास केवल एक विमान वाहक जहाज आएनएस विक्रमादित्य है।
