नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) की छात्रसंघ अध्यक्ष आइशी घोष ने सोमवार को कहा कि उन्होंने यूनिवर्सिटी में हिंसा भड़कने के कुछ घंटे पहले पुलिस को बताया कि था कि कुछ अज्ञात लोग कैंपस में जमा हो रहे हैं, लेकिन पुलिस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि रविवार को दोपहर लगभग 2:30 बजे पुलिस को बताया था कि हम सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे। क्योंकि कई अज्ञात लोग कैंपस में जमा हो गए थे। आइशी ने कहा कि हम फीस बढ़ोतरी को लेकर यूनिवर्सिटी में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, ताकि इस मुद्दे को हल किया जा सके।
आसपास के छात्रों ने अस्पताल पहुंचाया: आइशी
प्रदर्शन के दौरान अचानक आइशी और अन्य छात्रों को कुछ नकाबपोश लोगों ने निशाना बनाया। छात्रसंघ अध्यक्ष ने कहा कि साबरमती हॉस्टल के पास भी हमला किया गया था। लोहे की रॉड से हमला हुआ। चोट लगने से काफी खून निकला। आसपास के छात्रों ने अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस बुलाई। आइशी ने हमले के लिए कुलपति जगदीश कुमार को दोषी ठहराया और इस्तीफा देने की मांग की।
हिंसा में 35 लोग जख्मी
जेएनयू में फीस बढ़ोतरी के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान रविवार रात हिंसा हुई थी। नकाबपोशों ने छात्र-शिक्षकों को डंडे और लोहे की रॉड से बुरी तरह पीटा। वे ढाई घंटे तक कैंपस में कोहराम मचाते रहे। आइशी ने एबीवीपी पर हमले का आरोप लगाया और कहा कि नकाबपोश गुंडों ने मुझे बुरी तरह पीटा। करीब 35 लोग जख्मी हो गए। जेएनयू में हिंसा के बाद भारी संख्या में पुलिसबल तैनात है।
