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केंद्र सरकार पूंजीपतियों के हितों के लिए किसानों, कर्मियों और मजदूरों के हक मार रही

  • सागर में 12 फरवरी की आम राष्ट्रव्यापी हड़ताल का रहा असर, रैली निकालने के बाद हुई आमसभा

सागर।
देश के मजदूर किसानों के संयुक्त आव्हान पर 12 फरवरी की घोषित आम हड़ताल में सागर जिले के ट्रेड यूनियन मजदूर संगठन एवं संयुक्त किसान मोर्चा ने शामिल होकर आवाज बुलंद की। इस दौरान रैली में जिले के बैंक कर्मचारी, मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव यूनियन, विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ, सफाई कर्मचारी, पीडब्ल्यूडी यूनियन एवं संयुक्त किसान मोर्चा के किसानों ने आयोजित विरोध प्रदर्शन में बढ़ चढ़कर हिस्सेदारी की। रैली सागर के नमक मंडी स्थित भाकपा कार्यालय से प्रारंभ होकर तीन बत्ती, कटरा मस्जिद होते हुए राधा तिराहा से होकर कीर्ति स्तंभ तक सरकार के मजदूर किसान विरोधी नीतियों के विरोधी नारों से गुंजायमान करते निकली।                                    




राष्ट्रव्यापी 12 फरवरी की आयोजित आम हड़ताल, सरकार की मजदूर विरोधी चार श्रमिक कानून को रद्द कराने, 26000 रुपया की न्यूनतम मजदूरी, स्थाई रोजगार और काम के घंटे 8 से 12 घंटे कराने के साथ-साथ, मनरेगा कानून की बहाली एवं अडानी अंबानी परस्त सरकार की भारत अमेरिका व्यापार संधि के विरुद्ध थी।

रैली को संबोधित करते हुए बैंक कर्मचारी यूनियन के नेता दिनेश खरे यूटीयूसी के राम अवतार शर्मा, संयुक्त किसान मोर्चा के जिला संयोजक संदीप ठाकुर एवं अंत में प्रदेश के वरिष्ठ श्रमिक एक नेता अजित कुमार जैन ने संबोधित करते हुए कहा कि मोदी की तानाशाही भाजपा सरकार पूंजीपतियों के हितों की सुरक्षा करते हुए अपने पूंजीवादी फासीवादी इरादों के तहत सरकार की शोषण की व्यवस्था को मजबूती से लागू कर रही है।                      



सरकार ने देश के प्रजातंत्र, संविधान और देश की एकता अखंडता को खतरे में डाल दिया है। मजदूरों के अपने अधिकारों को संजोए हड़ताल के संवैधानिक अधिकार समेत गरिमा और सम्मानपूर्ण जीवन जीने के अधिकारों को सरकार ने कुचल दिया है। उन्होंने आगे कहा की सरकार के खिलाफ राज्य में तेज आंदोलन किए जाएंगे।

किसान नेताओं ने कहा कि यह मोदी सरकार की एक सोची समझी चाल है जिसने श्रमिक विरोधी कानून को तैयार किया और अब किसानों के हितों पर चोट करते हुए 18% टैरिफ की शर्त पर अमेरिकी कृषि आयात को मंजूरी देकर भारतीय ग्रामीण कृषि व्यवस्था को सरकार अपने पैरों तले रौंद रही है। आज भी किसान सब्सिडी, खाद, पानी, बिजली के लिए परेशान हैÑ। दूसरी ओर, मोदी सरकार ने अपने लाल किले के प्राचीर से यह घोषणा की थी कि भारतीय कृषि को और किसानों को हम किसी तरह नीचे नहीं जाने देंगे। लेकिन आज सब झूठ साबित हुआ है।                                                                                                                                                                                  
                          

  सभी नेताओं ने पुरजोर आंदोलन चलाए जाने पर जोर दिया। इसके साथ ही नमक मंडी से प्रारंभ हुई रैली का नेतृत्व करने वाले साथियों में कॉमरेड चंद्र कुमार जैन, कामरेड गोवर्धन पटेल, हरजू अहिरवार, भवानी पटेल, राजू चौरसिया, भूपत रैंकवार, स्वदेश संकत, राजेंद्र संकत, राजू चौरसिया एवं भाकपा के जिला सचिव राहुल भायजी आदि पदाधिकारी रैली में शामिल थे।






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