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श्रम विरोधी नीतियों के खिलाफ ट्रेड यूनियनों और केंद्रीय कर्मियों की हड़ताल

  • -राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल से खेत, खदान, कोल, बैंक, बीमा, डॉक तार, टेलीफोन एवं केंद्रीय कार्यालयों में कामकाज ठप्प                                                                                                                 
  • -राजधानी भोपाल में हड़ताली कर्मचारियों ने कलरफुल इंकलाबी रैली निकालकर श्रम नीतियों के खिलाफ आक्रोश जताया

भोपाल।
इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू, एआईयूटीयूसी, सेवा तथा बैंक, कोल, बीमा, बीएसएनएल, मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव एवं अन्य संस्थानों की ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर केंद्र की श्रम विरोधी नीतियों के खिलाफ देशभर के 25 करोड़ से ज्यादा मजदूर, कामगार, कर्मचारी एवं अधिकारी हड़ताल पर रहे। नतीजे में बैंक, बीमा, डॉक तार, केंद्र, आयकर, सामान्य बीमा, बीएसएनएल, आगनबाडी, कोयला, परिवहन, तेल, पोर्ट, विमानन एवं अन्य संस्थानों के कार्यालयों में कामकाज ठप्प रहा।
                                                                                                                                                                       

                                                                                                                                                                                
भोपाल में ट्रेड यूनियनों के हजारों कामगार एवं कर्मचारी रंग-बिरंगे बैनर, पोस्टर, प्ले कार्ड्स एवं कलरफुल ड्रेस के साथ प्रेस कांप्लेक्स स्थित पंजाब नैशनल बैंक की शाखा के सामने एकत्रित हुए। यहां मांगों के समर्थन में नारेबाजी कर प्रदर्शन के बाद करीब दो हजार कर्मियों की रैली निकली। इसके बाद हुई सभा को वीरेंद्र कुमार शर्मा, प्रमोद प्रधान, विनोद लोगरिया, नजीर कुरैशी, संजय मिश्रा, भूषण भट्टाचार्य, यशवंत पुरोहित, दीपक रत्न शर्मा, पूषण भट्टाचार्य, एस एस मोर्या, आर ए शर्मा, ए परसाई, शैलेंद्र कुमार शैली, संजय कुदेशिया, शैलेंद्र शर्मा आदि ने संबोधित किया। कॉमरेड वैभव गुप्ता ने आभार व्यक्त किया।





मजदूरों की आज की इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल में बैंक, बीमा , केंद्रीय कर्मचारी, पोस्टल, टेलीफोन ,एनएफएल, भेल, परिवहन, आॅटो चालक, खेतिहर मजदूर , हम्माल, पल्लेदार, मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव, आंगनवाड़ी ,आशा -उषा वर्क्स, स्कीम वर्क्स, संविदा कर्मी, ट्रांसपोर्ट वर्कर्स आदि से संबंधित करीब 5 लाख मजदूर, कामगार, कर्मचारी, अधिकारियों के शामिल होने के कारण इन जगह कामकाज ठप्प रहा।





कर्मचारी नेताओं ने अनसुनी पर केंद्र को आगाह किया


इस दौरान कर्मचारी नेताओं ने केंद्र सरकार को आगाह किया की मांगे ना माने जाने की स्थिति में आंदोलन को और तीव्र किया जाएगा। इसमें धरना, प्रदर्शन, सभाओं के अलावा राष्ट्रव्यापी हड़तालें भी शामिल है। वक्ताओं ने कहा कि जब सरकार जन, श्रम एवं किसान विरोधी नीतियों के माध्यम से आमजन पर लगातार आक्रमण कर रही हो, जब कामगार और किसान वर्ग का दुख दर्द गहराता जा रहा हो, जब अर्थव्यवस्था सबसे निचले स्तर पर हो, जब जनता की भलाई के लिए सरकार यथार्थवादी नीतियों को लागू करने में हिचकिचा रही हो, जब कामगार वर्ग की समस्याओं की भी सुनवाई नहीं हो रही हो, जब बेरोजगारी चरम सीमा पर हो एवं रोजगार घट रहे हों, जब लगातार सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों एवं ट्रेड यूनियनों पर हमले हो रहे हों, तब यह आवश्यक रूप से आंदोलन का रूप धारण करेगा तथा उसका स्तर व तीव्रता भी उच्च होगी और परिणामत: हिंदुस्तान के इतिहास में यह विश्व की सबसे बड़ी हड़ताल होगी। उन्होंने कहा जनता पर प्रहार करने वालों पर प्रहार करो, सरकार के अत्याचारों को रोकने के लिए हड़तालों से आक्रमण करो।



इन प्रमुख मांगों के लिए की गई हड़ताल                                                                                                                                                                                                                                                                              
-असंगठित क्षेत्र के मजदूरों, अनुबंध मजदूरों और योजना मजदूरों सहित सभी मजदूरों के लिए 26 हजार मासिक राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन हो।

-चारों श्रम संहिताओं, लेबर कोड्स को खत्म करो।

-काम का आकस्मिककरण जैसे कि फिक्स फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट , आउट सोर्स, अप्रेंटिसशिप, प्रशिक्षु आदि न किया जाए। ठेका कर्मचारियों के लिए समान कार्य के लिए समान वेतन लागू हो।

-असंगठित क्षेत्र के कामगारों और कृषि क्षेत्र के कामगारों सहित सभी श्रेणियों के कामगारों के लिए न्यूनतम पेंशन 9 हजार रुपए मासिक हो।

-पुरानी पेंशन योजना बहाल करो। एनपीएस और यूपीएस खत्म करो।

-बोनस, भविष्य निधि के भुगतान और पात्रता पर अधिकतम सीमाऐं हटाई जाकर ग्रेच्युटी की राशि बढ़ाई जाए।

-आवेदन प्रस्तुत करने की तिथि से 45 दिनों के अंदर ट्रेड यूनियनों का अनिवार्य पंजीकरण हो; अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के कन्वेंशन सी-87 और सी-98 का तत्काल अनुसमर्थन हो

-मूल्य वृद्धि पर नियंत्रण करें, खाद्यान्न, दवाइयां, कृषि-इनपुट और मशीनरी जैसी आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी हटाएं ,पेट्रोलियम उत्पादों और रसोई गैस पर केन्द्रीय उत्पाद शुल्क में पर्याप्त कमी करें। खाद्य सुरक्षा की गारंटी दें और सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सार्वभौमिक बनाएं

-सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों, सरकारी विभागों का निजीकरण बंद करो। राष्ट्रीय मौद्रीकरण पाइपलाइन (एनएमपी) को खत्म करो। खनिजों और धातुओं के खनन पर मौजूदा कानून में संशोधन करो और स्थानीय समुदायों, खासकर आदिवासियों और किसानों के उत्थान के लिए कोयला खदानों सहित खदानों से होने वाले मुनाफे में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी सुनिश्चित करो।

-सभी कृषि उपजों के लिए सी-2+50 प्रतिशत की दर से एमएसपी की गारंटी के साथ खरीद। कानूनी गारंटी के साथ बीज, उर्वरक और बिजली आदि पर किसानों को दी जाने वाली इनपुट सब्सिडी में वृद्धि की जाए।

-बिजली (संशोधन) विधेयक, 2022 वापस लो। बिजली का निजीकरण बंद करो। प्रीपेड स्मार्ट मीटर नहीं हो।

-काम करने के अधिकार को मौलिक बनाया जाए। स्वीकृत पदों को भरें और बेरोजगारों के लिए रोजगार पैदा करें। मनरेगा प्रति वर्ष 200 दिन और 600 रुपये प्रतिदिन मजदूरी के साथ लागू करें। शहरी रोजगार गारंटी अधिनियम लागू करें।

-मुफ्त शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी और स्वच्छता के अधिकार की गारंटी दी जाए। नई शिक्षा नीति, 2020 को रद्द किया जाए।

-वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) का सख्ती से क्रियान्वयनय हो, वन (संरक्षण) अधिनियम, 2023 और जैव-विविधता अधिनियम तथा नियमों में संशोधन वापस ले।

-कल्याण कोष से अंशदान के साथ निर्माण मजदूरों को ईएसआई कवरेज दें, ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत सभी मजदूरों को स्वास्थ्य योजनाओं, मातृत्व हितलाभ, जीवन और विकलांगता बीमा का कवरेज भी दें।

-कॉरपोरेट कर में वृद्धि करें, सम्पत्ति कर और उत्तराधिकार कर को पुन: लागू करें।

-संविधान के मूल मूल्यों अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, असहमति का अधिकार, धर्म की स्वतंत्रता, विविध संस्कृतियों, भाषाओं, कानून के समक्ष समानता और देश के संघीय ढाँचे आदि पर हमले बंद करें।


वित्तीय संस्थानों की ट्रेड यूनियंस द्वारा बैंक एवं वित्तीय संस्थानों के कामगारों की मांगों को सरकार के ध्यान में लाया गया :-


1. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और बीमा कंपनियों को मजबूत करो

2. निजीकरण और विनिवेश पर रोक लगाओ

3. बीमा क्षेत्र में 100% विदेशी निवेश पर रोक लगाओ

4. सार्वजनिक सामान्य बीमा कंपनियों का एकीकरण करो

5. पर्याप्त नई भर्तियों करो

6. आउटसोर्सिंग व ठेका प्रथा पर रोक लगाओ

7. एनपीएस हटाकर पुरानी पेंशन योजना लागू करो

8. कारपोरेट से बकाया ऋण वसूली के लिए सख्त कार्यवाही करो

9. आम ग्राहकों पर सेवा शुल्क में कमी करो

10 चार नई श्रम संहिताओं/लेबर कोड्स को वापस लो

12. ट्रेड यूनियन अधिकारों में हस्तक्षेप बंद करो

13. आईडीबीआई बैंक को बेचने का निर्णय वापस लो




यूनियन और किसान लीडर ने कहा


केंद्र की श्रम विरोधी नीतियों के विरोध में देशव्यापी हड़ताल बेहद सफल रही, क्योंकि जायजा मांगों की सुनवाई नही हो रही है। सिर्फ आश्वासन मिलते हैं, लेकिन सुधार नहीं हो रहा है। ऐसे में हड़ताल ही एममात्र रास्ता बचा था।

-वीके शर्मा
, को आर्डीनेटर, बैंक यूनियन


केंद्र सरकार का रवैया जायज मांगों की सुनवाई करने के बजाय कुचलने वाला है। मंहगाई के कारण अवाम का जीना मुश्किल हो गया है। दूसरी ओर सरकार देशविरोधी ट्रेड डील सहित बेफिजूल के कामों और दावों में जुटी है।

-नजीर कुरैशी, चेयरमैन, सेंट्रल बैंक एंप्लाइज एसोसिएशन


कर्मचारियों और कामगारों की मांगें बेहद जायज हैं, जिनकी तत्काल पूर्ति करने के बजाय केंद्र सरकार टाल-मटोल में लगी है। पूर्व में केंद्र ने विचार करने का भरोसा दिलाया था, लेकिन नतीजे शून्य रहने से देशव्यापी हड़ताल की गई।

-यशवंत पुरोहित, आयकर कर्मचारी यूनियन


किसानों, खेतिहर मजदूरों, दिहाड़ी श्रमिकों की मांगों की अनदेखी से जीना मुश्किल होता जा रहा है। हर बार केंद्र सरकार निराकरण का दावा करती है, लेकिन होता कुछ नहीं। अब सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरते रहेंगे।

-संदीप ठाकुर, किसान संघर्ष समिति सागर

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