दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने पांच राज्यों के मुख्य सचिवों को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा कि हाथ से मैला ढोने के काम में होने वाली मौतों को रोकने में नाकाम रहने पर उनके खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए। सीवर की सफाई और हाथ से मैला ढोने के काम को रोकने के लिए डॉ. बलराम की ओर से दायर एक लंबे समय से चल रही जनहित याचिका (PIL) पर सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2023 में इस समस्या को खत्म करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने सीवर की सफाई के दौरान होने वाली मौतों के मामलों में मुआवज़े की रकम बढ़ाकर 30 लाख रुपये की। इसके बाद जनवरी 2025 में कोर्ट ने छह बड़े शहरों में हाथ से मैला ढोने और सीवर की सफाई के काम पर पूरी तरह रोक लगाई। तब से कोर्ट इस मामले पर नज़र रख रहा है और निर्देशों का पालन न होने पर अधिकारियों को ज़रूरी निर्देश जारी कर रहा है।
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने सोमवार को अब तक हुई प्रगति पर मामले की सुनवाई की। सीनियर एडवोकेट के. परमेश्वर (एमिक्स क्यूरी) ने कहा कि 2023 के फैसले और उसके बाद दिए गए निर्देशों के बावजूद मौतें हो रही हैं। उन्होंने बताया कि संसद में एक 'स्टार्ड क्वेश्चन' (तारांकित प्रश्न) के जवाब में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, 2025 में 46 और 2024 में 54 मौतें हुई हैं। खास राज्यों की बात करें तो उन्होंने बताया कि 2024 में महाराष्ट्र में 17, तमिलनाडु में 12 और राजस्थान में 13 मौतें हुईं। अन्य राज्यों में गुजरात और उत्तर प्रदेश शामिल हैं।
रोक के कड़े निर्देशों के बावजूद मौतें जारी रहने की बात सुनकर जस्टिस कुमार ने कहा कि अब अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई करने का समय आ गया। कहा गया, "अगर हमारे आदेशों के बाद भी मौतें हुई हैं तो हम आपके मुख्य सचिवों को तलब करेंगे। हम यह बिल्कुल साफ कर रहे हैं कि हम स्वतः संज्ञान (suo moto) लेते हुए अवमानना की कार्रवाई शुरू करने जा रहे हैं; यह सब ऐसे नहीं चल सकता। हमने बिल्कुल साफ किया कि हाथ से मैला ढोने का काम नहीं होना चाहिए, फिर भी मौतें हो रही हैं, आप ठेकेदारों पर दोष मढ़ने लगते हैं... हम ज़िम्मेदारी तय करेंगे। कहीं तो इसे रुकना ही होगा। हम आपके मुख्य सचिवों को कारण बताओ नोटिस (show-cause notice) जारी कर रहे हैं।"
अदालत ने आदेश दिया: "अक्टूबर 2023 के आदेश के ज़रिए हमने अन्य बातों के साथ-साथ ये निर्देश जारी किए... बाद में सुनवाई के दौरान समय-समय पर कुछ और निर्देश भी जारी किए गए। सीवर या सेप्टिक टैंक में लोगों के उतरने से होने वाली मौतों के संबंध में जारी किया गया एक निर्देश अभी भी प्रासंगिक है, क्योंकि ऐसी घटनाएँ अब भी बड़ी संख्या में हो रही हैं। दूसरे शब्दों में ऐसा लगता है कि इस अदालत द्वारा जारी निर्देशों का असर ठीक से नहीं हुआ और समस्या को ठीक करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए। असल में 18.3.2026 को 'तारांकित प्रश्न' (starred questions) भी उठाए गए और तारांकित प्रश्न संख्या 276 के साथ संलग्न जानकारी में 'खतरनाक सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के काम' और पिछले तीन वर्षों (2023, 2024 और 2025) के दौरान राज्य-वार मौतों का विवरण इस प्रकार है... इसे देखते हुए हम नीचे दिए गए राज्यों के मुख्य सचिवों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हैं कि क्यों न उनके खिलाफ जानबूझकर आदेश की अवहेलना करने के लिए अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाए। उन्हें चार सप्ताह के भीतर हलफनामे के माध्यम से इसका जवाब देना होगा।"