मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा हमारी सांस्कृतिक चेतना की आधारशिला है और महर्षि सांदीपनि इस गौरवशाली परंपरा के ऐसे महान आचार्य हैं, जिनके सान्निध्य में भगवान श्रीकृष्ण, बलराम और सुदामा जैसे आदर्श शिष्यों का निर्माण हुआ।
पुस्तक की प्रस्तावना मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने लिखी है। उन्होंने अपने संदेश में कहा है कि महर्षि सांदीपनि ने शिक्षा को केवल विद्या अर्जन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे चरित्र निर्माण, अनुशासन, समरसता और लोककल्याण से जोड़ा। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा भारतीय ज्ञान परंपरा, गुरु-शिष्य संस्कृति तथा महर्षि सांदीपनि की विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह ग्रंथ विशेष रूप से विद्यार्थियों और युवा पीढ़ी को भारतीय शिक्षा-दर्शन, गुरु के प्रति श्रद्धा तथा जीवन-मूल्यों के प्रति समर्पण के लिए प्रेरित करेगा।
यह पुस्तक महर्षि सांदीपनि के जीवन, शिक्षा-दृष्टि, गुरुकुल परंपरा, श्रीकृष्ण की शिक्षा, भारतीय शिक्षा-दर्शन में उनके योगदान तथा वर्तमान भारत में उनकी प्रासंगिकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों को समाहित करती है और भारतीय गुरु परंपरा के समृद्ध स्वरूप का प्रामाणिक दस्तावेज प्रस्तुत करती है।