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नर्मदा जल विवाद: मध्यप्रदेश के हितों के साथ विश्वासघात और विस्थापितों के जख्मों पर नमक: माकपा

  • मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने कहा है कि  मध्यप्रदेश में 30 प्रतिशत से अधिक विस्थापितों का पुनर्वास नहीं हुआ 
  • मध्यप्रदेश सरकार ने 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत 7669.86 करोड़ रुपए का मुआवजा गुजरात सरकार से माँगा था, जबकि गुजरात सरकार 2001 के भूमि अधिग्रहण कानून के महज 281 करोड़ का मुआवजा देने की बात कर रही थी l
भोपाल | नर्मदा जल विवाद को लेकर प्रधानमंत्री की पहल पर गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल संसाधन मंत्री सी आर पाटिल की मौजूदगी में मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों की बैठक में गुजरात को लाभ पहुंचाने के लिए न केवल प्रदेश के हितों की अनदेखी की है बल्कि विस्थापितों के ज़ख्मों पर नमक भी छिड़का है l ऐसे लगता है जैसे गृहमंत्री की मौजूदगी में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री की बांह मरोड़कर यह समझौता करवाया गया हो |



मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने उक्त बयान जारी करते हुए कहा है कि नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बाँध के निर्माण में सबसे अधिक जमीन, जंगल और गांव डूब से प्रभावित हुए हैं l पहले यह आंकलन 178 गांवों सहित 37533 हेक्टर भूमि डूब में आने का था किन्तु बाद में बाँध की ऊंचाई 58 मीटर करने से मध्यप्रदेश के 192 गांव जलमग्न हो गए और 5000 हेक्टर और भूमि डूब क्षेत्र में आने से 42533 हेक्टर भूमि डूब क्षेत्र मे आ गयी थी l मध्यप्रदेश सरकार ने 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत 7669.86 करोड़ रुपए का मुआवजा गुजरात सरकार से माँगा था, जबकि गुजरात सरकार 2001 के भूमि अधिग्रहण कानून के महज 281 करोड़ का मुआवजा देने की बात कर रही थी l

माकपा नेता ने कहा है कि गृहमंत्री की धौंस के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने न केवल मुआवजे के 7669.86 करोड़ रुपए के दावे को छोड़ दिया है, उल्टा बाँध के निर्माण के 550 करोड़ रुपए गुजरात सरकार को देना स्वीकार किया है l ऐसे लगता है जैसे जबरा आपकी भैंस भी खोल कर ले जाए और लाठी से आपका बाजू भी तोड़ जाए l मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री इस वार्ता में इतने दबाव में थे कि गुजरात सरकार द्वारा दिए जाने वाले 281 करोड़ रुपए के मुआवजे को भी छोड दिया है I

जसविंदर सिंह ने कहा है कि मध्यप्रदेश में 30 प्रतिशत से अधिक विस्थापितों का पुनर्वास नहीं हुआ है l 2017 के पैकेज को अभी तक लागू नहीं किया गया है l महिला खातेदारों को मुआवजा नहीं मिला है l इतना ही नहीं विस्थापित व्यक्तियों के अवयस्क बेटों को भी मुआवजा नहीं दिया गया है l जब राज्य सरकार के पास विस्थापितों के पुनर्वास के लिए पैसा नहीं है, तब गुजरात को 550 करोड़ देना और गुजरात सरकार की पुरानी पेशकश के तहत 281 करोड़ मुआवजा छोड़ना पुनर्वास की राह देख रहे विस्थापितों के जख्मों पर नमक छिड़कना है l

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने भाजपा सरकार के इस समर्पण की निंदा करते हुए कहा है कि राज्य सरकार को या तो गुजरात से या केंद्र सरकार से मुआवजा लेकर विस्थापितों के पुनर्वास की तुरंत व्यवस्था करना चाहिए l