- रक्षाबंधन पर ‘वोकल फॉर लोकल’ को मिला व्यापक जनसमर्थन, भारतीय उत्पादों ने देशभर के बाजारों में बनाई मजबूत पहचान
- राखी के कारोबार में ₹25,000 करोड़ तथा उपहार, मिठाई, परिधान, आभूषण एवं इलेक्ट्रॉनिक्स पर अतिरिक्त ₹5,000 करोड़ का व्यय
दिल्ली। भारत केवल उत्सवों और त्योहारों का देश नहीं है, बल्कि एक ऐसी जीवंत सांस्कृतिक एवं आर्थिक व्यवस्था का केंद्र है, जहाँ प्रत्येक त्योहार सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों को भी नई ऊर्जा प्रदान करता है। वर्ष भर मनाए जाने वाले विभिन्न त्योहार वास्तव में “सनातन अर्थव्यवस्था” के सशक्त स्वरूप का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो करोड़ों लोगों के लिए रोजगार, व्यापार एवं आजीविका के अवसर सृजित कर देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करते हैं। यह बात कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी. भरतिया ने कही।
कैट के राष्ट्रीय महामंत्री एवं चांदनी चौक से सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि भारत की सनातन परंपराओं से जुड़े त्योहार केवल धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे किसानों, कारीगरों, शिल्पकारों, लघु उद्योगों, महिला उद्यमियों, परिवहन क्षेत्र, सेवा क्षेत्र, थोक एवं खुदरा व्यापारियों सहित एक विशाल आर्थिक श्रृंखला को सक्रिय करते हैं। दीपावली, होली, नवरात्र, गणेश उत्सव, दुर्गा पूजा, ईद, क्रिसमस, छठ पूजा और रक्षाबंधन जैसे पर्व प्रतिवर्ष विशाल आर्थिक गतिविधियों को जन्म देते हैं और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान करते हैं।
कैट के राष्ट्रीय चेयरमैन बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि रक्षाबंधन भारत के सबसे महत्वपूर्ण और व्यापक रूप से मनाए जाने वाले त्योहारों में से एक है, जो भाई-बहन के पवित्र संबंध, पारिवारिक मूल्यों, सामाजिक समरसता और भारतीय संस्कृति की समृद्ध विरासत का प्रतीक है। यह पर्व केवल भावनाओं और रिश्तों का उत्सव नहीं है, बल्कि देश के व्यापार, उद्योग और सेवा क्षेत्रों के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक अवसर के रूप में भी स्थापित हुआ है।
कैट के एक आकलन के अनुसार, इस वर्ष रक्षाबंधन के अवसर पर देशभर में लगभग ₹30,000 करोड़ की आर्थिक गतिविधियाँ हुईं। इसमें अनुमानित ₹25,000 करोड़ का राखी कारोबार शामिल है, जबकि लगभग ₹5,000 करोड़ की अतिरिक्त खरीदारी मिठाइयों, ड्राई फ्रूट्स, परिधानों, फैशन एक्सेसरीज़, एफएमसीजी गिफ्ट पैक्स, आभूषणों, इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों तथा अन्य उपहार वस्तुओं पर हुई।
व्यापारिक नेताओं ने बताया कि महानगरों से लेकर छोटे शहरों, अर्ध-शहरी क्षेत्रों और ग्रामीण बाजारों तक इस वर्ष अभूतपूर्व खरीदारी का माहौल और उपभोक्ताओं की भारी भीड़ देखने को मिली। यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि भारतीय त्योहार केवल सामाजिक उत्सव नहीं हैं, बल्कि देश की उपभोग आधारित अर्थव्यवस्था को गति देने वाले महत्वपूर्ण कारक भी हैं।
खंडेलवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को इस वर्ष रक्षाबंधन पर व्यापक जनसमर्थन प्राप्त हुआ। देशभर के उपभोक्ताओं ने स्वदेशी एवं स्थानीय स्तर पर निर्मित उत्पादों को प्राथमिकता दी। हस्तनिर्मित राखियों, पारंपरिक उपहारों, स्थानीय कारीगरों द्वारा निर्मित वस्तुओं, महिला स्वयं सहायता समूहों तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के उत्पादों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। इससे लाखों परिवारों के लिए आय और रोजगार के अवसर उत्पन्न हुए।
बाजार के अनुमान के अनुसार, अतिरिक्त ₹5,000 करोड़ के उत्सवीय व्यय में लगभग 25 प्रतिशत राशि मिठाइयों एवं ड्राई फ्रूट्स पर, 20 प्रतिशत परिधान एवं फैशन एक्सेसरीज़ पर, 20 प्रतिशत एफएमसीजी गिफ्ट पैक्स पर, 15 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों पर, 10 प्रतिशत सोने-चांदी एवं आभूषणों पर तथा शेष 10 प्रतिशत अन्य उपहार वस्तुओं पर खर्च की गई।
भरतिया ने कहा कि भारत की ‘सनातन अर्थव्यवस्था’ की नींव समाज, संस्कृति और व्यापार के गहरे परस्पर संबंधों पर आधारित है। भारतीय त्योहार इस संबंध को और मजबूत करते हैं तथा आर्थिक समृद्धि को समाज के विभिन्न वर्गों, विशेषकर जमीनी स्तर तक पहुँचाने का कार्य करते हैं। यही कारण है कि भारत की उत्सव परंपराएँ केवल सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि राष्ट्र निर्माण और आर्थिक विकास की एक महत्वपूर्ण शक्ति भी हैं।
अग्रवाल ने कहा, “रक्षाबंधन आस्था, स्नेह, सामाजिक समरसता और आर्थिक समृद्धि का अद्भुत संगम है। यह पर्व भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को सुदृढ़ करने के साथ-साथ स्थानीय व्यापार को सशक्त बनाता है, उद्यमिता को प्रोत्साहित करता है, रोजगार सृजित करता है और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को आगे बढ़ाता है। इस वर्ष देशभर के बाजारों में दिखाई दी अभूतपूर्व रौनक इस बात का प्रमाण है कि भारतीय उपभोक्ता स्वदेशी उत्पादों को तेजी से अपना रहे हैं और ‘विकसित भारत’ के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं।”