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कानपुर में क्राफ्ट रूट्स एग्जिबिशन का शुभारंभ

  • हेडलाइन: कानपुर में देशभर के 87 शिल्पकारों का संगम, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने क्राफ्ट रूट्स एग्जिबिशन का किया उद्घाटन
कानपुर नगर (वेद गुप्ता)।  कानपुर में पारंपरिक भारतीय शिल्प, हथकरघा और हस्तनिर्मित उत्पादों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से क्राफ्ट रूट्स एग्जिबिशन का आगाज हो गया है। चुन्नीगंज स्थित कन्वेंशन सेंटर में 23 से 27 अक्टूबर तक आयोजित होने वाली इस प्रदर्शनी का शुभारंभ उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने दीप प्रज्वलित कर किया। प्रदर्शनी में देशभर के 87 कारीगर अपने अनूठे उत्पादों के साथ शामिल हुए हैं। यहां पारंपरिक कला, आधुनिक डिजाइन और प्राकृतिक रंगों से तैयार उत्पादों की आकर्षक झलक देखने को मिल रही है।


कानपुर के चुन्नीगंज स्थित कन्वेंशन सेंटर में सजी क्राफ्ट रूट्स एग्जिबिशन भारतीय हस्तशिल्प और पारंपरिक कारीगरी को एक नया मंच दे रही है। 23 से 27 अक्टूबर तक चलने वाली इस प्रदर्शनी का उद्घाटन उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने दीप प्रज्वलित कर किया।



इस आयोजन में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए 87 कारीगर हिस्सा ले रहे हैं। प्रदर्शनी में हथकरघा, टेक्सटाइल, हस्तनिर्मित ज्वेलरी और प्राकृतिक रंगों से तैयार उत्पादों को प्रदर्शित किया गया है। मिट्टी, धातु और हाथों से बनाई गई ज्वेलरी के अनूठे संग्रह लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं।



क्राफ्ट रूट्स एग्जिबिशन का उद्देश्य केवल पारंपरिक उत्पादों का प्रदर्शन करना ही नहीं, बल्कि देश की समृद्ध शिल्प परंपरा को संरक्षित करना और उसे आधुनिक बाजार से जोड़ना भी है।

प्रदर्शनी के माध्यम से कारीगरों को अपने उत्पादों और हुनर को व्यापक पहचान दिलाने का अवसर मिल रहा है। पारंपरिक कला को नए डिजाइन और बाजार की मांग के अनुरूप आगे बढ़ाने की दिशा में भी यह आयोजन महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इस कार्यक्रम में शिक्षा, तकनीकी संस्थानों और प्रशासन से जुड़े कई प्रमुख लोग भी मौजूद रहे। इनमें विश्वविद्यालय के कुलपति, चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय यानी सीएसए, एचबीटीयू, आईआईटी के निदेशक, राष्ट्रीय शर्करा संस्थान यानी एनएसआई के निदेशक सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी शामिल हुए।


कुल मिलाकर, क्राफ्ट रूट्स एग्जिबिशन के जरिए कानपुर में देश की पारंपरिक हस्तशिल्प कला, स्थानीय कारीगरी और आधुनिक बाजार के बीच एक मजबूत सेतु बनाने की पहल की गई है।

पांच दिनों तक चलने वाली यह प्रदर्शनी 27 अक्टूबर तक जारी रहेगी। अब देखना होगा कि इस मंच के जरिए पारंपरिक शिल्प को बाजार में कितनी नई पहचान मिलती है और देशभर से आए कारीगरों को अपने हुनर के विस्तार के कितने अवसर हासिल होते हैं।