रामू टेकाम ने कहा कि प्रभावित परिवार अपने अधिकारों और उचित मुआवजे की मांग को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। यह बेहद चिंताजनक है कि जिन परिवारों के जीवन, जमीन और आजीविका पर परियोजना का प्रभाव पड़ा है, उन्हें अपनी जायज मांगों के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को नियमानुसार उचित मुआवजा, न्यायपूर्ण पुनर्वास और उनके अधिकारों का संरक्षण मिलना चाहिए। सरकार एवं प्रशासन को पीड़ित परिवारों की समस्याओं का तत्काल संज्ञान लेकर उनके निराकरण के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
रामू टेकाम ने स्पष्ट किया कि मध्यप्रदेश आदिवासी कांग्रेस पीड़ित परिवारों की जायज मांगों के समर्थन में मजबूती से खड़ी है। जब तक प्रभावित परिवारों की समस्याओं का उचित समाधान नहीं होता, तब तक उनके अधिकारों की आवाज उठाई जाती रहेगी। आदिवासी कांग्रेस इस संघर्ष में पीड़ित परिवारों के साथ है और उन्हें न्याय दिलाने के लिए लोकतांत्रिक तरीके से हरसंभव प्रयास करेगी।
उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं के नाम पर आदिवासी एवं किसान परिवारों के अधिकारों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। विकास तभी सार्थक है, जब प्रभावित लोगों को न्याय मिले, उनके नुकसान की उचित भरपाई हो और उनका भविष्य सुरक्षित रहे।
रामू टेकाम ने सरकार और प्रशासन से मांग की कि चिता आंदोलन से जुड़े मुद्दों पर तत्काल संवाद स्थापित कर प्रभावित परिवारों की जायज मांगों का समयबद्ध निराकरण किया जाए तथा मुआवजे और पुनर्वास से संबंधित शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन ने आंदोलन कर रही बहन दिव्या अहिरवार पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 307 के तहत कथित फर्जी एफआईआर दर्ज कर उन्हें जेल भेजा है, जो अमानवीय और शर्मनाक है। उन्होंने आंदोलनकारी अमित भटनागर के संघर्ष को भी सलाम किया।
रामू टेकाम ने दोहराया कि आदिवासी कांग्रेस पीड़ित परिवारों के अधिकार, सम्मान और न्याय की लड़ाई में उनके साथ खड़ी रहेगी।
इस दौरान श्रीमती अर्चना पोर्ते, ऑल इंडिया आदिवासी कांग्रेस प्रभारी एवं मध्यप्रदेश आदिवासी कांग्रेस प्रभारी, ने पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने और उनके संघर्ष में साथ देने का आश्वासन दिया।
