- बच्चों एवं स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की सामूहिक मार्केटिंग के लिए जनपद में बाजार विकसित करने की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश
जिलाधिकारी ने कहा कि बच्चों में अपार रचनात्मक क्षमता और नवाचार की भावना है। आवश्यकता इस बात की है कि उनकी प्रतिभा को उचित मार्गदर्शन, संसाधन और अवसर उपलब्ध कराए जाएं, जिससे वे अपने विचारों को उपयोगी उत्पादों में परिवर्तित कर सकें। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी में बच्चों द्वारा तैयार किए गए उत्पाद उनकी उद्यमशीलता और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक सराहनीय पहल हैं। कई बच्चे अपने उत्पादों की बिक्री के माध्यम से पॉकेट मनी भी अर्जित कर रहे हैं, जो उनके आत्मविश्वास और व्यावहारिक कौशल को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे एवं स्वयं सहायता समूह के लिए व्यक्तिगत रूप से ब्रांडिंग और मार्केटिंग की व्यवस्था करना आर्थिक एवं व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। इसे ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी को निर्देशित किया कि जनपद के स्वयं सहायता समूहों तथा नवाचार के माध्यम से उत्पाद तैयार करने वाले बच्चों के उत्पादों की सामूहिक मार्केटिंग के लिए एक प्रभावी व्यवस्था विकसित की जाए। इसके अंतर्गत जनपद में एक ऐसा बाजार विकसित करने की दिशा में कार्ययोजना तैयार की जाए, जहां इन उत्पादों को उचित मंच और व्यापक बाजार उपलब्ध हो सके।
एकीकृत कृषि प्रणाली के मॉडल को जनपद के एक ब्लॉक में लागू कराने के निर्देश
प्रदर्शनी के अवलोकन के दौरान जिलाधिकारी ने कानपुर विद्या मंदिर के बच्चों द्वारा प्रस्तुत एकीकृत कृषि प्रणाली के मॉडल का विशेष रूप से अवलोकन किया। इस मॉडल में फसल उत्पादन, तालाब आधारित मत्स्य पालन, कुक्कुट पालन, बागवानी एवं वर्षा जल संचयन जैसे विभिन्न घटकों को एक साथ जोड़कर कृषि संसाधनों के बेहतर उपयोग, उत्पादन लागत में कमी तथा किसानों की आय बढ़ाने की संभावनाओं को प्रदर्शित किया गया।
जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी श्री अभिनव जे. जैन को निर्देशित किया कि इस एकीकृत कृषि प्रणाली को जनपद के किसी एक ब्लॉक में प्रारंभ कराने के लिए कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि इस मॉडल के माध्यम से विभिन्न कृषि गतिविधियों को एकीकृत कर उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग किया जा सकता है। इससे किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध कराने, रोजगार सृजन को बढ़ावा देने तथा कृषि को अधिक लाभकारी बनाने में मदद मिल सकती है।
जिलाधिकारी ने कहा कि बच्चों द्वारा तैयार किए गए ऐसे मॉडल केवल शैक्षिक गतिविधियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनमें समाज और कृषि क्षेत्र की व्यावहारिक समस्याओं के समाधान की भी व्यापक संभावनाएं हैं। इन नवाचारों को प्रोत्साहन एवं उचित अवसर प्रदान कर उपयोगी परियोजनाओं के रूप में विकसित किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि बच्चों की रचनात्मकता को बाजार, मार्गदर्शन और आवश्यक संसाधनों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। इससे उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण, व्यावहारिक ज्ञान एवं उद्यमशीलता का विकास होगा और वे भविष्य में आत्मनिर्भर बनने के साथ समाज एवं प्रदेश के विकास में भी योगदान दे सकेंगे।
बच्चों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी बच्चों को पुरस्कार दिया गया
1. कविता गुप्ता-त्योहारों की सजावट
2. फलक़-हस्तशिल्प-दुपट्टे एवं कॉस्मेटिक सामग्री
3. गौरी तिवारी- हस्तनिर्मित वस्तुएँ
4. आवनी --फूलों के गमले
5. नूर फातमा--महिला ग्रामोद्योग
6. रिया, प्रो. किरण मिश्रा। --खाद्य पदार्थ एवं हस्तशिल्प
7. तस्मिया अंसारी---कपड़े एवं वस्त्र सामग्री
8. इकरा फातिमा--कपड़े एवं वस्त्र सामग्री




