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ग्वालियर और मुरैना की 9 फर्मों पर एक साथ डाला छापा

ग्वालियर 
 सेंट्रल जीएसटी एंड एक्साइज विभाग की 9 अलग-अलग टीमों ने मंगलवार को ग्वालियर और मुरैना में आयरन स्टील कारोबारी की 9 फर्मों पर एक साथ छापा डाला। कार्रवाई दो से तीन दिन तक चलने की संभावना है। इसके तार इंदौर में आयरन स्टील कारोबार के 1100 करोड़ रुपए के जीएसटी घोटाले से जुड़े होने की संभावना है। जिन फर्म संचालकों के यहां छापा डाला गया है उनमें नया बाजार की मैसर्स एडी स्टील एंड स्क्रैप सप्लायर्स के संचालक अमित गुप्ता, डबरा के नीखरा आयरन स्टाेर के संचालक विनोद नीखरा सहित 7 अन्य शामिल हैं।

सूत्रों का कहना है कि प्राथमिक तौर पर ग्वालियर और मुरैना की ये फर्में भी घोटाले में शामिल हो सकती हैं।  विभाग को फर्मों द्वारा बड़ी मात्रा में फर्जी तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट लिए जाने की आशंका है।  बोगस बिलिंग और ई-वे बिल की कर रहे जांच: जिन फर्म संचालकों के यहां छापा डाला गया है उनमें नया बाजार की मैसर्स एडी स्टील एंड स्क्रैप सप्लायर्स के संचालक अमित गुप्ता सहित आठ अन्य शामिल हैं। मैसर्स एडी स्टील एंड स्क्रैप के यहां सेंट्रल जीएसटी एंड एक्साइज की टीम में शामिल चार अधिकारी और दो पुलिस कर्मचारी सुबह 11 बजे पहुंच गए थे। अधिकारी फर्म द्वारा की गई बोगस बिलिंग और ई-वे बिल की जांच कर रहे हैं। 

कागजों पर खरीदी-बिक्री मगर रिटर्न नहीं भर रहीं थीं फर्म:  सेंट्रल जीएसटी एंड एक्साइज विभाग के सिस्टम एनालिस्ट द्वारा लगातार फर्मों के कारोबार, रिटर्न को देखा जाता है। इसमें सामने आया कि मौजूदा फर्म, फर्जी फर्म से माल की खरीद-बिक्री दिखा रही हैं। इनपुट टैक्स क्रेडिट का क्लेम भी कर रही हैं।    

फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट को इस तरह समझें  : मानकर चलिए रायपुर की एक फर्म ‘ए’ है। ग्वालियर की फर्म ‘बी’। बी ने रायपुर की ए फर्म से 50 लाख रुपए का आयरन स्टील खरीदा। 18 फीसदी जीएसटी के हिसाब से 50 लाख रुपए के माल  पर 9 लाख रुपए का टैक्स बना। बी फर्म ने ए को 59 लाख रुपए का भुगतान कर दिया।

अब बी फर्म  50 लाख पर 5 फीसदी का लाभ जोड़कर बेचती है। तो कीमत 52 लाख 50 हजार हो गई। यहां बी को हुए 2 लाख, 50 हजार रुपए के मुनाफे पर ही 18 फीसदी जीएसटी यानी 45 हजार रुपए टैक्स देना पड़ेगा क्योंकि 50 लाख रुपए पर वह पूर्व में जीएसटी का भुगतान कर चुका है, जिसकी उसे आईटीसी मिलेगी। यहां हो यह रहा है कि कारोबारी फर्जी फर्म से खरीदारी दिखाकर 9 लाख रुपए अपनी जेब में डाल रहे हैं और सरकार को जीएसटी के नाम पर सिर्फ 45 हजार रुपए टैक्स दे रहे हैं। इसकी ही जांच विभाग द्वारा की जा रही है।  

ग्वालियर प्रभाग एक और दो में कार्रवाई जारी है। अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगा। कार्रवाई पूरी होने पर विस्तृत ब्योरा उपलब्ध करवाया जाएगा।
वैशाली लांजेवर, एडीशनल कमिश्नर सेंट्रल जीएसटी एंड एक्साइज मुख्यालय भोपाल
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