नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव का आगाज हो गया है, लेकिन चुनाव आयोग के पास आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों के अखबार में इश्तेहार प्रकाशन संबंधी जानकारी नहीं है। वह भी तब, जब सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2018 में आदेश दिया था कि दागी उम्मीदवारों को नामांकन से मतदान के दो दिन पहले तक तीन अखबारों में अपना आपराधिक ब्यौरा प्रकाशित करवाना होगा। इसके अलावा जिन दलों ने ऐसे लोगों को टिकट दिया है उस दल को भी तीन अखबारों में ऐसा ही इश्तेहार देना होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने तीन बार अखबारों में आपराधिक रिकार्ड के ब्यौरा प्रकाशित करने का दिया था आदेश
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आयोग ने सभी सियासी दलों को एडवायजरी जारी करते कहा था कि उम्मीदवार और दल इश्तेहार की प्रति जिला चुनाव अधिकारी के दफ्तर में जमा कराएं। लेकिन किसी जिले से ऐसा कोई ब्यौरा चुनाव आयोग मुख्यालय को नहीं भेजा गया है। इससे पहले बीते दिसंबर में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, मिजोरम, तेलंगाना विधानसभा चुनावों में भी आपराधिक पृष्ठभूमि वाले किसी भी उम्मीदवार के इश्तेहार की सूचना आयोग को नहीं दी गई थी। आयोग के एक पूर्व विधि सलाहकार ने बताया कि आयोग के पास कोर्ट के इस आदेश को पालन कराने का पूरा समय था। लेकिन ऐसा अबतक होता नहीं दिख रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने तीन बार अखबारों में आपराधिक रिकार्ड के ब्यौरा प्रकाशित करने का दिया था आदेश
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आयोग ने सभी सियासी दलों को एडवायजरी जारी करते कहा था कि उम्मीदवार और दल इश्तेहार की प्रति जिला चुनाव अधिकारी के दफ्तर में जमा कराएं। लेकिन किसी जिले से ऐसा कोई ब्यौरा चुनाव आयोग मुख्यालय को नहीं भेजा गया है। इससे पहले बीते दिसंबर में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, मिजोरम, तेलंगाना विधानसभा चुनावों में भी आपराधिक पृष्ठभूमि वाले किसी भी उम्मीदवार के इश्तेहार की सूचना आयोग को नहीं दी गई थी। आयोग के एक पूर्व विधि सलाहकार ने बताया कि आयोग के पास कोर्ट के इस आदेश को पालन कराने का पूरा समय था। लेकिन ऐसा अबतक होता नहीं दिख रहा है।