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तेज आंधी से एचटी लाइन में शार्टसर्किट होने से गिरी चिंगारियों से राख हो गई फसल

भोपाल। बेमौसम ओलो के साथ हुई बरसात ने बुंदेलखंड और महाकौशल अंचल में खेतों में खड़ी गेहूं की फसल और मंडियों में बिकने के बाद लगे गेहूूं के ढेÞरों को बर्बाद कर दिया है। इसी के साथ बिकने वाले गेहूं के परिवहन से पहले मंडियों में ढेÞर लगाए गए थे, वह भी भीगने से खराब हो गए हैं। वहीं तेज आंधी के कारण हाई टेंशन लाइन में शार्ट सर्किट होने से गिरी चिंगारियों के कारण भी सैकड़ों एकड़ में फसलें स्वाहा हो गई।  

मंडियों में खुले में पड़ा है हजारों क्विंटल गेहूं भी भीगा तो ओलों से गेहूं की तैयार खड़ी फसल भी हो गई चौपट                                                                                         गौरतलब होगा कि गुरुवार रात तेज आंधी के साथ ओले गिरे। बाद में छिटपुट बरसात भी हुई, जिससे खेतों में कटने को तैयार खड़ी फसलें चौपट हो गर्इं। आलम यह है कि ओलों की मार से खेतों में गेहूं की फसल बिछ गई है, जिससे उसको अब खेत की मिट्टी में ही मिलाना पडेÞगा। इससे किसानों के चेहरे पर मुर्दनी छा गई है, क्योंकि गेहूं की फसल बेचने से होने वाली आय पर ही आधे साल का खर्चा चलता है। 

शार्टसर्किट से फसलें हो गई राख
जबलपुर के आसपास तेज आंधी के कारण हाई टेंशन लाइन आपस में टकराने लगी थी। इस कारण शार्ट सर्किट हो गया और चिंगारियों की बरसात सी होने लगी। इससे गेहूं की खड़ी फसल में आग लग गई। एक ओर सड़क होने और दूसरी ओर गांववालों की मिलीजुली मेहनत से आग ज्यादा नहीं फैल सकी। हालांकि आग के कारण खेतों में अब सिर्फ काली राख ही उड़ रही है। 

तन्खा पहुंचे किसानों के बीच
जबलपुर से कांग्रेस पार्टी के सांसद प्रत्याशी विवेक कृष्ण तन्खा और किसान दुर्गेश पटेल आदि को साथ लेकर शुक्रवार को ओलों और आग लगने बर्बाद हुई गेहूं की फसलों को देखने पहुंचे और किसानो से सीधे बात की। तन्खा ने बाद में कहा कि ओलों और बेमौसम बारिश के साथ ही आग से गेहूं की खड़ी फसल बर्बाद हो गई है। ऐसे में जल्द से जल्द सर्वे आदि की प्रक्रिया पूरी होकर किसानों को मुआवजा मिलना चाहिए। 

यहां हुई हैं फसलें बर्बाद

जबलपुर के सरोद, भरतरी, उड़ना, सहसन, पड़रिया, नूनसर, माझनगवां, कैथर, करारी, सिमरिया जैसे सैकड़ों गावों में गेहूं की फसल बर्बाद हो गई है या जल गई है। कटनी और स्लीमनाबाद के पास दो दर्जन गांवों, दतिया, थरेट, सोलन के दर्जनभर गांवों के साथ ही छिंदवाड़ा और सागर के ग्रामीण इलाके शामिल हैं। यहां फसलें बर्बाद होने के अलावा मंडियों में रखा गेहूं पानी में भीगने से खराब हो गया।   

             
किसानों को मुआवजा दिया जाए और कर्ज माफ किया जाए

महाकौशल के युवा किसान दुर्गेश पटेल ने किसानों की बर्बाद फसलों को देखने के बाद कहा है कि किसानों को तत्काल प्रति एकड़ 5 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए। साथ ही खाद, बीज और सिंचाई के लिए सहकारी समितियों से लिया गया कर्जा भी माफ किया जाए।