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आदिवासी संस्कृति को संरक्षण और प्रोत्साहन देने की आवश्यकता


भोपाल। राज्यपाल श्री लालजी टंडन ने भोपाल हाट में आदि महोत्सव का शुभारंभ करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति के संवाहक आदिवासी समाज की संस्कृति, कला-कौशल और ज्ञान को संरक्षण तथा प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने के लिये जमीनी प्रयास जरूरी हैं। इसमें समाज की सक्रिय भागीदारी होनी चाहिए। राज्यपाल ने आदिवासी समाज के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए देश की सुरक्षा में उनकी कुर्बानियों को वंदनीय बताया।

जन-जातीय कार्य मंत्री श्री ओमकार सिंह मरकाम ने शुभारंभ कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि आदिवासी समाज का प्रकृति और कृषि से गहरा रिश्ता है। यह समाज इनका सम्मान और संरक्षण करता है। आदिवासी समाज में फसल की बोनी के पहले बीज-पूजन किये जाने जैसी सांस्कृतिक परम्पराएँ हैं। श्री मरकाम ने कहा कि आदिवासी समाज के पास बहुमूल्य औषधियों और जड़ी-बूटियों को पहचानने की अद्भुत क्षमता है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा आदिवासी खाद्यान्न, कला-कौशल, संस्कृति और ज्ञान को संरक्षित करने की दिशा में प्रयास शुरू कर दिये गए हैं।

समापन समारोह में लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष श्री वीरेन्द्र गिरि, ट्राईफेड, नई दिल्ली के चेयरमेन श्री आर.सी. मीना, क्षेत्रीय प्रबंधक श्री जे.एस. शेखावत और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।