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विश्व आदिवासी दिवस पर जुटे हजारो आदिवासी, वारिश के बाबजूत भी 6 घंटे तक चला कार्यक्रम

पाषाण कालीन शैलचित्रों को विश्व धरोहर घोषित कराने, जंगल को बचाने की ली शपथ

आज होगा शैलचित्रों को विश्व धरोहर घोषित कराने व बकस्वाहा और केन बेतवा लिंक प्रभावित जंगल को बचाने हेतु एक दिवसीय उपवास

बिजवार, छतरपुर।  विश्व आदिवासी दिवस व अगस्त क्रंति के उपलक्ष्य में बिजावर के हथनी टोर पर आयोजित दो दिवसीय आदिवासी लोकत्सव व प्रकृति चिंतन के पहले दिवस आदिवासी लोकोत्सव में लगभग दो सैकड़ा से ज्यादा गांव से हजारों आदिवासी समाज व देश के कई राज्यों के पर्यावरणविद सहभागी हुए। सभी ने एक जुट होकर बकस्वाहा और केन बेतवा लिंक प्रभावित जंगल सहित अपने जंगलों को बचाने व छतरपुर जिले में उपस्थित पाषाणकालीन शैलचित्रों को विश्व धरोहर घोषित करने की मांग उठाई। कार्यक्रम के मार्गदर्शक अमित भटनागर, शरद कुमरे ने विरसा मुंडा, रानी दुर्गावती सहित आदिवासी नायकों के गौरवशाली इतिहास पर व्याख्यान देते हुए आदिवासी समाज को प्रकृति का रक्षक बताया। कर्यक्रम दोपहर 11 से शाम 6 तक चला जिस दौरान लगातार वर्षा होती रही पर बिना किसी टेंट व छाव के भी आदिवासी समाज व पर्यावरण प्रेमी भीगते हुए भी लगातार 6 घण्टे तक कार्यक्रम में सहभागिता करते रहे जिसकी कार्यक्रम के अतिथि दिल्ली से आये अंतर्राष्टीय वेट लिफ्टिंग खिलाड़ी बलजीत, महाराजा कॉलेज के प्रोफेसर एस.के. छारी, जे.पी. शाक्य, मिश्रा मेडम, एडवोकेट एम.एस. खरे बिहार के चन्दन यादव आदि ने प्रशंसा की तथा पर्यावरण को बचाने व बच्चों को पढ़ाने की बात कही। 

कार्यक्रम के दौरान शैलचित्रों की खोज व शोध कार्य के लिए प्रोफेसर एस.के. छारी, प्रोफेसर जेपी शाक्य, मिश्रा मेडम, एम.एस खरे, सोना आदिवासी आदि का विशेष सम्मान किया गया। कार्यक्रम के इंदौर की कुमारी बीनू बघेल, धार की सुनीता कलमे स्थानीय साक्षी आदिवासी, सपना आदिवासी, कमली आदिवासी आदि ने हमू काका बापा न पोरिया हमू आदिवासी रे आदि आदिवासी परंपरागत गीतों पर लोकनृत्य की प्रस्तुति की गई। कार्यक्रम के अंत में सभी लोगों ने साथ वन भोज किया। कर्यक्रम के दौरान कई बार बकस्वाहा व केन बेतवा प्रभाविबत जंगल को बचाने व शैलचित्रों के संरक्षण व उन्हें विश्व स्मारक विश्व धरोहर घोषित किए जाने के जोरदार नारे भी लगाए गए।

कार्यक्रम के आयोजक बहादुर आदिवासी कुपिया, भगवानदास आदिवासी नरौली, खरगा आदिवासी सुराई, भागगवत आदिवासी कर्री, किसन दयाल आदिवासी, तुलसी आदिवासी आदि ने कार्यक्रम में बड़ी मात्रा आदिवासी के सहभागी होने पर सबका आभार व्यक्त किया। 

भगतराम तिवारी और देवीदीन कुशवाहा ने बताया कि आयोजन के दूसरे दिन आज 10 अगस्त को शैलचित्रों के तत्काल संरक्षण व विश्व धरोहर घोषित कराने व बकस्वाहा और केन बेतवा लिंक प्रभावित जंगल को बचाने हेतु एक दिवसीय उपवास किया जाएगा, साथ प्रकृति पूरक जीवनशैली, वनोपज आधारित रोजगार,  प्रकृति के विनाश को रोकने की आगामी रणनीति व संगठन बनाने पर चर्चा होगी। जिसमें आदिवासी समाज के साथ देश के कई राज्यो के पर्यावरण प्रेमी करेंगे शिरकत।