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खाद न मिलने से किसानों का फूटा गुस्सा, एसएडीओ के साथ झूमाझटकी, पुलिस ने गाड़ी में बिठाकर बचाया

अशोकनगर। किसानों को खाद वितरण कराने के मामले में प्रशासन पूरी तरह से नाकाम साबित हुआ है। कई दिनों से लाइन में लगने के बाद भी किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है। प्रशासन का दावा था कि सोमवार से सभी किसानों को खाद उपलब्ध कराई जाएगी लेकिन सोमवार को खाद को लेकर बवाल हो गया और नाराज किसानों ने कृषि विभाग के एसएडीओ मुकेश रघुवंशी के साथ झूमाझटकी कर दी। मौके पर मौजूद पुलिस ने बड़ी मुश्किल से जैसे-तैसे रघुवंशी को बचाया और पुलिस की गाड़ी में बिठाकर वहां से निकाल दिया। इस दौरान किसानों ने जमकर नारेबाजी और हंगामा किया। कुछ किसान तो आक्रोश में यह कहते नजर आए कि हमारी आत्मा को तड़पाने वाले अधिकारियों को कोरोना हो या डेंगू से मरें। 

पिछले कई दिनों से लगातार किसान खाद न मिलने के चलते चक्काजाम और प्रदर्शन कर रहे हैं। रविवार को भी जिला मुख्यालय पर किसानों ने नए बस स्टेण्ड के पास चक्काजाम किया था। तब अधिकारियों ने सोमवार से सभी किसानों को खाद उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था। सोमवार को गोदाम पर सुबह 4 बजे से ही किसानों ने लाइनें लगा ली थीं लेकिन कतार में लगे किसानों को जैसे ही पता चला कि डीएपी उपलब्ध नहीं है और उन्हें सुपर एवं यूरिया लेने को कहा जा रहा है तो किसान आक्रोशित हो गए और मौके पर मौजूद एसएडीओ मुकेश रघुवंशी से किसानों ने डीएपी उपलब्ध कराने की बात की। जिसके बाद तकरार बढ़ गई और बात झूमाझटकी और हाथापाई तक पहुंच गई। बाद में पुलिस अधिकारियों ने एसएडीओ को पुलिस की गाड़ी में बिठाया और वहां से रवाना कर दिया। हालांकि समाचार लिखे जाने तक एसएडीओ या प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई शिकायत पुलिस से नहीं की गई है। हालांकि एसएडीओ ने कहा कि मैं सौ परसेंट रिपोर्ट करूंगा। हालांकि मैं उनको नाम से नहीं जानता लेकिन यह पक्का है कि मैं मेरे साथ विवाद करने वाले लोगों को पहचान लूंगा।

किसानों ने बताई आपबीती-:

ग्राम सेजी से खाद लेने के लिए आए कृषक अनिल रघुवंशी ने बताया कि बोवनी के लिए खेत तैयार हो चुके हैं खाद की जरूरत है लेकिन खाद उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। गोदाम पर आते हैं तो सोसायटी पर जाने को कहते हैं। सोसायटी पर जाते हैं तो वहां भी खाद नहीं है। सोसायटी से गोदाम पर जाने को कहा जाता है। उन्होंने बताया कि मैं छह दिनों से लगातार खाद लेने के लिए आ रहा हूं लेकिन खाद नहीं मिल रही है। अधिकारी कभी सुपर और कभी यूरिया खाद बताते हैं जबकि हमें डीएपी और एनपीके चाहिए। परसों दुकान पर डीएपी खाद मिल रहा था लेकिन अधिकारियों ने दुकानों पर जाकर दुकानें बंद करा दीं जबकि ब्लॉक में ट्रालियों से खाद जा रही है और आज भी नंबर लगवाकर टोकन दे दिए हैं और आश्वासन दिया है हमें मालूम है यह आश्वासन झूठा है।

एसडीएम ने हंगामे के लिए किसानों को ठहराया जिम्मेदार-:

हंगामे की खबर सुनकर एसडीएम रवि मालवीय, तहसीलदार रोहित रघुवंशी आदि भी मौके पर पहुंचे, यहां पत्रकारों से चर्चा करते हुए एसडीएम ने प्रशासन की नाकामयाबी पर पर्दा डालते हुए किसानों को हंगामे का जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना था कि सुबह 5 बजे से किसानों ने लाइन लगा ली थी मैं भी साढ़े पांच बजे आया था। हमने किसानों की काउंटिंग कराई थी। करीब साढ़े तेरह सौ किसान थे। मैंने दो हजार टोकन क्रियेट कर रखे थे, 1400-1500 टोकन बांट दिए थे लेकिन कुछ लोगों की मांग थी कि हमें ज्यादा खाद चाहिए। खाद की उपलब्धता को देखते हुए हमने तय किया था कि एक किसान को तीन बोरी ही खाद दिया जाएगा कुछ को डबल भी किया है। अलग-अलग दुकानों पर भी खाद पहुंचाई गई थी और तय किया था कि किसानों को अलग-अलग दुकानों पर पहुंचाया जाएगा लेकिन किसान उन दुकानों पर न जाकर यहीं खड़े हुए हैं। मैंने खुद ने शहर में दुकानों पर जाकर देखा है। वहां पर मुश्किल से दस-बीस किसान पहुंचे हैं सभी किसान यहीं मौजूद हैं और यहां अनावश्यक परेशानी खड़ी कर रहे हैं। समस्या का निदान यह है कि जिसको जितना खाद चाहिए वह दुकानों पर जाए और वहां से खाद ले।