कथा श्रवण करने पूर्व कैबिनेट मंत्री ठाकुर रामपाल सिंह राजपूत भी पहुंचे
![]() |
| श्रीमद् भागवत कथा सुल्तानगंज |
बेगमगंज। संसार में मित्रता श्री कृष्ण और सुदामा की तरह होनी चाहिए।सच्चा मित्र वही है, जो अपने मित्र की परेशानी को समझे और बिना बताए ही मदद कर दे। परंतु आजकल स्वार्थ की मित्रता रह गई है। जब तक स्वार्थ सिद्ध नहीं होता है, तब तक मित्रता रहती है। जब स्वार्थ पूरा हो जाता है, मित्रता खत्म हो जाती है।
उक्त बात सुल्तानगंज में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में कथा वाचक पंडित विपिन बिहारी शास्त्री ने कही, उन्होंने कहा कि एक सुदामा अपनी पत्नी के कहने पर मित्र कृष्ण से मिलने द्वारकापुरी जाते हैं। जब वह महल के गेट पर पहुंच जाते हैं, तब प्रहरियों से कृष्ण को अपना मित्र बताते है और अंदर जाने की बात कहते हैं। सुदामा की यह बात सुनकर प्रहरी उपहास उड़ाते है और कहते है कि भगवान श्रीकृष्ण का मित्र एक दरिद्र व्यक्ति कैसे हो सकता है। प्रहरियों की बात सुनकर सुदामा अपने मित्र से बिना मिले ही लौटने लगते हैं। तभी एक प्रहरी महल के अंदर जाकर भगवान श्रीकृष्ण को बताता है कि महल के द्वार पर एक सुदामा नाम का दरिद्र व्यक्ति खड़ा है और अपने आप को आपका मित्र बता रहा है। द्वारपाल की बात सुनकर भगवान कृष्ण नंगे पांव ही दौड़े चले आते हैं और अपने मित्र को सुदामा को रोककर गले लगा लिया। शास्त्री जी ने श्रोताओं को भागवत को अपने जीवन में उतारने की अपील की। साथ ही सुदामा चरित्र के माध्यम से श्रोताओं को श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता की मिसाल पेश की और समाज को समानता का संदेश दिया। वहीं उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं से आवाहन किया की विशेष कर कन्याओं से कि वह धर्म का पालन करते हुए अपने मां-बाप की प्रतिष्ठा का ख्याल रखें पश्चिमी सभ्यता के पीछे ना भागें। आजकल देखने सुनने में आ रहा है की कन्याएं अपने माता-पिता की प्रतिष्ठा को धूमिल कर अपनी मनमर्जी से प्रेम विवाह कर रही हैं जो सही नहीं है पिता की मर्जी से ही वे शादी करें इस पर उन्होंने प्रसंग सुनाया कि जब कन्या माता पिता के घर से बिदा होती है तो कन्या माता से अपने पिता का ख्याल रखने का कह कर जाती है। उसे समय जो पीड़ा का अनुभव माता-पिता करते हैं और उनके दिल से जो आशीर्वाद निकलता है उससे दोनों कुल का कल्याण होता है जबकि अपनी मर्जी से प्रेम विवाह करने वाली कन्याएं पिता और कुल द्वारा जीवन में कमाई हुई पूरी प्रतिष्ठा को धूमिल करके चली जाती हैं जिससे वे किसी के सामने मुंह दिखाने लायक नहीं रहते। ऐसी कन्याएं बाद में किस परिस्थिति में पहुंचती हैं समाचारों के माध्यम से हम सभी जानते हैं। मैं माता-पिता से भी आवाहन करता हूं कि वह अपने कुल की कन्याओं को शिक्षा जरूर ग्रहण कारण लेकिन धार्मिक भी बनाएं उन्हें पश्चिमी सभ्यता से दूर रखें।
कथा के बीच-बीच में संगीतमय भजन सुनकर लोग भाव विभोर हो गए कथा में पूर्व कैबिनेट मंत्री ठाकुर रामपाल सिंह राजपूत पहुंचे और उन्होंने शास्त्री जी से आशीर्वाद लिया तथा उपस्थित जन को संबोधित करते हुए श्री हनुमान जी की तरह सेवा भाव अपनाने का आवाहन करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन क्षेत्र में होते रहना चाहिए ताकि क्षेत्र में सुख समृद्धि बनी रहे महात्माओं के चरण जिस धारा पर पड़ जाते हैं वहां कल्याण ही कल्याण होता है। और क्षेत्र में खुशहाली आती है।
कार्यक्रम के अंत में मुख्य यजमान लक्ष्मी साहू सहित उपस्थित जनों ने आंसदी की आरती उतारी और प्रसाद का वितरण किया। कार्यक्रम में भारी संख्या में महिला पुरुष शामिल हुए।

