Type Here to Get Search Results !

आने वाली पीढ़ियों के लिए मिट्टी बचाने की जद्दोजहद: वैज्ञानिकों को रणनीतिक अनुसंधान पर फोकस करने की जरुरत

  • भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान, भोपाल ने 39वां स्थापना दिवस मनाया
  • देशभर से आनलाइन वैज्ञानिकों, शोधार्थी, विशेषज्ञों ने की सहभागिता

भोपाल।
भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान, भोपाल ने 16 अप्रैल, 2026 को अपना 39वां स्थापना दिवस मनाया । संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. पी.एन. टक्कर मुख्य अतिथि रहे । डॉ. ए. वेल्मुरुगन (सहायक महानिदेशक, मृदा एवं जल प्रबंधन, आईसीएआर, नई दिल्ली) ने आनलाइन माध्यम से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई । इस अवसर पर संस्थान के पूर्व निदेशक डॉ. सी.एल. आचार्य, डॉ. ए.के. पात्रा तथा डॉ. प्रदीप डे (निदेशक, अटारी, कोलकता) ने भी आनलाइन माध्यम से विशेष अतिथि के रूप में कार्यक्रम में सहभागिता दी।




मृदा वैज्ञानिक रणनीति अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित करें

डॉ. टक्कर ने 39वें स्थापना दिवस समारोह में उपस्थित होकर प्रसन्नता व्यक्त की तथा संस्थान द्वारा लगभग चार दशकों में की गई प्रगति और उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने वैज्ञानिकों को मृदा विज्ञान से संबंधित इनोवेटिव (नवीन), नावेल (अभिनव) एवं रणनीतिक अनुसंधान कार्य जैसे पोषक तत्वों के रूपांतरण, सर्वोत्तम प्रबंधन पद्धतियों, उर्वरकों के न्यूनतम उपयोग, पोषक तत्व उपयोग दक्षता बढ़ाने आदि करने की सलाह दी।




कैपेस्टिी बिल्डिंग पर फोकस करने की जरुरत

डॉ. ए. वेल्मुरुगन ने संस्थान के विकास एवं प्रगति में पूर्व निदेशकों, वैज्ञानिकों तथा कर्मचारियों के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह संस्थान राष्ट्रीय स्तर का संस्थान है, इसलिए राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए अनुसंधान, विस्तार गतिविधियों तथा युवा वैज्ञानिकों के लिए कैपेसिटी बिल्डिंग (क्षमता निर्माण) पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि रासायनिक उर्वरकों के विकल्प जैसे जैव उर्वरक, एजोला, हरी खाद, तरल किण्वित जैविक खाद (लफवोम) आदि के विकास हेतु नई तकनीकों पर कार्य करें, ताकि उर्वरकों का उपयोग कम किया जा सके ।




भविष्य की पीढ़ियों के लिए मृदा स्वास्थ्य सरंक्षण का ध्येय

डॉ. मनोरंजन मोहंती (निदेशक, भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान, भोपाल) ने संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. पी.एन. टक्कर का स्वागत करते हुए उनके आज के गरिमामयी उपस्थित होने पर आभार व्यक्त किया । डॉ. मोहंती ने संस्थान के मिशन, मैनडेट (दायित्व), उद्देश्यों एवं अखिल भारतीय स्तर पर उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्थान सतत एवं जलवायु-सहनीय कृषि के लिए कार्य कर रहा है ताकि भविष्य की पीढ़ियों के लिए मृदा स्वास्थ्य का संरक्षण किया जा सके। उन्होंने उन्नत उपकरणों एवं तकनीकों के विकास से संबंधित संस्थान की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला, जिनमें मृदा स्पेक्ट्रा का निर्माण, ई-फार्म, जैव उर्वरक, मृदा जैविक कार्बन एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों के मानचित्र आदि शामिल हैं। उन्होंने यह भी बताया कि संस्थान द्वारा जनजातीय उपयोजना (टीएसपी), अनुसूचित जाति उपयोजना (यससीयसपी), फार्मर फर्स्ट (फार्मर फर्स्ट), संरक्षण कृषि परियोजना आदि विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों तक अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण किया जा रहा है । साथ ही, उन्होंने राष्ट्रीय प्राथमिकताओं एवं लक्ष्यों की पूर्ति हेतु संस्थान में विकसित नई प्रयोगशालाओं एवं इंफ्रास्ट्रक्चर (अवसंरचना) सुविधाओं की भी जानकारी दी ।




मृदा तकनीकों को लेकर एमओयू का आदान-प्रदान

इस अवसर पर प्रशासनिक, तकनीकी एवं सहायक स्टाफ में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारियों को पुरस्कार प्रदान किए गए । मृदा तकनीकी नवाचार केंद्र (यसटीआईयच) के अंतर्गत निजी इनक्यूबेटी तथा भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान, भोपाल के बीच समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का आदान-प्रदान भी किया गया । समारोह में गणमान्य अतिथियों द्वारा शोधकतार्ओं, वैज्ञानिकों, छात्रों एवं किसानों के लाभ हेतु संस्थान की महत्वपूर्ण प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया। इस समारोह का समन्वय डॉ. आर. एलनचेलियन (आयोजन सचिव) द्वारा किया गया। इस समारोह में संस्थान के वैज्ञानिकों, छात्रों एवं कर्मचारियों सहित लगभग 125 प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।