
यूनियन की प्रदेश संरक्षक व राष्ट्रीय सचिव चम्पा वर्मा के नेतृत्व में दिए गए ज्ञापन में आशा सहयोगिनियों की लंबित समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की गई है।
ज्ञापन में बताया गया कि प्रदेश में आशा सहयोगिनियों की संख्या लगभग 53 हजार से अधिक है, जो ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मातृ-शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, पोषण, सर्वे कार्य सहित अनेक जिम्मेदारियां निभा रही हैं। इसके बावजूद उन्हें नियमित वेतन, सामाजिक सुरक्षा और सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेशभर में आंदोलन तेज किया जाएगा।
अंत में आशा सहयोगिनियों ने कहा कि वे वर्षों से न्यूनतम मानदेय पर स्वास्थ्य सेवाओं का दायित्व निभा रही हैं, लेकिन अब उनके धैर्य की परीक्षा न ली जाए। सरकार को जल्द ठोस निर्णय लेकर न्याय करना चाहिए।
आशा सहयोगिनियों की ये हैं प्रमुख मांगें:
- आशा सहयोगिनियों को नियमित कर्मचारी घोषित किया जाए।
- महंगाई को देखते हुए न्यूनतम वेतन 26,000 रुपये प्रतिमाह निर्धारित किया जाए।
- ईपीएफ व पेंशन सुविधा लागू की जाए।
- कार्य के अनुरूप प्रोत्साहन राशि बढ़ाई जाए।
- स्वास्थ्य विभाग के अन्य कर्मचारियों की तरह सुविधाएं प्रदान की जाएं।
- आशा सॉफ्ट में दर्ज कार्यों के आधार पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
- मोबाइल रिचार्ज भत्ता 600 से बढ़ाकर 1000 रुपये किया जाए।
- आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में परिवार को सहायता राशि दी जाए।
- सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष की जाए।
- रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाए।
