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बिजली के अवैध उपयोग के आरोपियों को नेशनल लोक अदालत में प्रकरण सुलझाने के लिए प्रेरित करें: ऋषि गर्ग

  • मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक द्वारा अशोकनगर वृत्त की विद्युत आपूर्ति एवं विभागीय कार्यों की समीक्षा

अशोकनगर। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक ऋषि गर्ग ने अशोकनगर वृत्‍त में आयोजित समीक्षा बैठक में कहा कि बिजली के अवैध एवं अनधिकृत उपयोग के आरोपियों को नोटिस देकर आगामी 14 मार्च 2026 को लगने वाली लोक अदालत में लंबित प्रकरणों को सुलझाने के लिए प्रेरित करें।
श्री गर्ग ने बताया कि कंपनी द्वारा विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 135 के अंतर्गत विद्युत चोरी के लंबित प्रकरणों एवं विशेष न्यायालयों में विचाराधीन प्रकरणों के निराकरण के लिए विद्युत उपभोक्ताओं एवं उपयोगकर्ताओं से अपील की गई है कि वे अप्रिय कानूनी कार्यवाही से बचने के लिए अदालत में समझौता करें।



गौरतलब है कि नेशनल लोक अदालत में धारा 135 के अंतर्गत विद्युत चोरी के बनाए गए कंपनी में लंबित प्रकरण एवं अदालत में लंबित प्रकरणों का निराकरण के लिये निम्नदाब श्रेणी के समस्त घरेलू, समस्त कृषि, 5 किलोवॉट तक के गैर घरेलू एवं 10 अश्व शक्ति भार तक के औद्योगिक उपभोक्ताओं को प्रकरणों में ही छूट दी जाएगी। नेशनल लोक अदालत में छूट कुछ नियम एवं शर्तों के तहत दी जाएगी जो आकलित सिविल दायित्‍व राशि रू. 10,00,000 (दस लाख ) तक के प्रकरणों के लिए सीमित रहेगी। यह छूट मात्र नेशनल लोक अदालत 14 मार्च 2026 को समझौते करने के लिये ही लागू रहेगी।

प्रबंध संचालक ऋषि गर्ग अशोकनगर जिले की विद्युत आपूर्ति और विभागीय कार्यों को लेकर अशोकनगर वृत्त में आयोजित समीक्षा बैठक को सबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्‍य महाप्रबंधक (ग्‍वालियर क्षेत्र) विनोद कटारे, अशोकनगर वृत्त के महाप्रबंधक मधुसूदन कोरी, महाप्रबंधक (सूचना प्रौद्योगिकी) अभिषेक मार्तण्ड, महाप्रबंधक (स्काडा) रामेश्वर चतुर्वेदी, सभी उप महाप्रबंधक, प्रबंधक एवं जूनियर इंजीनियर मौजूद थे।
समीक्षा बैठक में प्रबंध संचालक ऋषि गर्ग ने समाधान योजना की समीक्षा करते हुए कहा कि फिलहाल समाधान योजना 2025-26 का दूसरा चरण जो कि 28 फरवरी तक चलेगा, इस अवधि में उपभोक्‍ता जागरूकता अभियान चलाकर पात्र हितग्राहियों को लाभ दिलाएं। चालू फरवरी माह एवं मार्च माह में सकल तकनीकी एवं वाणिज्यिक हानियों (एटीएण्डसी) को कम करने के लिए विक्रित यूनिट को बढ़ाया जाए तथा लक्ष्य के अनुसार राजस्व संग्रहण हेतु सघनता के साथ वसूली अभियान चलाया जाए।

उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर के फायदे और उपयोगिता को लेकर आमजन और उपभोक्ताओं में जनजागरूकता अभियान चलाया जाए। उन्‍होंने ग्रामीण क्षेत्रों में पात्र उपभोक्ताओं को 5 रूपये में नवीन घरेलू और कृषि पम्प कनेक्शन प्रदाय करने पर जोर देते हुए कहा कि उपभोक्ताओं को यह संदेश जाना चाहिए कि कंपनी उपभोक्ताओं के हितों को सर्वोपरि रखती है। उपभोक्ताओं सेवाओं में किसी प्रकार की कोताही न बरती जाए, उपभोक्ता सेवाओं में लापरवाही बरतने वाले और खराब परफॉरमेंस वाले कार्मिकों के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही की जाएगी।

प्रबंध संचालक ने रिवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस), एसएसटीडी, स्वयं का ट्रांसफॉर्मर योजना (ओवायटी) तथा अन्य योजनाओं की प्रगति की समीक्षा तथा योजनान्तर्गत सभी कार्यों को समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। बिजली चोरी को गंभीरता से लेते हुए उन्‍होंने कहा कि बिजली चोरी बहुल इलाकों में सघनता से चैकिंग अभियान संचालित करें तथा अनधिकृत विद्युत उपयोग की रोकथाम के लिए विद्युत अधिनियम की धाराओं के तहत वैधानिक कार्यवाही करें। उन्होंने कहा कि बिजली चोरी रोकने हेतु कंपनी की ‘‘इन्फॉर्मर स्कीम‘‘ का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार कर आमजन को जानकारी दी जाए। बिलिंग इफिशिएंशी, कलेक्शन इफिशिएंशी को बढ़ाया जाए। ऐसे वितरण केन्द्र जिनका आने वाले माहों में प्रदर्शन नहीं सुधरा तो उन वितरण केन्‍द्र प्रभारियों को कार्रवाई के लिए तैयार रहना होगा।

प्रबंध संचालक ने मीटर रीडिंग, बिल वितरण और राजस्व संग्रहण पर विशेष ध्यान देने के साथ ही बकायादार उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे कनेक्शन कटने अथवा अन्य अप्रिय कार्यवाही से बचने के लिए देय तिथि से पहले बिजली बिल जमा करें तथा बकाया देयकों के भुगतान के लिए समाधान योजना का लाभ लें।

प्रबंध संचालक ने अशोकनगर वृत्त के जूनियर इंजीनियर से लेकर उप महाप्रबंधक को सचेत किया कि आगामी माहों में परफॉरमेंस में सुधार दिखाई देना चाहिए, ताकि उपभोक्ताओं के साथ-साथ कंपनी को इसका लाभ हो। उन्होंने मैदानी स्तर उपकेन्द्रों, 33 केव्ही लाईनों, 11 केव्ही लाइनों के मैंटेनेंस पर विशेष ध्यान देने तथा ऐसे स्थानों जहां बार-बार वितरण ट्रांसफार्मर फेल होते हैं उनको चिन्हित कर तकनीकी खामियों को दूर करने के निर्देश दिए। सीएम हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों के निराकरण को गंभीरता से लें तथा जिन उपभोक्ताओं से शिकायतें प्राप्त होती हैं उनको फोन अथवा भौतिक रूप से संपर्क कर उपभोक्ता संतोष में वृद्धि करें।

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