- सरकार और व्यापारियों के गठजोड़ से किसानों की लूट जारी, महंगा बीज खरीदने को मजबूर किसान: डॉ. सुनीलम
बैतूल । किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक डॉ. सुनीलम ने कहा कि सर्वर काम न करने के कारण सोसाइटियों में रोजाना 100 किसानों को खाद मिलने की बजाय केवल 10 किसानों को ही खाद मिल पा रही है।
उन्होंने कहा कि बैंकों और सरकारी कार्यालयों के सर्वर चलते हैं लेकिन सोसाइटियों के सर्वर डाउन हो जाते हैं, जिससे राशन लेने वाले गरीबों और खाद लेने वाले किसानों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
डॉ सुनीलम ने बैतूल जिले की लगभग 91 सोसाइटियों में किसानों को प्रति एकड़ केवल दो यूरिया खाद की बोरियां दिए जाने पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह किसानों की आवश्यकता से लगभग आधा है। इसका मतलब यह है कि किसानों को आधा खाद बाजार से कई गुना दामों पर खरीदना पड़ेगा। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि सरकार खाद की जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों को संरक्षण दे रही है।
डॉ. सुनीलम ने कहा कि पर्याप्त खाद उपलब्ध नहीं होने से उत्पादन में कमी आएगी, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी, क्योंकि सरकार किसानों को समय पर पर्याप्त यूरिया उपलब्ध कराने में विफल रही है। किसानों को होने वाले नुकसान की भरपाई सरकार को करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि उन्हें याद है जब प्रधानमंत्री ने कहा था कि औसत से कम उत्पादन होने पर किसानों को फसल बीमा योजना से भरपाई की जाएगी। सरकार को राजस्व मुआवजा अथवा विशेष पैकेज देकर किसानों के नुकसान की भरपाई करनी चाहिए, क्योंकि किसानों की मेहनत में कोई कमी नहीं है।
डॉ. सुनीलम ने कहा कि जब तक सोयाबीन किसानों के पास थी तब तक उसका भाव 3500 से 4000 रुपये प्रति क्विंटल था, लेकिन वही सोयाबीन व्यापारियों के पास पहुंचते ही 8000 से 11000 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रही है। इसी प्रकार मक्का की फसल जब किसानों के पास थी तब 1200 से 1500 रुपये प्रति क्विंटल बिकी, जबकि अब बाजार में उसका भाव 2000 से 2200 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि यह किसानों की खुली लूट है और व्यापारियों तथा सरकारों के गठजोड़ का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में गेहूं लगभग 2200 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है, जबकि आने वाले समय में इसका भाव 3200 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच सकता है। यानी प्रति क्विंटल लगभग 1000 रुपये की लूट व्यापारियों द्वारा सरकार के संरक्षण में किसानों से की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह स्थिति इसलिए बनी हुई है क्योंकि सरकार किसानों को एमएसपी की कानूनी गारंटी देने को तैयार नहीं है। इसी मांग को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा गत 5 वर्षों से लगातार आंदोलन करता रहा है।
डॉ. सुनीलम ने कहा कि बाजार में मक्का का बीज 500 से 700 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है और किसानों को कंपनियों का महंगा बीज खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इतना महंगा बीज खरीदने के बावजूद किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है, जिससे किसानों में हताशा बढ़ रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि किसान विरोधी सरकार इन गंभीर मुद्दों की ओर ध्यान देने को तैयार नहीं है।
डॉ सुनीलम ने बैतूल जिले की लगभग 91 सोसाइटियों में किसानों को प्रति एकड़ केवल दो यूरिया खाद की बोरियां दिए जाने पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह किसानों की आवश्यकता से लगभग आधा है। इसका मतलब यह है कि किसानों को आधा खाद बाजार से कई गुना दामों पर खरीदना पड़ेगा। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि सरकार खाद की जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों को संरक्षण दे रही है।
डॉ. सुनीलम ने कहा कि पर्याप्त खाद उपलब्ध नहीं होने से उत्पादन में कमी आएगी, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी, क्योंकि सरकार किसानों को समय पर पर्याप्त यूरिया उपलब्ध कराने में विफल रही है। किसानों को होने वाले नुकसान की भरपाई सरकार को करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि उन्हें याद है जब प्रधानमंत्री ने कहा था कि औसत से कम उत्पादन होने पर किसानों को फसल बीमा योजना से भरपाई की जाएगी। सरकार को राजस्व मुआवजा अथवा विशेष पैकेज देकर किसानों के नुकसान की भरपाई करनी चाहिए, क्योंकि किसानों की मेहनत में कोई कमी नहीं है।
डॉ. सुनीलम ने कहा कि जब तक सोयाबीन किसानों के पास थी तब तक उसका भाव 3500 से 4000 रुपये प्रति क्विंटल था, लेकिन वही सोयाबीन व्यापारियों के पास पहुंचते ही 8000 से 11000 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रही है। इसी प्रकार मक्का की फसल जब किसानों के पास थी तब 1200 से 1500 रुपये प्रति क्विंटल बिकी, जबकि अब बाजार में उसका भाव 2000 से 2200 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि यह किसानों की खुली लूट है और व्यापारियों तथा सरकारों के गठजोड़ का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में गेहूं लगभग 2200 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है, जबकि आने वाले समय में इसका भाव 3200 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच सकता है। यानी प्रति क्विंटल लगभग 1000 रुपये की लूट व्यापारियों द्वारा सरकार के संरक्षण में किसानों से की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह स्थिति इसलिए बनी हुई है क्योंकि सरकार किसानों को एमएसपी की कानूनी गारंटी देने को तैयार नहीं है। इसी मांग को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा गत 5 वर्षों से लगातार आंदोलन करता रहा है।
डॉ. सुनीलम ने कहा कि बाजार में मक्का का बीज 500 से 700 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है और किसानों को कंपनियों का महंगा बीज खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इतना महंगा बीज खरीदने के बावजूद किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है, जिससे किसानों में हताशा बढ़ रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि किसान विरोधी सरकार इन गंभीर मुद्दों की ओर ध्यान देने को तैयार नहीं है।
