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केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह के औचक निरीक्षण में खुली राष्ट्रीय अंगूर अनुसंधान केंद्र की पोल, संस्थान निदेशक से मांगा जवाब

  • पुणे में आईसीएआर के राष्ट्रीय अंगूर अनुसंधान केंद्र का केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया औचक निरीक्षण
  • नर्सरी फेल, वैरायटी बेअसर, क्लीन प्लांट सेंटर का काम धीमा होने से  किसान प्राइवेट नर्सरियों की ओर भाग रहे  

पुणे ।  देश के 80% अंगूर उत्पादन वाले महाराष्ट्र में अंगूर उत्पादक किसानों की समस्याओं को हल करने के लिए बने आईसीएआर के राष्ट्रीय अंगूर अनुसंधान केंद्र, पुणे का आज महाराष्ट्र प्रवास के दौरान केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आकस्मिक निरीक्षण किया। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह के इस औचक निरीक्षण में राष्ट्रीय अंगूर अनुसंधान केंद्र की पोल खुल गई। मंत्री ने देखा कि वहां नर्सरी फेल है, इसकी वैरायटी बेअसर है और क्लीन प्लांट सेंटर का काम भी धीमा है, जिस पर केंद्रीय मंत्री ने तीखी नाराजगी जताते हुए कहा कि अंगूर किसानों के नाम पर सुस्ती बिल्कुल नहीं चलेगी। महाराष्ट्र के अंगूर उत्पादक किसानों की पीड़ा पर सख्त रूख अपनाते हुए शिवराज सिंह ने संस्थान के निदेशक डॉ. कौशिक बनर्जी से जवाब मांगा।



केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान राज्यों में अपने प्रवास के दौरान आईसीएआर के अंतर्गत आने वाले संस्थानों का दौरा भी करते है, साथ ही मंत्रालय से जुड़े कृषि के संस्थानों में जाकर किसानों से सीधा संवाद नियमित रूप से करते है। इसी क्रम में शिवराज सिंह आज पुणे में राष्ट्रीय अंगूर अनुसंधान केंद्र पहुंचे। संस्थान के दौरे के दौरान उन्होंने नर्सरी, किस्म विकास, रोगमुक्त पौध तैयार करने की व्यवस्था और किसानों को दिए जा रहे मार्गदर्शन की समीक्षा की तो कई स्तरों पर ढिलाई, सुस्ती और असंतोषजनक स्थिति सामने आई। जलवायु परिवर्तन, ज्यादा वर्षा, वायरस हमलों और गिरती भरोसेमंदी के बीच केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने साफ कहा कि किसानों के हित से जुड़ी संस्थाएं अब केवल नाम भर से नहीं चलेंगी, उन्हें जमीन पर परिणाम देना होगा।

शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्रीय अंगूर संस्थान का दौरा कर वहां की व्यवस्थाओं, शोध कार्यों, नर्सरी, पौध गुणवत्ता और किसानों को दी जा रही तकनीकी सहायता की बारीकी से समीक्षा की। इस दौरान किसानों की शिकायतें भी सामने आईं और संस्थान की कार्यप्रणाली के कई पहलुओं पर गंभीर सवाल खड़े हुए। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह का पूरा रुख स्पष्ट था कि किसानों के नाम पर चल रही कोई भी व्यवस्था अगर परिणाम नहीं दे रही है तो उसकी जवाबदेही तय होगी।

संस्थान के महत्व पर जोर देते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि राष्ट्रीय अंगूर अनुसंधान संस्थान एक बहुत महत्वपूर्ण संस्थान है, क्योंकि अंगूर हमारी कमर्शियल क्रॉप है और महाराष्ट्र में देश का 80% अंगूर होता है। उन्होंने कहा कि जब महाराष्ट्र जैसा राज्य देश के अंगूर उत्पादन की रीढ़ बना हुआ है, तब इस संस्थान की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है, लेकिन मौजूदा चुनौतियों के हिसाब से संस्थान की तैयारी और कार्यकुशलता अपेक्षित स्तर पर दिखाई नहीं दी।

किसानों के सामने बढ़ रही मुश्किलों का जिक्र करते हुए कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि अंगूर उत्पादक किसानों के सामने जो समस्याएँ आज आ रही हैं- क्लाइमेट चेंज, जलवायु परिवर्तन, ज्यादा बरसात, उसके कारण अंगूर की फसल को काफी नुकसान हो रहा है, अलग-अलग तरह के वायरस का अटैक; उन परिस्थितियों में संस्थान को क्या काम करना चाहिए किसानों के लिए, उस पर व्यापक पैमाने पर चर्चा हुई है।

दौरे के दौरान शिवराज सिंह ने संस्थान की नर्सरी का निरीक्षण भी किया। यहां विकसित की गई अंगूर किस्मों को लेकर गंभीर असंतोष सामने आया। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मैंने इनकी नर्सरी को भी देखा है। अलग-अलग वैरायटीज़ बनाई जरूर हैं, लेकिन उनमें से कुछ वैरायटी पॉपुलर नहीं हुई। इससे संस्थान की शोध दिशा और उसकी उपयोगिता पर सवाल खड़े हुए है। यदि विकसित किस्में किसानों के बीच स्वीकार नहीं हो रहीं, तो यह केवल वैज्ञानिक असफलता नहीं बल्कि जमीनी जरूरतों को समझने में चूक भी मानी जाएगी।



केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आज की जरूरत के हिसाब से हम ज्यादा उत्पादन देने वाली, एक्सपोर्ट क्वालिटी की और अच्छी वैरायटीज़ कैसे बना पाएँ, उस पर विचार-विमर्श हुआ है। दौरे का सबसे अहम और सबसे संवेदनशील पहलू क्लीन प्लांट सेंटर की समीक्षा रही। यह केंद्र अंगूर किसानों को स्वस्थ, रोगमुक्त और प्रमाणित पौधे उपलब्ध कराने के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन इसकी कार्य प्रगति से केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह संतुष्ट नहीं थे। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि क्लीन प्लांट सेंटर एक हम यहाँ शुरू कर रहे हैं। उसका काम बहुत धीमी गति से चल रहा है। क्लीन प्लांट सेंटर का मतलब यह है कि किसानों को स्वस्थ पौधे मिलें, रोग मुक्त पौधे मिलें। मंत्री शिवराज सिंह ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इस सेंटर की भी मैंने यहाँ आज समीक्षा की है। उसका काम जरूर मुझे संतोषजनक नहीं लगा। कई दिन हो गए। और कई चीजें की जा रही हैं, लेकिन कई चीजों को ठीक करने की जरूरत है।

बैठक में सीधे संवाद के दौरान किसानों ने अपनी समस्याएँ खुलकर रखीं और अपने सुझाव भी केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह को दिए। किसानों की शिकायत थी कि संस्थान से अपेक्षित स्तर का मार्गदर्शन नहीं मिलता, तैयार की जा रही किस्में व्यवहारिक लाभ नहीं दे रहीं और सरकारी व्यवस्था पर भरोसा कम होने के कारण उन्हें निजी नर्सरियों और निजी स्रोतों की ओर रुख करना पड़ रहा है।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने समीक्षा के बाद साफ कहा कि सरकार किसानों के हित में काम करती है और हर व्यवस्था को उसी कसौटी पर परखा जाएगा। शिवराज सिंह चौहान ने कहा-क्योंकि हम लोग किसानों के हित में काम करते हैं, तो जो आज की समस्याएँ किसानों के सामने हैं, उस पर हमने बातचीत की है और संस्थान के सामने जो चुनौती और समस्याएँ हैं, उन पर भी बातचीत की है। उन्होंने कहा कि हमारे लिए किसान हित सर्वोपरि है और संस्थान अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। राष्ट्रीय अंगूर अनुसंधान संस्थान से अपेक्षा थी कि वह जलवायु परिवर्तन, असामान्य वर्षा, वायरस हमलों और निर्यात प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियों के दौर में अंगूर किसानों के लिए समाधान का केंद्र बनेगा, लेकिन नर्सरी में अव्यवस्था, किस्मों की सीमित स्वीकार्यता, क्लीन प्लांट सेंटर की धीमी प्रगति और किसानों की शिकायतों ने यह संकेत दिया है कि संस्थान को अपनी दिशा, कार्यगति और जवाबदेही तीनों पर गंभीर आत्ममंथन करना होगा।

शिवराज सिंह चौहान का यह दौरा इसी मायने में महत्वपूर्ण है कि उन्होंने संस्थान की चमकदार सतह के पीछे छिपी कमजोरियों को सामने लाया और स्पष्ट किया कि किसानों के नाम पर सुस्त व्यवस्था अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।