- मध्य प्रदेश विधानसभा की कृषि विकास समिति का भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान का भ्रमण
भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा की कृषि विकास समिति के प्रतिनिधिमंडल ने आज भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान, भोपाल का भ्रमण किया तथा “उर्वरकों के संतुलित उपयोग एवं फसल अवशेष प्रबंधन” विषय पर आयोजित परामर्श बैठक में भाग लिया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य मध्य प्रदेश में मृदा स्वास्थ्य में सुधार, उर्वरकों के उपयोग की दक्षता बढ़ाने तथा फसल अवशेषों के सतत प्रबंधन हेतु वैज्ञानिक रणनीतियों पर विचार-विमर्श करना था।
इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सभापति ठाकुरदास नागवंशी द्वारा किया गया, जिसमें सदस्य महेंद्र सिंह चौहान, शिवनारायण सिंह, राजेश कुमार शुक्ला, श्रीमती मनीषा सिंह, महेंद्र रामसिंह यादव, श्रीकांत चतुर्वेदी, जितेंद्र पंड्या, सचिन सुभाषचंद्र यादव, साहब सिंह गुर्जर तथा निलेश पुसाराम उइके शामिल थे। भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान, भोपाल के निदेशक डॉ. मनोरंजन मोहंती ने सभी गणमान्य अतिथियों का स्वागत किया।
अध्यक्ष ठाकुरदास नागवंशी ने अपने संबोधन में कहा कि मृदा स्वास्थ्य अत्यंत महत्वपूर्ण है तथा इसका उचित प्रबंधन सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने विशेष रूप से गेहूं सहित फसलों की घटती उत्पादकता पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि किसानों में यह जागरूकता बढ़ाई जाए कि मृदा एक जीवंत इकाई है, इसलिए इसकी देखभाल आवश्यक है। उन्होंने फसल अवशेष जलाने की समस्या तथा इसके मृदा के सूक्ष्मजीवों (माइक्रोफ्लोरा एवं मायक्रोफौना) पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों पर भी गंभीर चिंता जताई।
मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय के अतिरिक्त सचिव उमेश शर्मा ने कहा कि कृषि क्षेत्र विभिन्न चुनौतियों का सामना कर रहा है, इसलिए वैज्ञानिक सुझावों और सरकारी योजनाओं को ध्यान में रखते हुए रणनीतियां विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि कृषि विकास समिति एक सलाहकार समिति के रूप में कार्य करती है, जिसमें सभी दलों के सदस्य शामिल हैं। उन्होंने प्रमुख फसलों की घटती उत्पादकता को रोकने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने फसल अवशेष जलाने के अनेक नुकसान बताए तथा आधुनिक उपकरणों एवं तकनीकों का उपयोग करके इसे शीघ्र रोकने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि फसल अवशेष जलाने की समस्या के समाधान हेतु दीर्घकालिक नीति बनाने की जरूरत है।
अध्यक्ष ठाकुरदास नागवंशी ने अपने संबोधन में कहा कि मृदा स्वास्थ्य अत्यंत महत्वपूर्ण है तथा इसका उचित प्रबंधन सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने विशेष रूप से गेहूं सहित फसलों की घटती उत्पादकता पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि किसानों में यह जागरूकता बढ़ाई जाए कि मृदा एक जीवंत इकाई है, इसलिए इसकी देखभाल आवश्यक है। उन्होंने फसल अवशेष जलाने की समस्या तथा इसके मृदा के सूक्ष्मजीवों (माइक्रोफ्लोरा एवं मायक्रोफौना) पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों पर भी गंभीर चिंता जताई।
मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय के अतिरिक्त सचिव उमेश शर्मा ने कहा कि कृषि क्षेत्र विभिन्न चुनौतियों का सामना कर रहा है, इसलिए वैज्ञानिक सुझावों और सरकारी योजनाओं को ध्यान में रखते हुए रणनीतियां विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि कृषि विकास समिति एक सलाहकार समिति के रूप में कार्य करती है, जिसमें सभी दलों के सदस्य शामिल हैं। उन्होंने प्रमुख फसलों की घटती उत्पादकता को रोकने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने फसल अवशेष जलाने के अनेक नुकसान बताए तथा आधुनिक उपकरणों एवं तकनीकों का उपयोग करके इसे शीघ्र रोकने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि फसल अवशेष जलाने की समस्या के समाधान हेतु दीर्घकालिक नीति बनाने की जरूरत है।
संस्थान के निदेशक डॉ. मनोरंजन मोहंती ने मृदा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मृदा मानव पोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, क्योंकि यह विटामिन एवं एंटीबायोटिक्स जैसे पोषक तत्वों की आपूर्ति करती है, विशेषकर “वन हेल्थ” की अवधारणा के संदर्भ में। उन्होंने बताया कि मृदा एक जीवित तंत्र है, जिसमें लाखों सूक्ष्मजीव एवं जीव-जंतु पाए जाते हैं। उन्होंने संस्थान के मिशन की जानकारी देते हुए कहा कि संस्थान का उद्देश्य मृदा उत्पादकता बढ़ाना, पर्यावरणीय क्षरण को कम करना, पोषक तत्वों के उपयोग की दक्षता बढ़ाना तथा जलवायु परिवर्तन एवं जलवायु अनुकूलन से जुड़े मुद्दों का समाधान करना है। उन्होंने संस्थान द्वारा विकसित पैन-इंडिया स्तर की विभिन्न तकनीकों जैसे न्यूट्रिएंट एटलस, ई-फार्म ऐप, जैव उर्वरक, डीकम्पोजर, फैमिली नेट वेसल, फॉस्फेट घुलनशील जीवाणु (पियसबी), मध्य प्रदेश के चार जिलों हेतु रोडमैप, जिला स्तरीय उर्वरक अनुशंसाएं आदि के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने तकनीकी हस्तांतरण को जैविक खेती, प्राकृतिक खेती, संतुलित उर्वरक उपयोग अभियान, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, कम्पोस्टिंग तकनीक आदि के विकास एवं प्रगति से जोड़ा।
इस अवसर पर संबंधित संस्थान के प्रकाशन गणमान्य व्यक्तियों को उनके संदर्भ के लिए सौंपे गए जिससे नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और किसानों को लाभ होगा। इसके पश्चात डॉ. आर.एस. चौधरी, डॉ. संजय श्रीवास्तव, डॉ. एस.आर. मोहंती तथा डॉ. संजीब के. बेहेरा द्वारा संबंधित विषयों पर व्याख्यान प्रस्तुत किए गए। डॉ. एन.के. लेंका द्वारा एक विस्तृत चर्चा सत्र का संचालन किया गया, जिसमें सभी गणमान्य अतिथियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया तथा मध्य प्रदेश में मृदा स्वास्थ्य से संबंधित पहलों को सुदृढ़ करने हेतु महत्वपूर्ण सुझाव दिए। कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. एन.के. सिन्हा, डॉ. एम. वसंदा कूमार तथा डॉ. जे.के. ठाकुर द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम में लगभग 100 प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।


