- जनजाति सुरक्षा मंच ने यूसीसी से आदिवासियों को बाहर रखने पर जताया केंद्रीय मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार
- दिल्ली रैली में देशभर के लाखों आदिवासियों ने भागीदारी करके तीन सूत्रीय मांगों को सामने रखते केंद्र सरकार से निराकरण की मांग की
भोपाल। आदिवासी समाज आक्रोशित है, क्योकि धर्मांतरण से उसकी सांस्कृतिक और पारंपरिक पहचान संकट में है। इसका बड़ा कारण यह भी है कि आदिवासियों के बारे में संविधान के हिसाब से निर्धारण ही नहीं किया गया। यह कहना है जनजाति सुरक्षा मंच टोली सदस्य प्रकाश उइके, क्षेत्र संयोजक कालू सिंह मुजाल्दा, वनवासी कल्याण परिषद अध्यक्ष सोभाग सिंह मुजाल्दा और प्रदेश महामंत्री योगीराज का, जोकि मीडिया से मुखातिब थे।

जो हमारी संस्कृति नहीं मानते, उनको आदिवासी सूची से बाहर किया जाए
जो आदिवासी परंपराओं, संस्कृति और सामाजिक ताना-बाना को नहीं मानते उनको आदिवासी सूची से बाहर किया जाए। साथ ही आदिवासी गांवोें में बिना उनकी सहमति और अनुमति के कोंई भी धार्मिक कार्यक्रम या प्रार्थना सभाएं आदि नही होनी चाहिए। भोले-भाले आदिवासियें को गलत बातें बताई जा कर सामाजिक विभेद और टकराव पैदा किया जा रहा है।
आदिवासियों को यूसीसी से बाहर रखने का किया स्वागत
आदिवासी प्रमुखों ने यूसीसी से आदिवासी समाज को बाहर रखने का निर्णय स्वागत योग्य है। वहीं इस बात पर नाराजगी भी जताई कि यूसीसी को लेकर कांग्रेस नेता भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं। भ्रम फैलाने वाले बयान दे रहे हैं, जबकि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव सार्वजनिक मंच से साफ कह चुके हैं कि आदिवासी समाज को यूसीसी में शामिल नहीं किया जाएगा।

धर्म बदलने वालों की डी लिस्टिंग की जाए
जनजाति सुरक्षा मंच और वनवासी कल्याण परिषद ने धर्म बदलने के बाद आदिवासी संस्कृति का त्याग करनेवालों की डी लिस्टिंग करने की मांग की है। इस बारे में प्रकाश उइके और कालू सिंह मुजाल्दा ने कहा कि आदिवासी ग्रामों में बिना गांववालों की अनुमति के किसी अन्य धर्म की सभाएं और आयोजन पूरी तरह बैन होने चाहिए। इसके लिए ग्राम पंचायतों में जागरुकता अभियान भी चला रहे हैं। ताकि भ्रमजाल फैलाकर आदिवासियों को बरगला नहीं सके।
एसटी/ एससी और माइनारिटी का अवैध लेने पर कार्रवाई हो
जनजाति सुरक्ष मंच ने कहा है कि धर्म बदलने वाले एसटी और एससी का आरक्षण का अवैध लाभ ले रहे हैं। साथ ही अल्पसंख्यक कोटे का भी फायदा उठाते हैं। इससे सरकार की सिर्फ एसटी/एससी के लिए संचालित योजनाओं का अवैध फायदा धर्मांतरित उठा रहे हैं। इससे समाज में आर्थिक असमानता बढ़ती जा रही है और असली आदिवासी पिछड़ते जा रहे हैं।
जनजाति सुरक्षा मंच ने यह तीन प्रमुख मांगें की हैं
-लोकुर समिति के अनुसार जनजाति समाज की वैधानिक परिभाषा निर्धारित की जाए। ताकि संस्कृति की रक्षा हो सके।
-अनुसूचित जनजाति आदेश 1950 में संशोधन करके धर्मांतरण करने वालों को एसटी लिस्ट से बाहर किया जाए।
-जनजातीय समुदायों के संवैधानिक अधिकारों और अस्मिता की रक्षा का प्रावधान किया जाए। उल्लंघन पर कठोर प्रावधान हों।