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धामेश्वरी देवी जी ने कहा: यह संसार नश्वर, परिवर्तनशील और क्षणभंगुर है, वास्तविक स्वरूप समझकर ही हो सकता है मानव जीवन सफल

रीवा ।  राधा गोविंद सत्संग समिति, रीवा के तत्वावधान में श्री राम दरबार मंदिर, संजय नगर में आयोजित सात दिवसीय दिव्य आध्यात्मिक प्रवचन एवं रसिक संकीर्तन महोत्सव के चौथे दिवस परम कृपालु, जगद्गुरुत्तम श्री कृपालु जी महाराज की प्रचारिका, परम पूज्या सुश्री धामेश्वरी देवी जी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि यह संसार नश्वर, परिवर्तनशील और क्षणभंगुर है। जो व्यक्ति इसे ही स्थायी सत्य मानकर मोह, ममता और भौतिक सुखों में उलझा रहता है, वह कभी वास्तविक सुख और शांति प्राप्त नहीं कर सकता।



उन्होंने कहा कि संसार में जन्म, मृत्यु, सुख और दुःख का चक्र निरंतर चलता रहता है। इसलिए बुद्धिमान मनुष्य को संसार में रहते हुए भी उससे आसक्त नहीं होना चाहिए, बल्कि भगवान श्रीराधा-कृष्ण की निष्काम भक्ति को अपने जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य बनाना चाहिए। ईश्वर से जुड़ने पर ही मनुष्य को स्थायी आनंद, शांति और परम कल्याण की प्राप्ति होती है।

धामेश्वरी देवी जी ने जगद्गुरुत्तम श्री कृपालु जी महाराज के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा कि मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ है। इसे केवल सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति में न लगाकर भगवान की प्रेममयी भक्ति, नाम-स्मरण, सत्संग एवं गुरु कृपा प्राप्त करने में लगाना चाहिए। यही जीवन की वास्तविक सफलता है।

प्रवचन के उपरांत श्रद्धालुओं ने भावपूर्ण श्री राधा-कृष्ण नाम संकीर्तन में भाग लिया। संकीर्तन के दौरान पूरा वातावरण भक्तिरस से सराबोर हो गया और श्रद्धालु भक्ति-भाव में झूम उठे।

राधा गोविंद सत्संग समिति ने सभी श्रद्धालुओं से आगामी प्रवचनों में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर दिव्य सत्संग एवं संकीर्तन का लाभ लेने की अपील की है।