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दिग्विजय सिंह का खुलासा-अगर भाजपा सरकार ने सहमति दे दी होती हो 2007 में ही मिल जाता मप्र के बासमती को जीआई टैग

  • मध्यप्रदेश के बासमती को जीआई टैग दिलाने सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस की ओर से लडेगे दिग्गज वकील अभिषेक मनु सिंघवी और कपिल सिब्बल
  • पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की अगुवाई में रायसेन जिले के उदयपुरा में तीन जिलों के बासमती धान उत्पादक किसानों से संवाद किया गया संवाद

भोपाल।  
मध्यप्रदेश के बासमती चावल को जीआई टैग दिलवाने की लड़ाई शुरु हो गई है और इसको सुप्रीम कोर्ट में दिग्गज वकील अभिषेक मनु सिंघवी और कपिल सिब्बल लडेंगे। साथ ही मप्र के 16 बासमती उत्पादक जिलो के किसान पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की अगुवाई में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का बंगला घेरेंगे।


यह भरोसा पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मंगलवार को रायसेन जिले के उदयपुरा में आयोजित किसान संवाद में दिलाया, जिसमें रायसेन के अलावा नर्मदापुरम और नरसिंहपुर के ढ़ाई हजार से ज्यादा बासमती धान उत्पादक किसान पहुंचे थे। इस मौके पर पूर्व सांसद रामेश्वर नीखरा, रायसेन जिला अध्यक्ष एवं विधायक देवेंद्र पटेल, पूर्व विधायक देवेंद्र सिंह गडरवास, भगवान सिंह पटेल, नरसिंहपुर की पूर्व विधायक सुनीता पटेल, प्रदेश महामंत्री राजेंद्र सिंह तोमर आदि थे। किसान संवाद दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे तक चला, जिसमें किसानों ने अपनी परेशानी, नुकसान और शंकाओं को आगे रखा, जिनका दिग्विजय सिंह ने समाधान किया और संघर्ष का आव्हान किया।

किसान संवाद के दौरान रायसेन, नर्मदापुरम, सीहोर, नरसिंहपुर, मंदसौर सहित विभिन्न जिलों से आए बासमती धान उत्पादक किसानों ने अपनी समस्याएं और सुझाव रखे। किसानों ने पूसा बासमती धान की पहचान, उत्पादन, उचित मूल्य और निर्यात से जुड़े विषयों पर चर्चा की तथा मध्य प्रदेश के बासमती चावल को GI टैग दिलाने की मांग को प्रमुखता से उठाया।


2007 में ही मिल जाता मध्यप्रदेश को जीआई टैग

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने किसानों को बताया कि उन्होंने 2007 में तत्कालीन केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार से मप्र के बासमती को जीआई टैग  (Geographical Indication)  दिलाने की पहल की थी, लेकिन तत्कालीन मप्र की भाजपा सरकार ने सहमति नहीं दी। अब इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में चल रहे केस में मनु सिंघवी और कपिल सिब्बल को खड़ा किया जाएगा।

दिग्विजय सिंह ने इस दौरान कहा कि मध्य प्रदेश में हर साल करीब 27 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा बासमती चावल का उत्पादन होता है। यहां का बासमती चावल अन्य राज्यों से बेहतर किस्म का है। लेकिन GI टैग न मिलने के कारण पंजाब और अन्य राज्यों के व्यापारी मध्य प्रदेश के बासमती चावल में अपने राज्यों का GI टैग लगाकर निर्यात करने का लाभ कमा रहे हैं। इससे मध्य प्रदेश के किसान अपने हक से वंचित हो रहे हैं और उन्हें खुद के उगाए चावल का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।

सिंह ने केंद्र सरकार पर मध्य प्रदेश के किसानों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए कहा कि GI टैग के अभाव में प्रदेश के किसान अपने ही उगाए बासमती चावल का पूरा लाभ नहीं ले पा रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से मध्य प्रदेश के बासमती चावल को तत्काल GI टैग देने की मांग की।

सिंह ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2013 में तत्कालीन कृषि मंत्री शरद पवार से मुलाकात कर मध्य प्रदेश के बासमती चावल का GI टैग स्वीकृत करवाया था, लेकिन मोदी सरकार आने के बाद वर्ष 2016 में इसे निरस्त कर दिया गया। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्य है कि आज देश के केंद्रीय कृषि मंत्री मध्य प्रदेश से हैं, इसके बावजूद प्रदेश को बासमती चावल के लिए GI टैग नहीं दिया गया।

उन्होंने कहा कि यदि मध्य प्रदेश को बासमती चावल का GI टैग मिल जाता है तो राज्य से करीब 40 फीसदी बासमती चावल का निर्यात किया जा सकता है। इससे प्रदेश के किसानों को अपनी उपज की बेहतर पहचान और उसका उचित लाभ मिल सकेगा।

श्री सिंह ने कहा कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश जैसे राज्य के पास 77 GI टैग हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर एक ही दिन में 21 GI टैग दिए गए। वहीं मध्य प्रदेश को उसके बासमती चावल के लिए GI टैग से वंचित रखा जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिख चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई।

उन्होंने कहा कि यह भी दुर्भाग्यपूर्ण है कि केंद्रीय कृषि मंत्री मध्य प्रदेश से हैं, लेकिन उन्होंने प्रदेश के बासमती उत्पादक किसानों के हित में इस दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के बासमती चावल का बड़ा हिस्सा उसी क्षेत्र में उत्पादित होता है, जहां से केंद्रीय कृषि मंत्री चुनाव जीतकर आते हैं।


16 जिलों के किसान घेरेंंगे कृषि मंत्री का बंगला

बासमती धान उत्पादक प्रदेश के 16 जिलों के किसान दिग्विजय सिंह की अगुवाई में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का बंगला घेरेंगे। दिग्विजय सिंह ने कहा कि बंगले के सामने सड़क पर धरना देंगे। उन्होंने कहा कि अत्याचारो से किसानों की लड़ाई नहीं थमने वाली।

किसान नेता केदार सिरोही, प्रतीक शर्मा (गाडरवारा), परमजीत सिंह, मुकेश शर्मा सहित अन्य किसान प्रतिनिधियों ने दिग्विजय सिंह के समक्ष अपने विचार और सुझाव रखे। संवाद का उद्देश्य बासमती उत्पादक किसानों की समस्याओं और उनके हितों से जुड़े मुद्दों को साझा मंच पर उठाना रहा।

सालाना 4 लाख मीट्रिक टन का उत्पादन

-मध्यप्रदेश में सालाना 4 लाख मीट्रिक टन बासमती चावल का उत्पादन होता है। बासमती धान उत्पादक जिलों में मध्य प्रदेश के रायसेन, सीहोर, विदिशा, नर्मदापुरम (हशंगाबाद), ग्वालियर, जबलपुर और नरसिंहपुर समेत 16 जिलों में बासमती धान होता है।

चावल मप्र का और मुनाफा पंजाब-हरियाणा को

जीआई टैग नहीं होने से पंजाब और अन्य राज्यों के व्यापारी मध्य प्रदेश से कम कीमत पर बासमती चावल खरीदते हैं और अपने राज्यों का जीआई टैग लगाकर उसे ऊंचे दामों पर खाड़ी देशों सहित अन्य देशों को भेजते हैं।


जीआई टैग नहीं होने से मप्र के किसानों को घाटा

जीआई टैग नही होने से मप्र के किसान रात-दिन मेहनत के बाद भी वाजिब मुनाफे से वंचित हैं। टैग नहीं होने से घरेलू बाजार में ही कम कीमत पर बेचने से अंतरराष्ट्रीय बाजार का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। जीआई टैग न मिलने से मध्य प्रदेश के किसानों को उनके उत्पाद का उचित और अंतरराष्ट्रीय बाजार के हिसाब से सही मूल्य नहीं मिल पा रहा है।


फालतू के तर्क देकर पंजाब और हरियाणा कर रहे विरोध


पंजाब और हरियाणा के निर्यातक एवं किसान संगठन मध्य प्रदेश को बासमती जीआई जोन में शामिल करने के खिलाफ हैं। इनका दावा है कि इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय बासमती की मान्यता और प्रमाणीकरण पर असर पड़ेगा। तर्क दिया जाता है कि मध्य प्रदेश इंडो-गैंगेटिक प्लेन (सिंधु-गंगा के मैदानी इलाके) के पारंपरिक दायरे में नहीं आता है।