इस रास्ते से गुजरने वाले ग्रामीणों के साथ-साथ स्कूली विद्यार्थियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने बिजली कंपनी और ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मिलीभगत और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर पोल इसी तरह कमजोर स्थिति में रहे तो तेज बारिश, हवा या किसी वाहन की टक्कर से बड़ा हादसा हो सकता है।
अब सवाल यह है कि बिजली के पोल लगाने के काम में तय मापदंडों का पालन हुआ या नहीं?
ग्रामीणों ने मामले की जांच कर कमजोर पोलों को दोबारा मजबूत बेस के साथ लगाने और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल निगाहें बिजली कंपनी और संबंधित अधिकारियों की जांच और कार्रवाई पर टिकी हैं।