डब्ल्यूसीआर-एनसीटीई (वेस्टर्न रीजनल कमेटी-नेशनल काउंसिल आफ टीचर्स एजूकेशन) के दफ्तर में घुसकर तोड़फोड़ करने और प्रोग्राम आफीसर से मारपीट करने पर प्रदेश कांगेस कमेटी के सचिव आसिफ जकी और उनके साथी चंदू को ढ़ाई-ढ़ाई साल के सश्रम कारावास सहित जुर्माने की सजा सुनाई गई है।
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| कांग्रेस पार्टी नेताओं के साथ आसिफ जकी |
कॉलेज संचालक और कांग्रेस नेता ने एनसीटीई के दफ्तर में घुसकर किया था प्रोग्राम आफीसर पर हमला
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी वर्षा शर्मा ने शासकीय कार्य में बाधा ड़ालने, बिना इजाजत सरकारी कार्यालय में घुसने के बाद गाली गलौच करने का दोषी ठहराते हुए जवाहरलाल नेहरु कॉलेज के संचालक आसिफ जकी और चंदू उर्फ चंद्रमा सिंह को विभिन्न धाराओं के तहत कुल मिलाकर ढ़ाई-ढ़ाई साल की सजा और जुर्माने की सजा सुनाई है। अभियोजन के अनुसार 4 जून,2008 को आसिफ जकी और चंदू एक राय होकर मानस भवन स्थित एनसीटीई कार्यालय में जबर्दस्ती घुस गए और प्रोग्राम अधिकारी प्रभु कुमार यादव के साथ न सिर्फ झूमा झटकी और गाली गलौच किया, बल्कि जान से मारने की धमकी देते हुए तोड़फोड़ भी की। आसिफ जकी अपने कॉलेज के बजाय दूसरे कॉलेज के बारे में अनर्गल सवाल पूछ रहे थे, जिसका यादव ने विरोध किया था वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क करने का सुझाव दिया था। इसी पर भड़कते हुए आसिफ और चंदू ने वारदात कर ड़ाली।
इसकी रिपोर्ट होने पर श्यामला हिल्स थाना के तत्कालीन प्रभारी शिवप्रसाद सिंह कुशवाहा ने जांच की और धारा 452, 294, 332, 506 ताहि के तहत अभियोग पत्र पेश किया था। गौरतलब होगा कि, प्रभुकुमार यादव का इस घटना के बाद ही तबादला हो गया था और फिलहाल एनसीटीई के भुवनेश्वर रीजनल कार्यालय में पदस्थ हैं।
अदालत ने माना माफी के काबिल नहीं
अदालत ने इस मामले में अपना फैसला सुनाते हुए धारा 506 ताहि का अपराध सिद्ध नहीं पाए जाने पर दोषमुक्त कर दिया। हालांकि, धारा 452 ताहि में दोषी ठहराते हुए दो-दो वर्ष के सश्रम कारावास और 200-200 रुपए के जुर्माने से दंड़ित किया। इसी तरह धारा 332 ताहि में छह-छह महीने का कारावास और 100-100 रुपए का जुर्माने की सजा दी। धारा 294 ताहि के तहत 100-100 रुपए का जुर्माना लगाया। इस तरह आरोपियों को ढाई-ढाई साल सश्रम कारावास और 300-300 रुपए का जुर्माने की सजा भुगतनी होगी। अदालत ने आरोपियों की ओर से परिवीक्षा का लाभ दिए जाने की याचना को ठुकराते हुए साफ कर दिया कि अपराध की गंभीरता और प्रवृत्ति को देखने के बाद माफी नहीं दी जा सकती।
