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आशापुर में 30 घंटे तक बिजली गुल, खालवा में 9 लोग रात भर पेड़ पर बैठे रहे

हरसूद/खंडवा। मंगलवार सुबह 7 बजे का वक्त। अग्नि नदी के टूटे पुल से खंडवा या अन्य स्थान पर जाने वाले यात्री पैदल निकल रहे हैं, जबकि आशापुर गांव में सन्नाटा छाया है। कुछ घरों में सामान उठाने, रखने व खींचने की आवाजें आ रही थीं। कुछ लोग घर के अंदर से शटर उठाने की मशक्कत कर रहे हैं। एक दिन अब तक की सबसे भीषण बाढ़ ने पूरे गांव को आगोश में ले लिया था। रात में सुबह की स्थिति की चिंता लिए अधूरी नींद से आंख खुलते ही कीचड़, मलबा और फैली सामग्री हटाने में हर परिवार जुट गया। चारों तरफ बर्बादी के नजारे दिखाई दे रहे थे। वहीं खालवा गांव में 9 लोग रात भर पेड़ पर बैठे रहे।
बस्तर में बाढ़ लगातार बारिश से हर घंटे 3 से 4 सेमी बढ़ रहा इंद्रावती नदी का जलस्तर
सबसे पहले यहां से आहट हुई : भास्कर ने जब आशापुर में कदम रखा, तब सन्नाटे के बीच कहीं हलचल नहीं थी। कुछ मकानों की पहली मंजिल से बच्चे मुख्य मार्ग की ओर एकटक देख रहे थे। पहली आहट मेन रोड स्थित दिलीप जैन के घर से आई। जनरेटर स्टार्ट हुआ। पूरा परिवार दुकान के अंदर और बाहरी हिस्से में बाढ़ से इकट्‌ठा कीचड़ पानी के सहारे साफ कर रहा था। जैन ने बताया लाखों रुपए का नुकसान हो गया। कपड़ों की गठानें बाढ़ में बह गईं, कुछ गठानें दुकान के मलबे में खराब हो गईं। यहां से 20 मीटर दूर दूसरी शटर इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं के व्यापारी संजय जैन की खुली। उनकी दुकान नदी से 50 मीटर दूर है। बाढ़ ने उनके मकान-दुकान को इस कदर चपेट में लिया कि पीछे की दीवार ढहने से टीवी, एलसीडी, पंखे, फ्रिज, कूलर सहित स्टाक का पूरा माल बह गया। किराना, मोबाइल, कटलरी, चाय-पान, होटल, मेडिकल, बर्तन ऐसी कोई दुकान नहीं बची, जहां बाढ़ ने तबाही नहीं मचाई। सड़क किनारे दुकान-मकानों में 4 से 6 फीट पानी अपने निशान छोड़ गया। ट्रक, कार, बाइक बहने से रोकने के लिए उन्हें रस्से से बांधना पड़ा।
खंडवा रोड : मकानों में तैरती वस्तुओं को बचाया
खंडवा रोड स्थित विमलचंद बरड़िया और उनके बेटे मकानों में तैरती वस्तुओं को सुरक्षित करने में जुटे नजर आए। सामने आशीष कुमरावत भी कमरे से पानी उलीच रहे थे। इसी दौरान मोहन सिंह राजपूत ने उसके मकान की ओर इशारा किया। वहां ईंटों के ढेर में गेहूं से भरी कोठी और पास ही 15-20 भैंसें बंधी हुई थीं। मोहनसिंह ने बताया आशापुर में ऐसी भीषण बाढ़ तीन पीढ़ियों ने नहीं देखी।
मौके पर प्रशासन की टीम पहुंची
बाढ़ पीडितों की स्थिति देखने के बीच सूचना मिली कि नायब तहसीलदार सहदेव मौर्य 15-20 पटवारियों के साथ आ गए हैं। मौर्य ने भास्कर को बताया एसडीएम और तहसीलदार आ रही हैं। मीटिंग के बाद सर्वे कार्य तत्काल शुरू किया जाएगा।
वार्ड 6 व 10 के 3 मोहल्ले पूरी तरह नष्ट
आशापुर पंचायत के वार्ड क्रमांक 6 में कहारवाड़ी मोहल्ला तथा वार्ड 10 का गोंड व हरिजन मोहल्ला सबसे ज्यादा बाढ़ की चपेट में आया। यहां कच्चे मकान धराशायी हो गए। नदी से 300 से 400 मीटर दूर स्थित इन मोहल्लों में बाढ़ की बात पूछने पर पीड़ित सिहर उठते हैं। ढह चुके मकान की ओर इशारा करते बस इतना ही कहते हैं- कुछ नहीं बचा। यहां अग्नि नदी के पानी की उछाल मकानों से ऊपर रही। किसानों के घरों में 50-50 बोरे गेहूं, जानवरों का भूसा, लकड़ी, गृहस्थी का सामान बह गया। कहार, गोंड व अजा मोहल्ले में पीड़ित रिमझिम बारिश के चलते पेटी, पत्थर या मुंडेर पर बैठे, इस पशोपेश में नजर आए कि बाढ़ से उबरने की शुरुआत कहां से की जाए। मजदूरों के घरों में थोड़ा खाद्यान्न बचा, उसे सुखाकर उपयोग की जद्दोजहद भी होती रही। इसी मोहल्ले के मनोहर भाई की बेटी बाढ़ में बह चुके मकान के आंगन में स्तब्ध खड़ी थी।
खालवा में 9 लोगों ने पेड़ पर बिताई रात
तेज बारिश से सुंदरदेव की पटवा नदी ने प्रचंड रूप धारण कर लिया था। सोमवार सुबह 6 बजे बारिश तेज हो गई। 7 बजे तक गांव में पानी घुसने लगा। ग्रामीण भागकर जंगल में ऊंचे स्थान पर पहुंच गए। बाढ़ में 14 मकान व 200 परिवारों के दैनिक उपयोग की सामग्री बह चुकी थी। सोमवार दोपहर बाद बाढ़ उतरने पर कुछ लोग गांव पहुंचे तो पता चला 9 लोग बाढ़ में फंस गए हैं। उन्होंने पेड़ पर बैठकर पूरी रात व दिन गुजारा।
20 फीट ऊंचे पुल से 3 फीट ऊपर बहा पानी
सोमवार को बारिश के चलते सांवलीखेड़ा के पास मांझरी नदी की बाढ़ का हाल यह था कि 20 फीट ऊंचे पुल से भी 3 फीट ऊपर पानी बह रहा था। खंडवा-देड़तलाई मार्ग अवरुद्ध हो गया। ब्लाक मुख्यालय के मकान-दुकानों में पानी घुस गया। नगर के मध्य बहने वाहे नाले पर अतिक्रमण के कारण मुख्य मार्ग पर 3 फीट पानी भर गया था। बाजार चौक की किराना, कटलरी, स्टेशनी, होटल आदि में लाखों रुपए का नुकसान हुआ है। व्यापारियों को जरूरी सामग्री उठाने तक का मौका नहीं मिला।

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