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सीमेंट उद्योग में प्लास्टिक कचरे के सह-दहन से एक लाख मीट्रिक टन कोयले की बचत

भोपाल।  प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण के लिये सीमेंट उद्योग में प्लास्टिक कचरे के निष्पादन के लिये वैज्ञानिक पद्धतियों को मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा प्रोत्साहित किया जा रहा है। अब तक प्रदेश की सीमेंट इकाईयों में लगभग 54 हजार 220 मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरे का सह-दहन किया जा चुका है। इस प्रक्रिया से लगभग एक लाख 8 हजार 500 मीट्रिक टन कोयले की बचत सुनिश्चित हुई है।

प्रदेश में लगभग 300 मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरा प्रतिदिन उत्पन्न होता है। इसमें से लगभग 225 मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरा रि-सायकल में चला जाता है। प्रतिदिन 75 मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरा पर्यावरण में विद्यमान रहता है। प्लास्टिक अपशिष्ट एक ज्वलनशील पदार्थ है, जिसमें कोयले की अपेक्षा अधिक केलोरीफिक वैल्यू होती है। इसे 850 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान पर जलाने से किसी भी तरह की हानिकारक गैसों का उत्सर्जन नहीं होता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सीमेंट उद्योगों में प्लास्टिक कचरे के निष्पादन की व्यवस्था को प्रोत्साहित किया है।

प्रदेश में प्लास्टिक थैलियों के उत्पादन, भण्डारण, परिवहन, विक्रय और उपयोग पर लागू किये गये प्रतिबंध को प्रभावशील ढंग से क्रियान्वित किये जाने के लिये प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला प्रशासन संयुक्त रूप से कार्यवाही कर रहे हैं। वर्ष 2018 में पॉलिथीन के उपयोग की रोकथाम के लिये जन-जागृति अभियान चलाए गये। इस दौरान लगभग 37 मीट्रिक टन प्लास्टिक कैरी बैग जप्त किये गये नगरीय निकायों द्वारा दोषियों से करीब 34 लाख रूपये अर्थदण्ड वसूला गया।