बॉलीवुड डेस्क। पिछले साल बॉलीवुड में मीटू मूवमेंट की शुरुआत करने वाली तनुश्री दत्ता ने उन्नाव रेप केस पर अपनी राय रखी है। उन्होंने इस मामले पर एक स्टेटमेंट जारी किया है जिसमें उन्होंने कहा-हमारा महान देश भारत धीरे-धीरे और निरंतर रूप से रेप जैसी महामारी से प्रभावित देश बनता जा रहा है ।
तनुश्री ने उठाए कई सवाल। तनुश्री ने आगे कहा, भारत से ज्यादातर खबरें महिलाओं और बच्चों के रेप, गैंगरेप, भ्रूण ह्त्या, दहेज़ के लिए हत्या और यहां तक कि बकरी और कुत्ते के रेप को लेकर सुनने को मिलती हैं। इसके अलावा भी कुछ लोग ऐसे हैं जो संस्कारी कल्चर का राग अलापते हैं और उसके बाद उन महिलाओं को जज करते हैं जो शॉर्टस और बिकिनी पहनती हैं। दुनियाभर में ऐसी जगह भी मौजूद हैं जहां पर महिलाएं समंदर किनारे बिकिनी पहने पड़ी रहती हैं पर उन्हें ना तो कोई छेड़ता है ना ही उनका रेप होता है। '
लोग बदलें मानसिकता। तनुश्री ने आगे कहा कि हमारे देश के लोगों को अपनी मानसकिता बदलनी होगी। दरअसल, शरीर को ढंकना समस्या नहीं है बल्कि समस्या है हमारी संकीर्ण मानसिकता। अपनी आंखें खोलिए और समाज में फैले अंधकार को समझने की कोशिश कीजिए। इतनी बड़ी आबादी वाले देश में ये जो दूषित हवा फैली हुई है ये हमारे सिद्धांतों को ध्वस्त करने पर आतुर है। हमारे युवा रेप ड्रग्स, डिप्रेशन और आत्महत्या से मर रहे हैं। ख़ुशी का इंडेक्स कम हो रहा है। हम इंसानियत से ज्यादा धार्मिक और सामाजिक मूल्यों पर ध्यान दे रहे हैं और जिसका परिणाम सामने है। आंतरिक परिवर्तन जरुरी है। 1.6 मिलियन लोगों को अपने मन और विचारों को बदलने की जरुरत है।
तनुश्री ने उठाए कई सवाल। तनुश्री ने आगे कहा, भारत से ज्यादातर खबरें महिलाओं और बच्चों के रेप, गैंगरेप, भ्रूण ह्त्या, दहेज़ के लिए हत्या और यहां तक कि बकरी और कुत्ते के रेप को लेकर सुनने को मिलती हैं। इसके अलावा भी कुछ लोग ऐसे हैं जो संस्कारी कल्चर का राग अलापते हैं और उसके बाद उन महिलाओं को जज करते हैं जो शॉर्टस और बिकिनी पहनती हैं। दुनियाभर में ऐसी जगह भी मौजूद हैं जहां पर महिलाएं समंदर किनारे बिकिनी पहने पड़ी रहती हैं पर उन्हें ना तो कोई छेड़ता है ना ही उनका रेप होता है। '
लोग बदलें मानसिकता। तनुश्री ने आगे कहा कि हमारे देश के लोगों को अपनी मानसकिता बदलनी होगी। दरअसल, शरीर को ढंकना समस्या नहीं है बल्कि समस्या है हमारी संकीर्ण मानसिकता। अपनी आंखें खोलिए और समाज में फैले अंधकार को समझने की कोशिश कीजिए। इतनी बड़ी आबादी वाले देश में ये जो दूषित हवा फैली हुई है ये हमारे सिद्धांतों को ध्वस्त करने पर आतुर है। हमारे युवा रेप ड्रग्स, डिप्रेशन और आत्महत्या से मर रहे हैं। ख़ुशी का इंडेक्स कम हो रहा है। हम इंसानियत से ज्यादा धार्मिक और सामाजिक मूल्यों पर ध्यान दे रहे हैं और जिसका परिणाम सामने है। आंतरिक परिवर्तन जरुरी है। 1.6 मिलियन लोगों को अपने मन और विचारों को बदलने की जरुरत है।
