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शिक्षा प्रणाली में समाहित हो भविष्य की चुनौतियाँ - मंत्री श्री पटवारी

भोपाल। उच्च शिक्षा मंत्री श्री जीतू पटवारी ने बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के 49वें स्थापना दिवस समारोह में कहा है कि शिक्षा प्रणाली में भविष्य की चुनौतियाँ समाहित होना चाहिये। श्री पटवारी ने कहा कि जब बच्चों का भविष्य बनाने की बात आती है, तो विश्वविद्यालयों में किसी भी विचारधारा को बढ़ावा नहीं देना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा का पहला उद्देश्य बच्चों को एक परिपक्व इंसान बनाना है, जिससे वे कल्पनाशील और वैचारिक रूप से स्वतंत्र हो सकें।

मंत्री श्री पटवारी ने कहा कि अब्दुल हफीज मोहम्मद बरकतउल्ला ने देश की आजादी के लिये काम किया है। शिक्षा क्षेत्र में उनकी महत्वपूर्ण सहभागिता रही है। उन्होंने कहा कि बरकतउल्ला विश्वविद्यालय गंगा-जमुनी तहज़ीब की अनूठी मिसाल है। उन्होंने कहा कि गुरू-‍शिष्य परम्परा भारतीय संस्कृति की पहचान है। श्री पटवारी ने कहा कि उच्च शिक्षा की उत्कृष्टता के लिये प्रदेश में बजट और विजन की कमी नहीं है। उन्होंने बताया कि बरकतउल्ला विश्वविद्यालय को अगले वर्ष नैक की सर्वोच्च रैंकिंग अर्जित करने योग्य बनाने के लिये इस वर्ष 55 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि जल्द ही प्रोफेसर्स की नियुक्ति की जायेगी।

विश्वविद्यालय के कुलपति श्री आर.जे. राव ने कहा कि व्यापक और गुणात्मक शिक्षा के लिये अध्ययन और अध्यापन प्रणाली में भी बदलाव की आवश्यकता है।

उच्च शिक्षा मंत्री श्री जीतू पटवारी ने विश्वविद्यालय में 35, 25, 20 और 15 वर्ष सेवा-काल पूर्ण कर चुके शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारी को सम्मानित किया। उन्होंने विश्वविद्यालय के एन.सी.सी, एन.एस.एस कैडेट्स, यंग साईंटिस्ट अवार्ड प्राप्त श्रीमती पूनम आर्य और श्री अभिनव भार्गव और माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली प्रदेश की पहली महिला पर्वतारोही कुमारी मेघा परमार को सम्मानित किया। श्री पटवारी ने विजन-2025 पत्रिका का विमोचन भी किया। उन्होंने 'एक अभियान-धरती के श्रंगार का' कार्यक्रम में विश्वविद्यालय परिसर में पौधा-रोपण भी किया।

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