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मुंबई के 26/11 और संसद हमले के बाद आतंकी कैम्पों को तबाह करना चाहते थे, सरकार ने मंजूरी नहीं दी: पूर्व वायुसेना प्रमुख


चंडीगढ़। देश में दो बड़े आतंकी हमलों के बाद भारतीय वायुसेना पाकिस्तान में मौजूद आतंकी कैम्पों को ध्वस्त करना चाहती थी, लेकिन तत्कालीन सरकार ने मंजूरी नहीं दी। पूर्व वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ ने शनिवार को यह दावा किया। धनोआ 31 दिसंबर 2016 से 30 सितंबर 2019 तक एयरफोर्स चीफ रहे हैं। वे पहले भी कह चुके हैं कि वायुसेना पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आतंकी कैम्प तबाह करने के लिए तैयार थी लेकिन राजनीतिक नेतृत्व ने अनुमति नहीं दी। उन्होंने ये भी कहा है कि पुलवामा हमले के बाद केंद्र की मंजूरी के बाद ही बालाकोट में एयरस्ट्राइक की गई।

एयरचीफ मार्शल धनोआ ने एक सवाल के जवाब में कहा- 2001 में संसद हमला हुआ। 2008 में मुंबई को निशाना बनाया गया। इसे 26/11 हमला कहा जाता है। 2001 में जम्मू-कश्मीर विधानसभा पर हमला हुआ। इस हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने पीओके में मौजूद आतंकी कैम्पों को नेस्तनाबूद करने की योजना बनाई। दो बार यह प्रस्ताव केंद्र सरकार के समक्ष रखा गया। दोनों ही बार मंजूरी नहीं मिल सकी। बता दें कि 2001 में एनडीए सरकार में अटल बिहारी वाजपेयी और 2008 में यूपीए सरकार में मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे।
हम पाकिस्तान से बहुत आगे थे
धनोआ के मुताबिक, मुंबई हमले के बाद तत्कालीन एयरफोर्स प्रमुख पीओके में हमले के लिए तैयार थे। तकनीकी रूप से भी हम दुश्मन से काफी आगे थे। एयरफोर्स हमले के लिए हमेशा तैयार रहती है। हमारे पास इसकी भरपूर क्षमता भी है। लेकिन, अंतिम निर्णय तो सरकार को ही लेना है। पुलवामा में हमारे सैनिकों पर आतंकी हमला हुआ। इसके बाद हमने पाकिस्तान के बालाकोट में एयरस्ट्राइक की। यह इसलिए संभव हो सका क्योंकि सरकार ने इसकी इजाजत दी।” पुलवामा में 44 जवानों की शहादत के बाद वायुसेना ने 26 फरवरी को पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद के कई आतंकी ठिकाने तबाह किए थे। 

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